एंटीलिया बम कांड में बड़ा मोड़: सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की 2 बेंचों का सुनवाई से इनकार

एंटीलिया बम कांड में बड़ा मोड़: सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की 2 बेंचों का सुनवाई से इनकार

उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित बहुमंजिला आवास 'एंटीलिया' के बाहर विस्फोटक से भरी गाड़ी मिलने और मनसुख हिरेन हत्याकांड के चर्चित मामले में एक नाटकीय कानूनी मोड़ सामने आया है। विशेष एनआईए (NIA) अदालत द्वारा मुख्य आरोपी और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को जमानत दिए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, हाईकोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होते ही तकनीकी व व्यक्तिगत कारणों के चलते लगातार दो अलग-अलग खंडपीठों (डिवीजन बेंच) ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया।

बैक-टू-बैक दो बेंचों के इनकार के बाद एनआईए ने आनन-फानन में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामला मेंशन किया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने मामले को जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की तीसरी खंडपीठ को सौंपा, जिसने आपात सुनवाई करते हुए सचिन वाजे की जेल से रिहाई पर अंतरिम रोक लगा दी और नोटिस जारी कर दिया।

हाईकोर्ट की 2 बेंचों ने क्यों किया सुनवाई से इनकार?

एनआईए की विशेष अदालत ने मंगलवार को सचिन वाजे को 1 लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत प्रदान की थी। इसके तुरंत बाद एनआईए की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई:

  • जस्टिस सारंग वी. कोतवाल की बेंच (पहली बेंच): एनआईए ने सबसे पहले मंगलवार शाम को जस्टिस सारंग वी. कोतवाल और जस्टिस आर.आर. भोंसले की डिवीजन बेंच के सामने मामला मेंशन किया। लेकिन जस्टिस कोतवाल ने सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी वकालत के दिनों में वाजे की ओर से पेश हो चुके वरिष्ठ अधिवक्ता से जुड़े रहे हैं, इसलिए वे इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।

  • जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की बेंच (दूसरी बेंच): इसके बाद बुधवार सुबह मामला वैकल्पिक बेंच जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण के समक्ष आया। सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस डांगरे ने कहा कि वे सितंबर 2024 में ही वाजे से जुड़े एक मामले में खुद को अलग करने का आदेश दे चुकी हैं। वहीं पीठ के दूसरे जज जस्टिस आशीष चव्हाण ने कहा कि वे जज बनने से पहले सीबीआई की ओर से इससे जुड़े एक मामले में बतौर वकील पेश हो चुके हैं। लिहाजा, इस दूसरी बेंच ने भी केस को अपनी सूची से हटाने का निर्देश दे दिया।

मुख्य न्यायाधीश का दखल: तीसरी बेंच ने लगाई रिहाई पर रोक

लगातार दो बेंचों के सुनवाई से हटने के बाद एनआईए ने मुख्य न्यायाधीश के सामने मौखिक मेंशनिंग की और दलील दी कि यदि तत्काल सुनवाई नहीं हुई तो वाजे ठाणे जेल से बाहर आ सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच को रेफर कर दिया।

जस्टिस कुलकर्णी की बेंच ने बुधवार दोपहर तत्काल सुनवाई की और एनआईए की दलीलों को सुनने के बाद विशेष अदालत के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि सचिन वाजे को जेल से रिहा न किया जाए। अदालत ने वाजे को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की है।

विशेष अदालत ने किस आधार पर दी थी वाजे को जमानत?

विशेष सत्र अदालत ने सचिन वाजे को जमानत देते हुए अपने आदेश में कई अहम टिप्पणियां की थीं:

  • UAPA की आतंकी धारा साबित नहीं: कोर्ट ने माना था कि प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं कि वाजे का यह कृत्य यूएactionपीए (UAPA) की धारा 15 के तहत 'आतंकवादी कृत्य' की परिभाषा में आता है।

  • अंबानी परिवार के आतंकित होने का साक्ष्य नहीं: अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अंबानी परिवार के किसी सदस्य का ऐसा बयान दर्ज नहीं किया जिससे यह साबित हो कि वे इस घटना से आतंकित हुए थे। इसके अलावा, गाड़ी में मिली जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर नहीं जुड़े थे, जिससे वे अपने आप विस्फोट करने में सक्षम नहीं थीं।

  • लंबी हिरासत: कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि वाजे मार्च 2021 से लगभग 1,999 दिनों से लगातार हिरासत में हैं और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है।

क्या है 2021 का एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन मामला?

यह पूरा विवाद 25 फरवरी 2021 को शुरू हुआ था, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक लावारिस स्कॉर्पियो कार खड़ी पाई गई थी। जांच में कार से 20 जिलेटिन की छड़ें और अंबानी परिवार को संबोधित एक धमकी भरा पत्र बरामद हुआ था।

शुरुआती जांच मुंबई पुलिस की सीआईयू (CIU) शाखा के तत्कालीन प्रमुख सचिन वाजे को सौंपी गई थी। कुछ ही दिनों बाद 5 मार्च 2021 को कार के कथित मालिक व कारोबारी मनसुख हिरेन का शव ठाणे की एक खाड़ी में मिला। इसके बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। एनआईए ने साजिश रचने, फर्जी नंबर प्लेट लगाने और मनसुख हिरेन की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में सचिन वाजे को 13 मार्च 2021 को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।