बादल परिवार पर सिख संस्थाओं के निजी इस्तेमाल का लगाया आरोप बुद्धिजीवियों से तोड़ी चुप्पी की अपील

बादल परिवार पर सिख संस्थाओं के निजी इस्तेमाल का लगाया आरोप बुद्धिजीवियों से तोड़ी चुप्पी की अपील

पंजाब की सियासत और सिख धार्मिक हलकों में श्री आनंदपुर साहिब की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सराय से जुड़ा मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने इस मुद्दे को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बादल परिवार पर सीधा हमला बोला है। पन्नू ने आरोप लगाया कि शहादतों और ऐतिहासिक संघर्षों की बुनियाद पर खड़े हुए पंथक अकाली आंदोलन को बादल परिवार ने एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' और पारिवारिक जागीर बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि दशकों से सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्थाओं और उनके बुनियादी संसाधनों का दुरुपयोग केवल निजी एवं राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया जा रहा है। इसी के साथ बलतेज पन्नू ने देश और विदेश में बसे सिख बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों से आह्वान किया कि पंथक मर्यादा और संस्थागत साख को बचाने के लिए अब चुप्पी तोड़ने का सही वक्त आ गया है।

श्री आनंदपुर साहिब सराय मामला: महीनों तक महिला को ठहराने और सुविधाओं पर दागे सवाल

बलतेज पन्नू ने हाल ही में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) और सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब की एसजीपीसी सराय में एक महिला को महीनों तक रोके रखने और बंधक बनाने के संगीन आरोप लगे हैं। पन्नू ने कड़े लहजे में पूछा कि किसी भी आम श्रद्धालु को जहां सराय में दो दिन कमरा मिलना मुश्किल हो जाता है, वहां दो पक्के कमरे महीनों के लिए कैसे आवंटित कर दिए गए? उन्हें निजी गाड़ियां और गुरुद्वारा साहिब के सेवादार किसके निर्देश पर मुहैया करवाए गए और इन तमाम सुविधाओं का भारी-भरकम खर्च आखिर किसने वहन किया? उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि धार्मिक सरोकारों से जुड़े पवित्र स्थानों की सुरक्षा, पारदर्शिता और मर्यादा का खुला उल्लंघन है, जिसका जवाब अकाली दल के शीर्ष नेतृत्व को सार्वजनिक मंच पर देना होगा।

एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की चुप्पी पर वार: पुलिस से दूरी और हफ्तों की खामोशी क्यों?

आप नेता ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया। पन्नू ने कहा कि जब पीड़िता खुद अपनी शिकायत लेकर एसजीपीसी प्रमुख के पास पहुंची थी, तो उस पर तुरंत प्रभाव से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने धामी के पुराने रुख पर तंज कसते हुए पूछा कि जब आप यह दावा करते हैं कि सिख संस्थाओं के मामलों में पुलिस हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और संस्था सब कुछ अपने स्तर पर सुलझा सकती है, तो फिर इस बेहद संवेदनशील मामले पर हफ्तों और महीनों तक चुप्पी क्यों साधे रखी गई? पन्नू ने कहा कि धामी अक्सर खुद को 'सुखबीर सिंह बादल का सिपाही' बताते हैं, लेकिन अब उन्हें संगत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि वे गुरु साहिब और सिख कौम के प्रति जवाबदेह हैं या सिर्फ बादल परिवार के सियासी हितों की पहरेदारी कर रहे हैं।

अमरजीत सिंह चावला विवाद और अकाली नेताओं के तार: टिकट और पीसी पर उठाए सवाल

विवाद के केंद्र में रहे पूर्व एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला और अन्य अकाली नेताओं के रिश्तों पर बात करते हुए पन्नू ने कई कड़े सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि यूथ अकाली दल के प्रधान सरबजीत सिंह झिंजर ने बहरीन से संबंधित महिला के लिए यात्रा टिकट का प्रबंध क्यों किया था? अकाली दल के वरिष्ठ नेता विरसा सिंह वल्टोहा इस पूरे घटनाक्रम में आगे बढ़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों कर रहे थे और इसके पीछे असल मंशा क्या थी? पन्नू ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा अमरजीत सिंह चावला और संबंधित कर्मियों को पंथ से निष्कासित किए जाने का फैसला इस बात का प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है। उन्होंने मांग की कि एसजीपीसी को सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों और सरायों के बाहर पंथ से निष्कासित व्यक्तियों के नाम और तस्वीरें सार्वजनिक रूप से चस्पा करनी चाहिए, ताकि गुरु की संगत पूरी तरह सतर्क रहे और ऐसे चेहरों की असलियत जान सके।

2015 बेअदबी कांड और गोलीकांड का दर्द: इतिहास से लेकर वर्तमान तक की जवाबदेही

बलतेज पन्नू ने अकाली दल के पुराने शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि बादल परिवार का इतिहास सिख भावनाओं को आहत करने और संस्थाओं को कमजोर करने से भरा पड़ा है। उन्होंने साल 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं और उसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही संगत पर बरगाड़ी, कोटकपूरा और बहबल कलां में चलाई गई गोलियों का दर्द ताजा किया। पन्नू ने कहा कि उस समय निर्दोष सिख युवाओं को प्रताड़ित किया गया और इंसाफ मांगने वालों पर लाठियां व आंसू गैस के गोले बरसाए गए। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता और सिख संगत उस सियासी दौर को कभी नहीं भूल सकती, जब सत्ता के नशे में पंथक उसूलों को ताक पर रख दिया गया था। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया की वर्तमान चुप्पी पर भी तंज कसा कि हर छोटे मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लाइव आने वाले नेता अब इस संगीन मामले पर खामोश क्यों बैठ गए हैं।

वैश्विक सिख समुदाय और बुद्धिजीवियों से खुली अपील: 'संस्थाओं को बचाने आगे आएं'

प्रेस वार्ता के अंत में बलतेज पन्नू ने दुनिया भर में बसे सिखों, बुद्धिजीवियों, विद्वानों और लेखकों से एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि अगर आज सिख समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने अपनी आवाज बुलंद नहीं की, तो बादल परिवार और उनकी खास चौकड़ी सिख कौम के त्याग और बलिदान से सिंची गई इन महान संस्थाओं की गरिमा को पूरी तरह समाप्त कर देगी। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार जहां पंजाब को नशा, गैंगस्टरों और माफिया राज से मुक्त कर प्रगति की नई राह पर ले जा रही है, वहीं सिख संस्थाओं को निजी नियंत्रण से आजाद कराकर पंथक मर्यादा को पुनः स्थापित करना भी आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। पन्नू ने स्पष्ट किया कि जब तक सिख संस्थाओं के अंदर जवाबदेही, लोकतांत्रिक व्यवस्था और पूर्ण पारदर्शिता तय नहीं हो जाती, तब तक यह वैचारिक और जन-जागरूकता का संघर्ष लगातार जारी रहेगा।