इमरान खान केस में नया मोड़: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- राज्य सरकार को भी बनाइए पार्टी
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता और आमिर खान के भांजे इमरान खान को लेकर कानूनी गलियारों और फिल्म जगत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब उन्हें केंद्र सरकार के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा भारत छोड़ने का सख्त नोटिस जारी कर दिया गया। इस प्रशासनिक फरमान के खिलाफ अभिनेता ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि याचिका में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार को भी आवश्यक पक्षकार यानी प्रतिवादी बनाया जाए।
अदालत में इमरान खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने मामले को तत्काल प्रभाव से सूचीबद्ध करने और अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया। हालांकि, केंद्र सरकार और एफआरआरओ की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को अवगत कराया कि उन्हें याचिका की प्रति सुनवाई से महज कुछ मिनट पहले ही प्राप्त हुई है। ऐसे में सरकार को अपना विस्तृत पक्ष और हलफनामा दाखिल करने के लिए न्यूनतम समय की आवश्यकता है। दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की अगली नियमित सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को तय कर दी है।
'लीव इंडिया' नोटिस को चुनौती, 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का था अल्टीमेटम
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ 14 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया वह सरकारी आदेश है, जिसमें इमरान खान को एक अमेरिकी नागरिक बताते हुए 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का फरमान सुनाया गया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर वह स्वेच्छा से देश नहीं छोड़ते हैं, तो इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट (IFA) 2025 की धारा 29 के तहत उन्हें जबरन निर्वासित (डिपॉर्ट) करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
अभिनेता के वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि 26 अक्टूबर को सुनवाई होने से उनके मुवक्किल के पास बेहद कम समय बचेगा, क्योंकि 28 अक्टूबर की अंतिम तिथि सिर पर होगी। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को आश्वस्त किया कि सरकारी पक्ष 26 अक्टूबर को पूरी कानूनी तैयारी के साथ उपस्थित होगा और विस्तृत बहस करेगा। अभिनेता की कानूनी टीम का मुख्य उद्देश्य 26 अक्टूबर की सुनवाई में इस निष्कासन नोटिस पर तत्काल अंतरिम रोक हासिल करना है, जबकि मुख्य याचिका में इस पूरे नोटिस को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए पूरी तरह निरस्त करने की मांग की गई है।
अगस्त क्रांति मैदान विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी नागरिकता का पूरा विवाद
यह पूरा मामला मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। 10 अक्टूबर को शहर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। मुंबई पुलिस और जांच एजेंसियों का आरोप है कि इमरान खान भी इस विरोध प्रदर्शन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें इमरान खान भी शामिल थे। हालांकि प्राथमिक पूछताछ के बाद उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया गया था।
इसके ठीक चार दिन बाद एफआरआरओ मुंबई ने अभिनेता को 'लीव इंडिया' का नोटिस थमा दिया। नोटिस में कहा गया कि चूंकि इमरान खान के पास संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) की नागरिकता है, इसलिए एक विदेशी नागरिक होने के नाते वे भारत की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों या सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों में भाग नहीं ले सकते, जो वीजा और नागरिकता नियमों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, शनिवार को उन्हें एक अन्य 'कारण बताओ नोटिस' भी भेजा गया, जिसमें पूछा गया कि नागरिकता अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनका ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड का दर्जा क्यों न हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाए।
42 साल से भारत में रिहाइश और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 की दलील
अदालत में दायर याचिका में इमरान खान ने अपनी पृष्ठभूमि और भारत से अपने गहरे संबंधों का विस्तार से उल्लेख किया है। याचिका में कहा गया है कि इमरान खान का जन्म भले ही अमेरिका में हुआ हो और तकनीकी रूप से उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट हो, लेकिन वे दो वर्ष की नन्ही उम्र से ही निरंतर भारत में रह रहे हैं। वह पिछले 42 वर्षों से मुंबई में रहकर भारतीय सिनेमा और संस्कृति से जुड़े हुए हैं और देश में नियमित टैक्सपेयर हैं। याचिका में यह भी बताया गया कि वे पिछले 15 वर्षों से भारतीय पासपोर्ट और पूर्ण नागरिकता प्राप्त करने के लिए औपचारिक कानूनी प्रक्रिया में जुटे हुए हैं।
वरिष्ठ वकील ने पीठ के सामने स्पष्ट किया कि इमरान खान का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और न ही वे किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में लिप्त रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन वाले दिन इमरान रास्ते में ही थे और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे भी नहीं थे कि पुलिस ने एहतियातन उन्हें रोक लिया था। याचिका में तर्क दिया गया है कि बिना कोई ठोस जांच किए, बिना चार्जशीट दाखिल किए और बिना अपना पक्ष रखने का न्यायसंगत अवसर दिए सीधे देश छोड़ने का आदेश देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा भारत की धरती पर मौजूद विदेशी नागरिकों को भी प्राप्त होती है, जिसका इस कार्रवाई में खुला उल्लंघन हुआ है।
26 अक्टूबर को अगली अहम सुनवाई, क्या मिलेगी अंतरिम राहत?
हाई कोर्ट द्वारा महाराष्ट्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश दिए जाने के बाद अब इस मामले का दायरा और विस्तृत हो गया है। चूंकि कानून-व्यवस्था और एफआईआर दर्ज करने का अधिकार क्षेत्र राज्य पुलिस यानी मुंबई पुलिस के अधीन आता है, इसलिए अदालत राज्य प्रशासन का रुख भी सीधे तौर पर समझना चाहती है। मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिक जांच रिपोर्ट में जो धाराएं लगाई गई हैं, वे सभी जमानती हैं और उनमें अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का ही प्रावधान है। ऐसे में केवल एक जमानती मामले के आधार पर किसी व्यक्ति को देश से बाहर कर देना कितना तर्कसंगत है, इस पर 26 अक्टूबर को तीखी बहस होने के आसार हैं।
बॉलीवुड जगत और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की नजरें अब सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। 26 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ यह तय करेगी कि क्या 28 अक्टूबर के अल्टीमेटम पर अंतरिम रोक लगाई जाएगी या केंद्र सरकार के रुख के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। यदि अदालत से अंतरिम स्थगनादेश नहीं मिलता है, तो अभिनेता के सामने गंभीर कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल इमरान खान और उनकी कानूनी टीम सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज और राज्य सरकार को शामिल करने के संशोधित प्रारूप तैयार करने में जुटी हुई है।