परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज, एमके स्टालिन ने बुलाई DMK सांसदों की अहम बैठक

परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज, एमके स्टालिन ने बुलाई DMK सांसदों की अहम बैठक

देश की राजनीति में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संसद के मॉनसून सत्र की समाप्ति के बाद अब तक औपचारिक सत्रावसान (Prorogation) न किए जाने के चलते राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण के कार्यान्वयन पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र आयोजित कर सकती है। इस संभावित कदम को देखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने चेन्नई में अपनी पार्टी के सांसदों की एक उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में केंद्र के संभावित कदम और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा को लेकर विस्तृत रणनीति तय की जाएगी।

एमके स्टालिन की अध्यक्षता में DMK सांसदों का महामंथन

चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवालयम' में बुलाई गई इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एमके स्टालिन करेंगे। इसमें लोकसभा के 22 और राज्यसभा के 8 सांसद भाग लेंगे।

बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं:

  • परिसीमन विधेयक पर पार्टी का रुख: यदि केंद्र सरकार संसद में परिसीमन संशोधन विधेयक पेश करती है, तो संसद के दोनों सदनों में डीएमके का आधिकारिक रुख क्या होगा।

  • दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व की रक्षा: जनसंख्या के आधार पर होने वाले किसी भी ऐसे परिसीमन का विरोध करना जिससे जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले तमिलनाडु समेत अन्य दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में आनुपातिक कमी आने का खतरा हो।

  • विशेष सत्र की रणनीति: विशेष सत्र आहूत होने की दशा में विपक्षी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ समन्वय बनाकर साझा रुख तय करना।

सत्रावसान में देरी से विशेष सत्र की अटकलों को मिला बल

संसदीय परंपरा के अनुसार, सामान्यतः मॉनसून सत्र समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों का सत्रावसान कर दिया जाता है। हालांकि, इस बार सत्रावसान नहीं किया गया है, जिसका अर्थ यह है कि सरकार को नई अधिसूचना के लंबे इंतजार के बिना बहुत कम समय के नोटिस पर संसद की बैठक बुलाने की तकनीकी सुविधा उपलब्ध है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि संसद का नियमित शीतकालीन सत्र नवंबर के अंत में प्रस्तावित होता है।

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का जटिल गणित

संविधान संशोधन के जरिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई विशेष बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) की आवश्यकता होगी:

  • बहुमत का आंकड़ा: वर्तमान में 540 सदस्यों वाली लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 मतों की दरकार होगी।

  • सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति: एनडीए के पास वर्तमान में लगभग 292 से 319 सांसदों का समर्थन है।

  • क्षेत्रीय दलों की अहमियत: हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी सांसदों के नए समूह में जाने के बाद संख्याबल में बदलाव आया है। ऐसे में 22 लोकसभा सांसदों वाली डीएमके जैसी पार्टियां इस विधायी प्रक्रिया में संख्याबल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं।

कांग्रेस ने चेताया: 'बिना व्यापक सहमति के न लाया जाए संशोधन'

इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया है कि राज्यों और सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किए बिना किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि परिसीमन ऐसा राष्ट्रीय विषय है जिसका सीधा असर संघवाद और राज्यों की हिस्सेदारी पर पड़ेगा, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले आम सहमति बनाना अनिवार्य है।