टाइगर श्रॉफ पर हमले की पूरी इनसाइड स्टोरी: 10 दिन पहले मुंबई पहुंचे थे शूटर, 45 मिनट तक घात लगाकर किया इंतजार
बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई अंधाधुंध गोलीबारी कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसे एक सुनियोजित और पेशेवर साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। राजस्थान के कोटा से पकड़े गए तीनों आरोपियों से मुंबई क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि शूटर करीब 10 दिन पहले ही मुंबई पहुंच चुके थे और एक सोची-समझी रणनीति के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में छिपकर टाइगर की दैनिक गतिविधियों की टोह ले रहे थे। इन हमलावरों को विदेशी हैंडलर्स के जरिए सटीक दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे कि किस दिन, किस वक्त और किस जगह पर टारगेट को घेरना है।
हमलावरों ने मुंबई में अपने 10 दिनों के प्रवास के दौरान पश्चिमी उपनगरों में अस्थाई ठिकाने बनाए। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का मुख्य काम टाइगर के रूटीन की हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाना था। इसके लिए वे न केवल जमीनी स्तर पर रेकी कर रहे थे, बल्कि सोशल मीडिया पर पैपराजी और ब्लॉगर्स द्वारा शेयर किए जाने वाले रियल-टाइम वीडियोज और लोकेशन अपडेट्स पर भी गिद्ध दृष्टि बनाए हुए थे। उन्हें अच्छी तरह पता था कि टाइगर रविवार की शाम अक्सर बांद्रा और जुहू के स्पोर्ट्स क्लब्स या पार्कों में फुटबॉल खेलने पहुंचते हैं।
45 मिनट तक पार्क के बाहर घात लगाकर किया इंतजार
वारदात वाले दिन यानी रविवार शाम की पूरी टाइमलाइन अब जांच एजेंसियों के सामने आ चुकी है। आरोपी शाम करीब 6 बजकर 15 मिनट पर ही जुहू स्थित पुष्पा नरसी पार्क के पास अपनी चोरी की बाइक से पहुंच गए थे। उन्होंने पार्क के मुख्य निकास द्वार से थोड़ी दूरी पर एक ऐसे अंधेरे और रणनीतिक मोड़ पर अपनी गाड़ी खड़ी की, जहां से टाइगर की बीएमडब्ल्यू कार पर सीधी नजर रखी जा सके। शूटरों ने पूरे 45 मिनट तक ठंडे दिमाग से इंतजार किया। इस दौरान वे लगातार फोन के जरिए अपने हैंडलर से संपर्क में थे और आसपास के माहौल पर नजर गड़ाए हुए थे।
शाम ठीक 7 बजे जब टाइगर श्रॉफ अपने मैच के बाद पसीने से तर-बतर होकर अपने ड्राइवर फिरदौस के साथ कार की ओर बढ़े, हमलावरों ने हरकत शुरू कर दी। जैसे ही टाइगर कार में बैठने लगे और ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की, बाइक सवार हमलावर तेजी से करीब आए और बेहद नजदीक से कार की खिड़कियों और फ्रंट विंडशील्ड को निशाना बनाकर करीब 5 से 7 राउंड ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। 45 मिनट की इस घात और अचानक हुई फायरिंग से मौके पर भगदड़ मच गई।
ड्राइवर हुआ लहूलुहान तो टाइगर ने खुद संभाली स्टीयरिंग
हमलावरों का पहला निशाना सीधे टाइगर श्रॉफ थे, लेकिन ऐन वक्त पर ड्राइवर फिरदौस बीच में आ गया और गोलियों के छर्रे उसे जा लगे। गोलियों की आवाज और शीशे टूटने की खौफनाक आवाज के बीच ड्राइवर बुरी तरह घायल होकर ड्राइविंग सीट पर ही गिर पड़ा। ऐसे जानलेवा संकट के पलों में टाइगर श्रॉफ ने अपने फिल्मी स्टंट्स जैसी ही असाधारण फुर्ती और सूझबूझ का परिचय दिया।
टाइगर ने घबराने या कार से बाहर भागने के बजाय अंदर ही झुककर खुद को गोलियों की सीध से बचाया। इसके बाद उन्होंने खून से लथपथ ड्राइवर को तुरंत सहारा दिया और फ्रंट पैसेंजर सीट से ही ड्राइविंग सीट पर कूदकर कार का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। टाइगर ने तेज रफ्तार में गाड़ी को रिवर्स किया और हमलावरों के चंगुल से गाड़ी को निकालते हुए सीधे नजदीकी अस्पताल का रुख किया। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि टाइगर ने उन चंद सेकंड्स में यह त्वरित फैसला न लिया होता, तो शूटर कार को घेरकर और भी घातक हमला कर सकते थे।
₹50,000 एडवांस, पिस्तौल ठिकाने लगाई और ट्रेन से हुए फरार
पूछताछ में यह बात भी साफ हो चुकी है कि इन तीनों नौजवानों को इस वारदात के लिए महज ₹50,000 की अग्रिम रकम (एडवांस) दी गई थी। बाकी की बड़ी रकम काम पूरा होने और सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचने के बाद दी जानी तय हुई थी। फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद हमलावर विले पार्ले की संकरी गलियों से होते हुए अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे। वहां उन्होंने पहले से तय योजना के मुताबिक इस्तेमाल की गई बाइक को लावारिस छोड़ दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रेन में सवार होने से पहले आरोपियों ने हथियार मुंबई में ही किसी अज्ञात स्थानीय मददगार को सौंप दिए या जमीन में दबा दिए, क्योंकि कोटा में गिरफ्तारी के वक्त उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। इसके बाद तीनों आरोपी अंधेरी से पुणे पहुंचे और वहां से पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में सवार हो गए। उनकी योजना जयपुर से दिल्ली और फिर सड़क मार्ग से नेपाल भागने की थी। हालांकि, मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा तकनीकी निगरानी से निकाले गए इनपुट्स के आधार पर कोटा जीआरपी और सिटी पुलिस ने ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर रुकते ही तीनों को दबोच लिया।
विदेशी हैंडलर्स और स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की पड़ताल
इस खौफनाक खुलासे के बाद मुंबई पुलिस अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि मुंबई जैसे महानगर में इन हमलावरों को 10 दिनों तक पनाह किसने दी। उन्हें सिम कार्ड, फर्जी पहचान पत्र, रेकी के लिए दोपहिया वाहन और अत्याधुनिक हथियार किसने मुहैया कराए। पुलिस को संदेह है कि मुंबई में एक सक्रिय स्थानीय सिंडिकेट मौजूद है जो विदेश में बैठे गैंगस्टर्स जैसे लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े आकाओं के इशारे पर नए लड़कों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देता है।
महाराष्ट्र सरकार और पुलिस विभाग ने अब उन सभी कड़ियों को खंगालना शुरू कर दिया है। गिरफ्तार आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाकर क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा क्रॉस-क्वेश्चनिंग की जा रही है। 10 दिनों की रेकी और 45 मिनट की घात लगाने की यह खौफनाक कहानी यह साबित करती है कि यह हमला कितना गंभीर था और किस्मत तथा टाइगर की तत्परता ने ही उस दिन एक बहुत बड़े हादसे को टाल दिया।