जमुई और दिल्ली कांड पर भड़कीं प्रियंका गांधी वाड्रा, बोलीं- जब बेटियां सुरक्षित नहीं तो कैसी तरक्की
देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे जघन्य अपराधों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार के जमुई में कोचिंग से लौट रही छात्रा के साथ हुई शर्मनाक बदसलूकी और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीते कुछ दिनों के भीतर नाबालिगों के साथ घटित सिलसिलेवार यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर कांग्रेस महासचिव और वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे पर पहुंचीं प्रियंका गांधी ने देश में महिलाओं के मौजूदा हालात को बेहद भयावह और चिंताजनक करार दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्यों की सरकारों से अपील की है कि वे खोखले दावों से आगे बढ़कर बेटियों की जमीनी सुरक्षा सुनिश्चित करें, ताकि वे बिना किसी भय के सड़कों पर निकल सकें।
प्रियंका गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षा हमेशा से एक बड़ा प्रश्न रही है, लेकिन हाल के दिनों में परिस्थितियां सुधरने के बजाय बद से बदतर होती जा रही हैं। उन्होंने चिंता जताई कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध न केवल संख्या में तेजी से बढ़ रहे हैं, बल्कि इन हमलों की प्रवृत्ति पहले से कहीं अधिक हिंसक, क्रूर और अमानवीय होती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब देश की आधी आबादी अपने ही मोहल्लों, बाजारों और सड़कों पर सुरक्षित महसूस नहीं कर सकती, तो फिर प्रशासन और व्यवस्था के बड़े-बड़े विकास के दावों का कोई नैतिक या व्यावहारिक अर्थ नहीं रह जाता है।
वायनाड से प्रियंका गांधी का कड़ा संदेश: 'अगर सड़कें सुरक्षित नहीं, तो बड़ी-बड़ी योजनाओं का कोई मतलब नहीं'
केरल के वायनाड प्रवास के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद ने नीति-निर्माताओं और हुक्मरानों को सीधे आईना दिखाया। प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे को केवल फाइलों, नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आज हर राजनीतिक दल, सरकार और सामाजिक संस्था को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस गंभीर संकट पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि अगर हम अपनी माताओं, बहनों और बेटियों को घर से बाहर निकलने पर बुनियादी सुरक्षा की गारंटी तक नहीं दे सकते, तो फिर बड़े-बड़े बजट, योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का बखान करने का क्या औचित्य बचता है।
प्रियंका गांधी ने रेखांकित किया कि जब तक अपराधियों के मन में कानून और पुलिस का खौफ नहीं बैठेगा, तब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी उम्र की लड़की सुरक्षित नहीं है, चाहे वह स्कूल-कोचिंग जाने वाली छात्रा हो, दफ्तर में काम करने वाली कामकाजी महिला हो या फिर घर के बाहर खेल रही मासूम बच्ची। लगातार सामने आ रही दिल दहला देने वाली वारदातों ने पूरे देश के मानस को झकझोर कर रख दिया है और अब समय आ गया है कि जवाबदेही तय की जाए।
देश की राजधानी में बेटियों के खिलाफ बर्बरता की बाढ़: स्वरूप नगर से सदर बाजार तक की खौफनाक घटनाएं
महिलाओं की सुरक्षा का दम भरने वाली देश की राजधानी नई दिल्ली में पिछले कुछ ही हफ्तों के भीतर सामने आए मामलों ने पुलिसिया तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। 10 सितंबर को दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई, जहां एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ पहले सामूहिक यौन शोषण की दरिंदगी की गई और फिर साक्ष्य मिटाने के इरादे से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने राजधानीवासियों को हिलाकर रख दिया। इसके महज कुछ दिनों बाद, 16 सितंबर को सदर बाजार जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र में स्टेशनरी खरीदने गई एक और नाबालिग बच्ची को यौन शोषण का शिकार बनाया गया, जिसने यह साफ कर दिया कि भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर भी अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।
राजधानी में अपराध का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। 21 सितंबर को दिल्ली के दो अलग-अलग इलाकों में लगातार दो दिल दहलाने वाले मामले दर्ज किए गए। इनमें से एक घटना में महज 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की गई, जबकि दूसरी घटना में 17 साल की किशोरी को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। एक ही शहर में इतने कम समय के अंतराल में नाबालिगों के खिलाफ इस तरह की बर्बर घटनाएं यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती हैं कि सुरक्षा तंत्र किस कदर सुस्त और लापरवाह हो चुका है।
बिहार के जमुई में बीच सड़क छात्रा से छेड़खानी: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बिहार के जमुई जिले में घटी हालिया घटना ने भी कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाम के समय कोचिंग संस्थान से अपनी पढ़ाई पूरी कर साइकिल से घर लौट रही एक नाबालिग छात्रा और उसके साथ चल रहे छात्र को कुछ मनचलों ने सरेराह रोक लिया। बीच सड़क पर असामाजिक तत्वों ने छात्रा के साथ भद्दी हरकतें और गंभीर छेड़खानी की, जबकि विरोध करने पर छात्र के साथ मारपीट की गई। शाम के वक्त मुख्य मार्ग पर हुई इस खुली गुंडागर्दी ने स्थानीय अभिभावकों और छात्राओं के मन में भारी खौफ पैदा कर दिया है।
जमुई की इस शर्मनाक घटना का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि बिहार से लेकर दिल्ली तक हर जगह बेटियां एक जैसी असुरक्षा और डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्वरित न्याय, थानों में त्वरित सुनवाई, संवेदनशील जांच प्रक्रिया और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त सजा ही इस तरह की विकृत मानसिकता पर लगाम लगा सकती है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे ऐसे मामलों में मूकदर्शक बनने के बजाय बेटियों की ढाल बनकर खड़े हों और प्रशासन को उसकी जवाबदेही निभाने के लिए मजबूर करें।