तो दोबारा हुई है 'मातृभूमि' की शूटिंग? ध्रुव राठी ने तोड़ी चुप्पी, बोले- 'सरकार की इतनी हिम्मत नहीं कि हमें रोक सके'

तो दोबारा हुई है 'मातृभूमि' की शूटिंग? ध्रुव राठी ने तोड़ी चुप्पी, बोले- 'सरकार की इतनी हिम्मत नहीं कि हमें रोक सके'

सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में अपने तीखे राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषणों के लिए जाने जाने वाले चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा के केंद्र में हैं। उनके बहुचर्चित और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'मातृभूमि' (Matrubhoomi) को लेकर पिछले कई दिनों से तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। डिजिटल गलियारों में यह दावा किया जा रहा था कि कुछ संवेदनशील दृश्यों और सरकारी तंत्र की आपत्तियों के चलते प्रोजेक्ट को बीच में ही रोकना पड़ा और अब इसके कई हिस्सों की दोबारा शूटिंग (री-शूट) की गई है। इन तमाम सुगबुगाहटों, दावों और कानूनी अड़चनों की खबरों के बीच अब खुद ध्रुव राठी ने सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है और पूरे मामले पर बेबाक बयान दिया है।

ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया और एक इंटरव्यू के दौरान स्पष्ट किया कि उनके काम को लेकर अफवाहें फैलाना कुछ लोगों का पुराना शगल बन चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में खारिज किया कि किसी बाहरी राजनीतिक दबाव या सरकारी निर्देश के कारण उन्होंने अपने कंटेंट में कोई काट-छांट की है या डरकर री-शूटिंग का फैसला लिया है।

री-शूटिंग की असली वजह क्या है? ध्रुव ने समझाया तकनीकी पहलू

प्रोजेक्ट की दोबारा शूटिंग की खबरों पर रोशनी डालते हुए ध्रुव राठी ने कहा कि किसी भी बड़े वीडियो या डॉक्युमेंट्री-ड्रामा प्रोजेक्ट में री-शूट होना एक बेहद सामान्य और रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि जब एडिटिंग टेबल पर फाइनल फुटेज को देखा गया, तो कहानी के प्रवाह, सिनेमैटोग्राफी और तथ्यों के दृश्य प्रस्तुतीकरण में कुछ कमियां महसूस हुईं।

ध्रुव ने कहा कि उनका मकसद दर्शकों के सामने आधी-अधूरी या कमजोर चीज परोसना नहीं है। वे चाहते थे कि 'मातृभूमि' का हर एक सीन अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल और रिसर्च स्टैंडर्ड्स को पूरा करे। इसी परफेक्शन और बेहतर आउटपुट के लिए टीम ने कुछ सीन्स को दोबारा शूट करने का फैसला लिया, न कि किसी के दबाव में आकर स्क्रिप्ट बदली गई है।

'सरकार की इतनी हिम्मत नहीं कि हमारी आवाज दबा सके'

जब उनसे पूछा गया कि क्या सत्ता प्रतिष्ठान या किसी एजेंसी के डर से कहानी के कुछ हिस्से बदले गए हैं, तो ध्रुव राठी ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, "सरकार या किसी भी सत्ताधारी ताकत की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह हमें सच दिखाने से रोक सके या हमारी आवाज को दबा दे। हम जो भी तथ्य सामने लाते हैं, वे पूरी तरह से प्रमाणित, शोध-आधारित और संविधान के दायरे में होते हैं।"

ध्रुव ने आगे कहा कि डरने वाले लोग कभी सत्ता से सवाल नहीं पूछते। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यहां किसी का एकाधिकार नहीं है। अगर आपकी बात में दम है और देश की जनता का समर्थन आपके साथ है, तो कोई भी पाबंदी आपको सच बोलने से नहीं रोक सकती।

'मातृभूमि' को लेकर क्यों मचा है इतना कौतूहल?

ध्रुव राठी का यह प्रोजेक्ट देश के इतिहास, मौजूदा सामाजिक ताने-बाने, पर्यावरण और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के गहरे विश्लेषण पर आधारित माना जा रहा है। जैसे ही इसके टीज़र और शुरुआती झलकियां सामने आई थीं, तभी से सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया था। आलोचकों का मानना था कि यह प्रोजेक्ट एक खास नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जबकि उनके समर्थकों का दावा है कि यह भारतीय राजनीति और समाज की उन परतों को खोलेगा जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया अक्सर छूने से बचता है।

फिलहाल ध्रुव राठी के इस ताजा बयान ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि 'मातृभूमि' को सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है। ध्रुव के मुताबिक, प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम पोस्ट-प्रोडक्शन स्टेज में है और जल्द ही दर्शकों के सामने पूरी ताकत के साथ पेश किया जाएगा।