दो तिहाई बहुमत की चर्चा के बीच फिर आए राज्यसभा उपचुनाव, परिसीमन बिल पर हलचल; एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली एमपी सीट पर 12 नवंबर को मतदान
संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में बहुप्रतीक्षित 'परिसीमन बिल 2026' और संविधान संशोधन विधेयकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में आवश्यक दो तिहाई बहुमत और विभिन्न दलों के सियासी समीकरणों की जारी चर्चाओं के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। यह चुनाव पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता एल मुरुगन के राज्यसभा और मंत्रिपरिषद से अचानक दिए गए इस्तीफे के कारण कराया जा रहा है।
26 अक्टूबर से नामांकन, 12 नवंबर को डाले जाएंगे वोट
चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मध्य प्रदेश से रिक्त हुई इस राज्यसभा सीट के लिए चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी:
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नामांकन की शुरुआत: 26 अक्टूबर
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नामांकन की अंतिम तिथि: 2 नवंबर
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मतदान की तिथि: 12 नवंबर (सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)
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मतगणना: 12 नवंबर शाम 5:00 बजे
एल मुरुगन मध्य प्रदेश से 2024 में दोबारा चुनकर उच्च सदन पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2030 तक निर्धारित था। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से मुक्त करने का अनुरोध किया था, ताकि वे तमिलनाडु में आगामी विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत कर सकें।
मध्य प्रदेश में भाजपा की मजबूत स्थिति, किसे मिलेगा मौका?
मध्य प्रदेश विधानसभा के संख्याबल को देखते हुए इस सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। 230 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 163 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। हालांकि, पार्टी इस सीट से किसे मैदान में उतारेगी, इसे लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि हाल ही में मंत्रिपरिषद में खाली हुई जगहों या पार्टी के किसी राष्ट्रीय रणनीतिकार को उच्च सदन में भेजने के लिए इस सीट का उपयोग किया जा सकता है।
हाल ही में यूपी की 10 सीटों पर हुए थे चुनाव, 8 पर जीती थी भाजपा
इससे पूर्व उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने 8 और समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें निर्विरोध जीती थीं। भाजपा की ओर से धर्मपाल सिंह, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, प्रियंका सिंह रावत, गोपीकृष्ण पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार उच्च सदन पहुंचे थे, जबकि सपा की ओर से प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
परिसीमन बिल और दो तिहाई बहुमत की सियासी बिसात
इस उपचुनाव का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाने के लिए आम सहमति बनाने में जुटी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू विपक्ष, विशेषकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से लगातार संपर्क साधे हुए हैं। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से अपील की है कि किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन को संसद में पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई जाए और क्षेत्रीय चिंताओं को दूर किया जाए। परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों—विशेषकर तमिलनाडु की चिंताओं को साधने के लिए डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दलों का रुख इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाने वाला है।