'हम AIADMK के विधायक नहीं तोड़ रहे, हमारा कोई टारगेट नहीं': टीवीके मंत्री के. जी. अरुणराज का बड़ा बयान

'हम AIADMK के विधायक नहीं तोड़ रहे, हमारा कोई टारगेट नहीं': टीवीके मंत्री के. जी. अरुणराज का बड़ा बयान

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) और विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच विधायकों के पाला बदलने को लेकर मचे सियासी घमासान पर टीवीके सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे 'विधायकों की खरीद-फरोख्त' और दबाव की राजनीति के आरोपों को खारिज करते हुए टीवीके सरकार के वरिष्ठ मंत्री के. जी. अरुणराज ने कहा है कि उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक के विधायकों को तोड़ने या अपनी ओर खींचने का कोई सक्रिय अभियान नहीं चला रही है। चेन्नई के किल्पॉक मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि टीवीके का ऐसा कोई 'मिशन' या 'टारगेट' नहीं है, लेकिन अगर विपक्षी दलों के विधायक अपने नेतृत्व से नाराज होकर खुद संपर्क करते हैं, तो पार्टी हालात के अनुसार फैसला लेगी।

'हमारा कोई टारगेट नहीं, खुद छोड़कर आएंगे तो देखेंगे': मंत्री का बयान

पत्रकारों द्वारा अन्नाद्रमुक में संभावित टूट और टीवीके में नए विधायकों के शामिल होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री के. जी. अरुणराज ने कहा:

"देखिए, हमारा ऐसा कोई टारगेट नहीं है। विपक्षी विधायकों को आकर्षित करने के लिए हमारे पास कोई मिशन या एजेंडा नहीं चल रहा है। जब वे विधायक अपनी ही पार्टी के आंतरिक कारणों और कलह के चलते अपने नेतृत्व को खारिज कर हमारे पास आएंगे, तब हम उस स्थिति पर विचार करेंगे। समय आने पर देखेंगे कि क्या फैसला लेना है।"

मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) लगातार विजय और उनकी सरकार पर अन्नाद्रमुक के विधायकों को 'चुराने' और अपनी सरकार को मजबूत करने के लिए असंवैधानिक हथकंडे अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।

मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 6 बागी विधायकों के इस्तीफे की मंजूरी बरकरार

इस सियासी बयानबाजी के पीछे की पृष्ठभूमि मद्रास हाई कोर्ट का हालिया फैसला है। दरअसल, मई में विधानसभा में विश्वास मत के दौरान व्हिप का उल्लंघन करने और बाद में अन्नाद्रमुक से इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थामने वाले 6 विधायकों के मामले में विधानसभा स्पीकर जे. सी. डी. प्रभाकर ने उनके इस्तीफे मंजूर कर लिए थे। अन्नाद्रमुक ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी।

मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने स्पीकर के इस्तीफे स्वीकार करने के फैसले को वैध ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 190 के तहत स्पीकर को केवल यह देखना होता है कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है या नहीं। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि इस्तीफा स्वीकार होने से दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत चल रही अयोग्यता की कार्यवाही खत्म नहीं होती, और स्पीकर को दो महीने के भीतर यह लंबित कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

उपचुनावों में जीत से मजबूत हुई विजय सरकार, विपक्ष ने लगाया था खरीद-फरोख्त का आरोप

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी टीवीके ने अन्य विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी। इसके बाद अन्नाद्रमुक से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हुईं महिला नेता मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) ने टीवीके के टिकट पर उपचुनाव लड़ा और दोनों ने अपनी सीटें दोबारा जीतकर विधानसभा में टीवीके के संख्याबल को और मजबूत कर दिया।

उपचुनाव में मिली इस जीत पर मुख्यमंत्री विजय ने इसे 'लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत' बताया था और कहा था कि उनकी पार्टी ने बिना पैसे बांटे जनता का विश्वास जीता है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (DMK) और ईपीएस (AIADMK) ने इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और विश्वासघात करार दिया था।

अन्नाद्रमुक में अंदरूनी घमासान: क्या और विधायक छोड़ सकते हैं पार्टी?

मंत्री अरुणराज के इस बयान से स्पष्ट है कि टीवीके आक्रामक रूप से अन्नाद्रमुक पर हमला करने के बजाय रक्षात्मक और रणनीतिक रुख अपना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नाद्रमुक के भीतर नेतृत्व संकट, चुनावी हार और भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण कई मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री विजय के बढ़ते जनाधार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। टीवीके नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि वह पारंपरिक दलों की तरह हॉर्स-ट्रेडिंग में शामिल नहीं है, बल्कि जिन नेताओं का अपने पुराने दलों से मोहभंग हो रहा है, उनके लिए पार्टी के दरवाजे स्वाभाविक रूप से खुले हैं।