टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाने वाले तीनों शूटर कोटा से गिरफ्तार, मिले थे ₹50,000 एडवांस; नेपाल भागने की थी तैयारी
बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। वारदात के महज 15 घंटे के भीतर राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीनों मुख्य संदिग्ध हमलावरों को धर दबोचा गया। रविवार शाम जुहू के पुष्पा नरसी पार्क के पास उस वक्त गोलियां चलाई गई थीं जब टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलकर अपनी बीएमडब्ल्यू कार से लौट रहे थे। इस हमले में टाइगर बाल-बाल बचे थे, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस और पास मौजूद एक ऑटो चालक को छर्रे लगने से चोटें आई थीं। घटना के तुरंत बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने 15 विशेष टीमों का गठन कर तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के जरिए शूटरों की लोकेशन ट्रैक करना शुरू किया था।
हमलावर वारदात को अंजाम देकर अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास अपनी बाइक छोड़कर पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12939) के जनरल कोच में सवार हो गए थे। मुंबई पुलिस द्वारा रियल-टाइम इनपुट साझा किए जाने के बाद कोटा सिटी पुलिस और राजस्थान की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। कोटा की पुलिस अधीक्षक (एसपी) तेजस्विनी गौतम के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ट्रेन के कोटा पहुंचते ही केवल 15 मिनट के भीतर पूरे कोच को घेरकर तीनों को हिरासत में ले लिया।
वारदात के लिए मिले थे ₹50,000 एडवांस, नेपाल भागने की थी पूरी साजिश
पुलिस पूछताछ में इस जानलेवा हमले को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शूटरों को इस हमले को अंजाम देने के लिए कुल ₹50,000 की रकम एडवांस के तौर पर दी गई थी। आरोपियों की योजना ट्रेन के जरिए पहले जयपुर और फिर दिल्ली पहुंचने की थी, जहां से वे सड़क मार्ग के जरिए नेपाल फरार होने की फिराक में थे। हालांकि दिल्ली पहुंचने से पहले ही कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस के जाल में वे फंस गए।
कोटा एसपी तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों के पास से ट्रेन में कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है, जिससे आशंका है कि उन्होंने इस्तेमाल किए गए देसी कट्टे या पिस्टल वारदात के तुरंत बाद मुंबई में ही किसी अन्य हैंडलर को सौंप दिए थे या रास्ते में कहीं छिपा दिए थे। आरोपियों को कोटा के पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय में रखकर गहन पूछताछ की गई और अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया जा रहा है।
10 दिनों से रेकी और सोशल मीडिया से ट्रैक कर रहे थे टाइगर का रूटीन
जांच एजेंसियों द्वारा की गई पूछताछ में यह भी सामने आया है कि शूटर पिछले 10 दिनों से मुंबई में डेरा डाले हुए थे। वे टाइगर श्रॉफ के घर, उनके बांद्रा स्थित जिम और उनकी दैनिक गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे थे। हमलावर सोशल मीडिया पर एक्टिव पैपराजी के वीडियोज और ब्लॉगर्स के पोस्ट्स के जरिए भी टाइगर की हर पल की मूवमेंट और लोकेशन ट्रैक कर रहे थे।
उन्हें पूरी तरह पता था कि टाइगर श्रॉफ हर रविवार शाम जुहू के ग्राउंड में फुटबॉल खेलने आते हैं। वारदात वाले दिन आरोपियों ने करीब 45 मिनट तक इलाके की रेकी की और जैसे ही शाम करीब सात बजे टाइगर अपनी कार की ओर बढ़े, बाइक सवार हमलावरों ने करीब 5 से 7 राउंड गोलियां दाग दीं। फायरिंग के दौरान जब ड्राइवर घायल हुआ तो टाइगर श्रॉफ ने खुद सूझबूझ दिखाते हुए फ्रंट पैसेंजर सीट से ड्राइविंग सीट संभाली और गाड़ी को तेजी से निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान: दो हरियाणा और एक बिहार का शूटर
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान भी पुलिस द्वारा सार्वजनिक कर दी गई है। इनमें से दो आरोपी हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान 18 वर्षीय रेहान और फूल सिंह के रूप में हुई है। वहीं तीसरा आरोपी ऋतिक कुमार उर्फ रोशन (या एक 17 वर्षीय नाबालिग) बिहार के बेगूसराय जिले का निवासी बताया जा रहा है।
शुरुआती जांच के अनुसार, इन नौजवानों को पैसों के लालच में अपराध की दुनिया में धकेला गया था। मुंबई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), धारा 3(5) (साझा इरादा) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट के विदेशी नेटवर्क पर जांच की सुई
वारदात के कुछ ही देर बाद कथित तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो क्लिप जारी कर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित और हरमन संधू ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पुलिस अब इस दावे की फॉरेंसिक और तकनीकी पुष्टि कर रही है। मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि महाराष्ट्र में किसी भी अंडरवर्ल्ड या सिंडिकेट को सिर उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत से बाहर बैठकर इन शूटरों को निर्देश देने वाले मास्टरमाइंड्स के खिलाफ केंद्र सरकार और इंटरपोल की मदद से अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच अब तीनों शूटरों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाएगी कि ₹50,000 की सुपारी किसने भिजवाई थी और मुंबई में उन्हें लॉजिस्टिक्स व हथियार मुहैया कराने वाला स्थानीय मददगार कौन था।