जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा या बदसलूकी? सुप्रीम कोर्ट पैनल ने शिकायत दर्ज कराने के लिए लॉन्च किया विशेष पोर्टल

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा या बदसलूकी? सुप्रीम कोर्ट पैनल ने शिकायत दर्ज कराने के लिए लॉन्च किया विशेष पोर्टल

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल प्रयोग और कथित हिंसा के मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच पैनल ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और आम नागरिकों की शिकायतों को पारदर्शी तरीके से दर्ज करने के लिए पैनल ने एक समर्पित ऑनलाइन शिकायत पोर्टल आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा है कि धरना-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों के साथ भी मारपीट, गैर-कानूनी हिरासत, अत्यधिक बल प्रयोग या बदसलूकी की घटनाएं हुई हैं, वे बिना किसी डर के इस पोर्टल पर अपने बयान, दस्तावेज, तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य सीधे जमा कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट पैनल की पहल: शिकायतों के लिए खुला डिजिटल रास्ता

जंतर-मंतर पर पिछले कुछ समय में हुए विभिन्न आंदोलनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा लाठीचार्ज, वाटर कैनन के उपयोग और बल प्रयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को दबाने के लिए असंगत और अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया।

शीर्ष अदालत ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सत्यता की पड़ताल के लिए एक स्वतंत्र तथ्यान्वेषी समिति (Fact-Finding Committee) का गठन किया था। इसी समिति ने अब आम जनता और पीड़ितों से सीधे संवाद और इनपुट हासिल करने के लिए यह डिजिटल व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी पीड़ित को थाने या अदालत के चक्कर न काटने पड़ें।

पोर्टल पर कैसे और क्या शिकायत दर्ज करा सकते हैं पीड़ित?

समिति द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित और सरल बनाया गया है:

  • घटना का विवरण: पीड़ित या चश्मदीद को घटना की तारीख, समय और जंतर-मंतर के विशिष्ट स्थान की जानकारी देनी होगी।

  • डिजिटल साक्ष्य अपलोड करने की सुविधा: पोर्टल पर मोबाइल से बनाए गए वीडियो, तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग अपलोड करने के लिए सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था की गई है।

  • मेडिकल और कानूनी दस्तावेज: यदि किसी प्रदर्शनकारी को चोट लगी थी, तो वह अस्पताल की एमएलसी (Medico-Legal Certificate), डिस्चार्ज समरी, मेडिकल पर्चे या पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस की कॉपी भी संलग्न कर सकता है।

  • पहचान की गोपनीयता का भरोसा: पैनल ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गवाह या पीड़ित अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित है, तो वह 'गोपनीय शिकायत' (Confidential Submission) का विकल्प चुन सकता है। उसकी व्यक्तिगत पहचान को सार्वजनिक किए बिना केवल उसके द्वारा दिए गए साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

निष्पक्ष जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

पैनल के अधिकारियों के मुताबिक, पोर्टल पर प्राप्त सभी शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी तरह के छेड़छाड़ किए गए या फर्जी वीडियो की पहचान की जा सके। इसके बाद समिति संबंधित पुलिस अधिकारियों, गवाहों और शिकायतकर्ताओं को समन भेजकर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए भी बुला सकती है।

तय समय-सीमा के भीतर सभी साक्ष्यों और बयानों का विश्लेषण करने के बाद पैनल अपनी अंतिम रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत भविष्य में सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर नए दिशा-निर्देश (SOP) जारी कर सकती है।