Nana Patekar Death: 'क्या मरने के बाद उत्पीड़न करने वाला साधु बन जाता है?' तनुश्री दत्ता के समर्थन में उतरीं संध्या मृदुल
मुंबई। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन के बाद जहां एक तरफ पूरा बॉलीवुड और उनके प्रशंसक गहरे शोक में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ तनुश्री दत्ता के तीखे बयान ने फिल्म इंडस्ट्री को दो खेमों में बांट दिया है। तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर के जाने पर सहानुभूति जताने से इनकार करने और 'मरने से किए गए कांड नहीं मिटते' वाले बयान के बाद जब सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा था, तब अब इस पूरे विवाद में मशहूर अभिनेत्री संध्या मृदुल खुलकर तनुश्री के बचाव में उतर आई हैं। संध्या मृदुल ने सोशल मीडिया पर एक लंबी और बेबाक पोस्ट साझा करते हुए समाज के दोहरे मापदंडों पर तीखे सवाल दागे हैं और पूछा है कि क्या किसी व्यक्ति की मृत्यु होते ही उसके द्वारा किया गया कथित उत्पीड़न अपने आप धुल जाता है और वह व्यक्ति संत बन जाता है?
'क्या मरने के बाद कोई साधु बन जाता है?': संध्या मृदुल का तीखा प्रहार
संध्या मृदुल ने अपने बयान में तनुश्री दत्ता को ऑनलाइन निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने लिखा कि हमारे समाज की यह पुरानी और पाखंडी फितरत रही है कि किसी के इस दुनिया से जाते ही हम उसके सारे गुनाहों पर पर्दा डाल देते हैं और उसे महान साबित करने की होड़ में लग जाते हैं। संध्या ने सवाल उठाया कि क्या मौत किसी आरोपी के अतीत को पूरी तरह बेदाग बना देती है? उन्होंने कहा कि जिस महिला ने सालों तक उस सदमे, मानसिक यंत्रणा और करियर के नुकसान को झेला है, उसे यह उपदेश देना कि वह अब अपने दर्द को भूलकर हाथ जोड़ ले, यह सरासर अन्याय है। एक पीड़िता से यह उम्मीद करना कि वह शोक के झूठे ढकोसले में शामिल हो जाए, असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।
#MeToo आंदोलन का दौर और महिलाओं के साझा संघर्ष की गूंज
संध्या मृदुल खुद भी साल 2018 के 'मी टू' (#MeToo) आंदोलन के दौरान फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न और असहज अनुभवों के खिलाफ खुलकर बोलने वाली मुखर आवाजों में शामिल रही हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब 2018 में भारत में यह आंदोलन शुरू हुआ था, तो उसकी नींव तनुश्री दत्ता के उस साहस पर टिकी थी, जिसने एक ताकतवर और बड़े सितारे के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत दिखाई थी। संध्या ने कहा कि उस समय भी महिलाओं को चुप कराने की कोशिश की गई थी और आज जब वह शख्स दुनिया में नहीं रहा, तब भी उसी पीड़िता को अपने जज्बात जाहिर करने पर चरित्र हनन और नफरत का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि दर्द की कोई समय-सीमा नहीं होती और किसी भी इंसान को यह तय करने का हक नहीं है कि दूसरा व्यक्ति अपने घावों पर कब और कैसे प्रतिक्रिया दे।
सोशल मीडिया पर दो फाड़ हुआ बॉलीवुड और फैंस का नजरिया
संध्या मृदुल के इस बयान के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस और ज्यादा गर्मा गई है।
एक तरफ जहां नाना पाटेकर के चाहने वाले और कई सिने प्रेमी यह तर्क दे रहे हैं कि भारतीय संस्कारों में जाने वाले के प्रति कटुता भुला देने की परंपरा रही है और शोक संतप्त परिवार के सम्मान में मर्यादा का पालन होना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और प्रोग्रेसिव विचारों वाले लोगों का कहना है कि न्याय और सच कभी मौत के आगे गौण नहीं हो सकते। संध्या मृदुल के समर्थन ने इस बात को साबित कर दिया है कि इंडस्ट्री के भीतर यौन शोषण और ताकत के दुरुपयोग के खिलाफ जो रोष था, वह किसी के देहांत के बाद भी आसानी से दफन नहीं होने वाला है।
विवादों के बीच नाना पाटेकर को दी जा चुकी है अंतिम विदाई
गौरतलब है कि 75 वर्षीय नाना पाटेकर का गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था, जिसके बाद पुणे स्थित उनके फार्महाउस 'नानाची वाड़ी' में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
उनके पीछे उनके बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी नीलकांति पाटेकर हैं। सिनेमा के इस महानायक ने भले ही पर्दे पर अपने अभिनय और निजी जिंदगी में किसानों के कल्याण के लिए किए गए सामाजिक कार्यों से एक अमिट छाप छोड़ी हो, लेकिन तनुश्री दत्ता के बयान और अब संध्या मृदुल के इस खुले समर्थन ने यह दिखा दिया है कि बॉलीवुड का #MeToo विवाद अपने पीछे ऐसे कड़वे सवाल छोड़ गया है, जो किसी के जाने के बाद भी पूरी तरह शांत होने का नाम नहीं ले रहे हैं।