'रामायण' में रावण बने यश की इंडस्ट्री को दो टूक: 'कोशिश की तारीफ करें, आपस में लड़ते रहे तो खत्म हो जाएंगे'

'रामायण' में रावण बने यश की इंडस्ट्री को दो टूक: 'कोशिश की तारीफ करें, आपस में लड़ते रहे तो खत्म हो जाएंगे'

कन्नड़ सिनेमा से निकलकर पैन-इंडिया सुपरस्टार बने यश इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी पौराणिक फिल्म 'रामायण' को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। भगवान राम की अमर गाथा पर बन रही इस भव्य फिल्म में जहां रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में नजर आएंगे, वहीं यश लंकाधिपति रावण के ऐतिहासिक और जटिल किरदार को पर्दे पर जीवंत करने जा रहे हैं। यश केवल इस फिल्म में अभिनय ही नहीं कर रहे, बल्कि वे अपने प्रोडक्शन हाउस 'मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस' के जरिए इसके सह-निर्माता भी हैं। हाल ही में एक राष्ट्रीय मंच पर फिल्म और भारतीय सिनेमा के भविष्य पर चर्चा करते हुए यश ने इंडस्ट्री के भीतर चल रही आपसी खींचतान, भाषा की सीमाओं और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति पर खुलकर अपनी राय रखी।

यश ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय सिनेमा आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां से वह पूरी दुनिया के सामने अपनी सांस्कृतिक पहचान और सिनेमाई ताकत का लोहा मनवा सकता है। ऐसे दौर में जब कोई फिल्ममेकर हमारे सबसे बड़े महाकाव्य 'रामायण' को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैमाने पर बनाने का जोखिम उठा रहा है, तो पूरी इंडस्ट्री को उसका साथ देना चाहिए। किसी भी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उपहास उड़ाने या उसमें कमियां तलाशने से पहले उसके पीछे लगी कड़ी मेहनत और कोशिश की सराहना की जानी चाहिए।

'आपस में लड़ते रहे तो विदेशी इंडस्ट्री आगे निकल जाएगी'

यश ने फिल्म जगत के निर्माताओं, समीक्षकों और कलाकारों को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए एक बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "अगर हम उत्तर बनाम दक्षिण, बॉलीवुड बनाम साउथ, या भाषा और क्षेत्रीय सीमाओं के नाम पर आपस में ही लड़ते रहे, तो हम कभी भी ग्लोबल सिनेमा के मंच पर अपनी वास्तविक ताकत नहीं दिखा पाएंगे। जब तक हम अपने ही आंगन में एक-दूसरे की टांग खींचते रहेंगे, तब तक हॉलीवुड और अन्य विदेशी इंडस्ट्रीज हमारे बाजारों पर राज करती रहेंगी।"

यश के अनुसार, 'रामायण' केवल हिंदी या दक्षिण की फिल्म नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। अगर इसे 800 या 1000 करोड़ रुपये के अभूतपूर्व बजट के साथ वैश्विक दर्शकों के सामने पेश किया जा रहा है, तो इसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा का परचम लहराना है। उन्होंने कहा कि जब कोई बड़ा सपना देखता है, तो असफलता का डर हमेशा रहता है, लेकिन डर के मारे कोशिश ही न करना सबसे बड़ा अपराध है। इसलिए इंडस्ट्री को एकजुट होकर ऐसे साहसी कदमों का हौसला बढ़ाना चाहिए, न कि रिलीज से पहले ही उसे विवादों की भेंट चढ़ाना चाहिए।

रावण के किरदार को चुना क्यों? यश ने खोला राज

फिल्म में रावण का नकारात्मक या ग्रे-शेड किरदार निभाने के अपने फैसले पर भी यश ने खुलकर बात की। 'केजीएफ' जैसी ब्लॉकबस्टर सीरीज के बाद यश किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में सीधे नायक की भूमिका चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने 'रामायण' में रावण का किरदार निभाने का साहसी फैसला किया। इस पर यश ने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर वह हमेशा ऐसी चुनौतियों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें कम्फर्ट जोन से बाहर निकालें।

यश ने रावण के चरित्र का विश्लेषण करते हुए कहा, "रावण सिर्फ एक खलनायक नहीं था, वह एक प्रकांड पंडित, असाधारण योद्धा, शिव भक्त और अत्यंत जटिल व्यक्तित्व का स्वामी था। उसके अहंकार ने उसके ज्ञान को ढक दिया था, और यही अंतर्विरोध उसे सिनेमा के सबसे शक्तिशाली और चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक बनाता है। अगर आप रावण के चरित्र को गहराई और गरिमा के साथ पेश नहीं करेंगे, तो भगवान राम के पराक्रम और मर्यादा की महानता पूरी तरह निखरकर सामने नहीं आ सकती।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस किरदार को एक नया आयाम देने के लिए भारी शारीरिक और मानसिक तैयारी से गुजर रहे हैं।

रणबीर कपूर के साथ जुगलबंदी और पैन-इंडिया सिनेमा का असली रूप

फिल्म में रणबीर कपूर के साथ अपनी ऑन-स्क्रीन टक्कर को लेकर भी यश खासे उत्साहित दिखे। रणबीर की अभिनय क्षमता की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जब दो अलग-अलग फिल्म उद्योगों के कलाकार एक बड़े विजन के लिए हाथ मिलाते हैं, तभी सच्चा पैन-इंडिया सिनेमा साकार होता है। नितेश तिवारी के निर्देशन पर पूरा भरोसा जताते हुए यश ने कहा कि टीम किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है और तकनीक से लेकर कहानी की प्रामाणिकता तक हर पहलू पर अत्यंत बारीकी से काम किया जा रहा है।

यश ने यह भी माना कि पौराणिक कथाओं पर काम करते समय दर्शकों की भावनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं। पिछली कुछ फिल्मों में हुए विवादों का परोक्ष संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि टीम इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि हमारी संस्कृति के साथ किसी भी तरह का सतही खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि रिसर्च, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग और संवादों पर वर्षों का समय लगाया गया है।

नकारात्मकता छोड़ भारतीय कहानियों को विश्व मंच पर ले जाने की अपील

अपने संबोधन के अंत में सुपरस्टार यश ने दर्शकों, मीडिया और फिल्म उद्योग के सभी हितधारकों से अपील की कि वे रचनात्मकता को पनपने का मौका दें। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास और पौराणिक ग्रंथों में दुनिया की सबसे बेहतरीन कहानियां मौजूद हैं। मार्वल या डीसी की काल्पनिक दुनिया से कहीं ज्यादा समृद्ध हमारे अपने ग्रंथ हैं, लेकिन उन्हें दुनिया तक पहुंचाने के लिए हमें अपने ही लोगों का विश्वास और सकारात्मक समर्थन चाहिए।

यश ने जोर देकर कहा कि आलोचना का स्वागत होना चाहिए, लेकिन वह आलोचना काम देखने के बाद और रचनात्मक सुधार के इरादे से होनी चाहिए, पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर नहीं। 'रामायण' को लेकर यश का यह सीधा और परिपक्व संदेश अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और फैंस से लेकर समीक्षक तक उनके इस एकजुटता वाले नजरिए की जमकर तारीफ कर रहे हैं।