CJP के समर्थन में उतरी कांग्रेस, राजा वड़िंग बोले- 'राहुल गांधी के सिपाही सड़क पर उतर आए'
दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब और तेज हो गया है। मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन उस समय एक बड़े राजनीतिक टकराव में तब्दील हो गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए संगठन के शीर्ष नेतृत्व को हिरासत में ले लिया। अब इस पूरे विवाद में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की भी आधिकारिक एंट्री हो गई है। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए ऐलान कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर कतई खामोश नहीं रहने वाले हैं।
राजा वड़िंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र की आवाज को न तो खाकी की लाठियां रोक सकती हैं और न ही सत्ता की हनक दबा सकती है। उन्होंने खुलकर ऐलान किया कि "राहुल गांधी के सिपाही अब सड़कों पर उतर आए हैं" और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से त्यागपत्र नहीं दे देते, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है। इस सीधे समर्थन के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: प्रदर्शन से पहले ही सीजेपी नेता हिरासत में
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोटर अधिकारों में कटौती का आरोप लगाते हुए 10 अक्टूबर को राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने और प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस आयोजन को लेकर देश भर से युवाओं और कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने की योजना थी। हालांकि, कार्यक्रम के शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए बेहद आक्रामक रुख अपनाया।
पुलिस की टीमों ने योजनाबद्ध तरीके से सीजेपी के कोर नेताओं की धरपकड़ शुरू कर दी। संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को एयरपोर्ट पर विमान के भीतर से हिरासत में लिया गया, जबकि कई प्रमुख चेहरों को तड़के उनके घरों से उठा लिया गया। पुलिस के इस कड़े घेराबंदी और पहरे के चलते 10 अक्टूबर का प्रस्तावित प्रदर्शन जंतर-मंतर पर उस स्वरूप में आयोजित नहीं हो सका जैसा संगठन ने दावा किया था। इस पुलिसिया कार्रवाई को लेकर छात्र संगठनों, नागरिक अधिकार समूहों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस के रवैये की तीखी आलोचना की है।
वड़िंग का सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार: 'न पुलिस रोक पाएगी, न सत्ता का अहंकार'
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाजों को दबाए जाने के आरोपों के बीच पंजाब के दिग्गज कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मोर्चा संभाला। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र जनता की आवाज से चलता है और इसे सरकारी तंत्र के जरिए कुचला नहीं जा सकता। वड़िंग ने अपने पोस्ट में साफ किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और वे सीजेपी व प्रदर्शनकारी युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
वड़िंग ने लिखा कि जब संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो सड़कों पर उतरना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बन जाता है। पुलिस प्रशासन द्वारा आंदोलन को कुचलने के प्रयासों को उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी सूरत में चुप नहीं बैठेगा और इस दमनकारी नीति का जवाब जनता की अदालत में लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
'राहुल गांधी के सिपाही सड़कों पर': ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा संग्राम
राजा वड़िंग ने अपने तीखे बयानों में सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के वैचारिक संघर्ष का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के सिपाही हमेशा से संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता की रक्षा के लिए अग्रणी पंक्ति में खड़े रहे हैं। अब जब चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता ही दांव पर लगी है, तो कांग्रेस के कार्यकर्ता हर गली और हर चौराहे पर जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।
वड़िंग ने अपना संदेश बेहद स्पष्ट रखते हुए दोहराया कि यह लड़ाई केवल एक दिन के धरने तक सीमित नहीं है। उनका कहना था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा देकर प्रक्रिया की निष्पक्षता की जिम्मेदारी नहीं लेते, तब तक देश की जनता और विपक्ष सवाल पूछना बंद नहीं करेगा। उन्होंने इसे एक संवैधानिक जवाबदेही की मांग करार दिया, जिसमें देश भर के युवाओं की आवाज शामिल है।
'मार्च फॉर डेमोक्रेसी': कांग्रेस ने बनाई सड़क से संसद तक घेराबंदी की रणनीति
राजा वड़िंग ने अपने सिलसिलेवार बयानों में 'मार्च फॉर लोकतंत्र' और 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' का खुला नारा बुलंद किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब सीजेपी द्वारा उठाए गए इस आंदोलन को अपने हाथ में लेकर इसे एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने की तैयारी में है। इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दल भी लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं, और अब दिल्ली में हुई गिरफ्तारियों ने विपक्ष को एक साझा मंच प्रदान कर दिया है।
कांग्रेस की इस सक्रियता से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के आगामी सत्रों से लेकर चुनावी राज्यों की जनसभाओं तक यह मुद्दा केंद्र में रहेगा। वड़िंग के आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि पंजाब और दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्यों में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर रैलियां और जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है, जिससे केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है।