गोकुल डेयरी को लेकर क्यों छिड़ा है विवाद? राहुल गांधी को देवेंद्र फडणवीस ने याद दिलाई 4500 वोटरों की हकीकत
महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी क्षेत्र का दबदबा हमेशा से बेहद अहम रहा है। इसी कड़ी में कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी बहुचर्चित 'गोकुल डेयरी' के हालिया बोर्ड चुनावों को लेकर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। करीब 4,000 करोड़ रुपये के विशाल सालाना कारोबार वाली इस प्रमुख दुग्ध संस्था के अध्यक्ष चुनाव और बोर्ड में बदलाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जबर्दस्त वाकयुद्ध छिड़ गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी तथा महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव हारने के बाद दूध उत्पादकों के जनादेश में मिलावट की है और चोर दरवाजे से बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मोर्चा संभालते हुए राहुल गांधी पर सीधा पलटवार किया और एक बहुत छोटे स्थानीय निकाय चुनाव में दिल्ली से बैठकर ट्वीट करने पर उनकी राजनीतिक स्थिति पर चुटकी लेते हुए उन्हें 4,500 वोटरों की जमीनी हकीकत याद दिला दी।
जानिए क्या है गोकुल डेयरी विवाद: 13-12 का चुनावी गणित और अध्यादेश के जरिए नियमों में बदलाव का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ें गोकुल डेयरी के 25 सदस्यीय निदेशक मंडल के चुनावों में छिपी हुई हैं। हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि महायुति (बीजेपी समर्थित) गठबंधन को 12 सीटें मिली थीं। 13-12 के इस कांटे के मुकाबले के बाद जब अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए 29 अक्टूबर को बैठक बुलाई गई, तो बहुमत साबित करने के लिए 14 निदेशकों की मौजूदगी यानी कोरम होना जरूरी था। हालांकि, महायुति के 12 निदेशकों के अनुपस्थित रहने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका और बैठक बार-बार रद्द करनी पड़ी। इसके तुरंत बाद महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी समितियों के नियमों में संशोधन करते हुए बड़ा फैसला लिया। नए नियम के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली संस्थाओं में सरकार 5 निदेशकों को मनोनीत कर सकती है, जिनमें से 4 सदस्यों को मतदान का अधिकार होगा। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि 12 को 16 बनाकर अपनी हार को जीत में बदलने और वोट चुराने के लिए बीजेपी ने चुनाव के ठीक बाद खेल के नियम बदल दिए।
देवेंद्र फडणवीस का करारा हमला: केवल 4,500 वोटरों वाली संस्था के लिए दिल्ली में बैठकर ट्वीट कर रहे हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति आज क्या हो गई है कि वे प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षा रखते हैं, लेकिन महज 4,500 मतदाताओं वाली एक स्थानीय दुग्ध सहकारी संस्था के चुनाव पर दिल्ली में बैठकर ट्वीट कर रहे हैं। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि गोकुल डेयरी के चुनाव में किसी भी एक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और दो बार कोरम न पूरा होने के कारण बैठक रद्द हुई थी। यदि तीसरी बार भी कोरम पूरा न होता तो चुनाव ही रद्द करने की नौबत आ जाती, जिससे किसानों और संस्था का भारी नुकसान होता। इसी प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने राज्य के एडवोकेट जनरल (Advocate General) से बाकायदा कानूनी राय लेने के बाद ही नीतिगत कदम उठाया है, जो पूरी तरह से नियमानुकूल और कानूनी रूप से वैध है।
कोर्ट में दी जाएगी चुनौती: कांग्रेस का आरोप, 'बीजेपी सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार'
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ चुप बैठने वाले नहीं हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद जनादेश को पलटने के लिए नियम बदलना लोकतंत्र और सहकारी भावना का अपमान है। कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है ताकि दूध उत्पादक किसानों के अधिकारों की रक्षा की जा सके। दूसरी ओर, बीजेपी और महायुति सरकार का कहना है कि मनोनीत सदस्य अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकते और यह कदम केवल संस्था के दैनिक कामकाज व दूध उत्पादकों के हितों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।