'गुस्से में कोई शब्द निकल गया हो तो 10 बार माफी मांग लूंगा, लेकिन...', CJI पर टिप्पणी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद बोले संजय राउत
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ दिए गए अपने बयान पर सफाई दी है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की आपराधिक अवमानना याचिका पर शीर्ष अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राउत ने कहा कि न्यायपालिका का अपमान करना उनका उद्देश्य कभी नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के मौजूदा हालात, राजनीतिक दलबदल और लंबे समय से इंसाफ न मिलने से उपजे गुस्से में यदि उनके मुंह से कोई अनुचित शब्द निकल गया है, तो वे अदालत से 'एक बार नहीं, बल्कि दस बार माफी मांगने' को तैयार हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र की रक्षा का उसका संवैधानिक दायित्व भी याद दिलाया।
'गुस्से में शब्द निकल गए, अवमानना का इरादा नहीं था'
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, उससे आम नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर मन में भारी आक्रोश और बेचैनी है।
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अदालत का सम्मान: राउत ने कहा, "मैंने अपने पूरे जीवन में कभी अदालत की अवमानना नहीं की। अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि मेरे बयान से कोई गलत संदेश गया है, तो चीफ जस्टिस को स्पष्टीकरण मांगने और कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। मुझे अदालत के सामने हाथ जोड़कर खड़े होने या माफी मांगने में कोई संकोच नहीं है। मैं एक बार नहीं, दस बार माफी मांग लूंगा। लेकिन देश की जनता न्याय चाहती है। सुप्रीम कोर्ट ही लोकतंत्र और संविधान की आखिरी उम्मीद है।’"
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में कथित गड़बड़ियों और विपक्षी दलों की शिकायतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता था।
मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रशासनिक नियमों के तहत इस तरह के राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेताओं में नाराजगी देखी गई थी। इसी दौरान संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले द्वारा की गई कुछ तीखी टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायिक गरिमा के खिलाफ मानते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दायर कर दी, जिस पर पीठ ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
4 साल से पार्टी और चुनाव चिह्न के लिए न्याय का इंतजार
अपनी बात रखते हुए संजय राउत ने अपनी मूल पीड़ा भी बयां की। उन्होंने कहा:
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शिवसेना विवाद: मूल शिवसेना को तोड़े जाने और चुनाव चिह्न छिनने के मामले में वे पिछले चार सालों से सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। जब न्याय मिलने में अत्यधिक देरी होती है, तो निराशा और गुस्सा पैदा होना स्वाभाविक है।
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SIR प्रक्रिया पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। जब संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष काम नहीं करतीं, तो लोग सुप्रीम कोर्ट का ही रुख करते हैं।
'दबाव में न आए अदालत, संविधान की रक्षा करे'
राउत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने खुद कहा है कि न्यायपालिका किसी के दबाव में काम नहीं करती, जो देश के लिए बेहद संतोषजनक बात है। उन्होंने अपील की कि देश में बढ़ती संवैधानिक चिंताओं के बीच अदालत को स्वतंत्र रहकर लोकतंत्र को बचाना होगा। उन्होंने दोहराया कि वे अदालत का सम्मान करते हैं और जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे।