बेंगलुरु से ऑटो में पहुंचे बिहार... छठ पर्व से पहले चार युवकों की दिलेरी वायरल, दुनिया कर रही सलाम

बेंगलुरु से ऑटो में पहुंचे बिहार... छठ पर्व से पहले चार युवकों की दिलेरी वायरल, दुनिया कर रही सलाम

लोक आस्था और अटूट श्रद्धा के सबसे बड़े महापर्व छठ पूजा को लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों में कैसी दीवानगी होती है, इसका एक ऐसा जीता-जागता और रोंगटे खड़े कर देने वाला उदाहरण सामने आया है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। परदेस में रहकर काम करने वाले युवाओं को जब त्योहार के मौके पर अपने घर जाने के लिए किसी भी ट्रेन या बस में कंफर्म टिकट नहीं मिल सका, तो उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय एक ऐसा साहसिक और अभूतपूर्व कदम उठाया जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। चार बिहारी युवकों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने तीन पहिया ऑटो-रिक्शा को ही अपना रथ बना लिया और दिल्ली-दक्षिण भारत की दूरी को धता बताते हुए सीधे बिहार के मधुबनी स्थित अपने गांव के लिए सड़क मार्ग से रवाना हो गए। 1200 किलोमीटर से भी लंबे, थकाऊ और जोखिम भरे इस सफर पर निकले इन दिलेर दोस्तों की कहानी और वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आई, पूरी दुनिया इनके जज्बे, मासूमियत और अपनी मिट्टी के प्रति अपार प्रेम को सलाम करने लगी।

ऑटो में लादा बोरिया-बिस्तर और राशन, हाइवे पर पेट्रोल पंपों पर आराम करते हुए जारी रखा ऐतिहासिक सफर

वायरल हो रहे वीडियो और यात्रा वृत्तांत में देखा जा सकता है कि इन चार दोस्तों ने अपने ऑटो-रिक्शा की पिछली सीट और हुड पर घर से लाया गया राशन, कपड़े, बिस्तर और यात्रा का सारा जरूरी सामान बेहद तरतीब से लाद रखा है। राजमार्ग (National Highway) के किनारे स्थित पेट्रोल पंपों और ढाबों पर जब ये अपने ऑटो को ठंडा करने और खुद थोड़ा आराम करने के लिए रुकते हैं, तो इनके चेहरे पर इतनी लंबी और कठिन यात्रा की थकान की एक भी शिकन नजर नहीं आती। मुस्कुराते हुए जब वे अपने इस अनोखे सफर के बारे में बताते हैं, तो वे बड़े गर्व से कहते हैं कि ट्रेन में महीनों पहले से वेटिंग लिस्ट चल रही थी और कोई भी टिकट कंफर्म नहीं हो रहा था। लेकिन पिछले दो-तीन सालों से वे छठ पूजा के अवसर पर अपने परिवार और गांव से दूर रहे थे, इसलिए इस बार उन्होंने तय किया था कि चाहे जो हो जाए, छठ मैया के पर्व में शामिल होने के लिए वे अपने ही साधन यानी ऑटो-रिक्शा से अपने गांव पहुंच कर रहेंगे।

कानपुर, लखनऊ से लेकर बिहार के गांवों तक: रास्ते में मिला लोगों का अटूट प्यार और दुआएं

यह कोई आम रोड ट्रिप नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, परंपराओं और अपने घर लौटने की एक अनूठी मानवीय यात्रा है। रास्ते में कानपुर, लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के शहरों से गुजरते समय जब भी आम लोगों और अन्य वाहन चालकों की नजर इस ऑटो-रिक्शा पर पड़ी, तो हर कोई दंग रह गया। कई जगह स्थानीय लोगों ने रुककर इन युवाओं का हौसला बढ़ाया, उन्हें रास्ते के लिए चाय-पानी और जलपान कराया और छठ मैया से उनकी सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना की। युवाओं ने बताया कि वे रास्ते में घर से बनाकर लाए गए पराठे और रोटियां खाते हुए और समय-समय पर ऑटो को आराम देते हुए बहुत ही संयम के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इनके इस सफर की वीडियो रील्स को लाखों लोग देख चुके हैं और कमेंट सेक्शन में तारीफों का तांता लगा हुआ है।

रेलवे की मारामारी और छठ महापर्व के प्रति बिहार की अटूट आस्था का प्रतीक बनी यह यात्रा

यह घटना केवल एक सफर की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है कि त्योहारों के समय परदेस में रहने वाले बिहार और पूर्वांचल के श्रमिकों व युवाओं को अपने घर जाने के लिए किस कदर परिवहन की किल्लत से जूझना पड़ता है। स्पेशल ट्रेनों की घोषणाओं के बावजूद जिस तरह स्टेशनों पर बदहवासी और भीड़ का आलम रहता है, उसमें इन युवाओं द्वारा निकाला गया यह देसी और निडर रास्ता सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। नेटिजन्स का कहना है कि यह जुनून केवल बिहारी युवाओं के जिगर में ही हो सकता है, जहां अपनों से मिलने की तड़प और छठ मैया की भक्ति के आगे 1200 किलोमीटर की दूरी भी छोटी पड़ जा

ती है।