'अराजकता नहीं छोड़ी तो खत्म हो जाएगा बचा-खुचा वजूद': राहुल गांधी के दिल्ली मार्च पर भड़के सीएम योगी
देश की राजधानी नई दिल्ली में विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ निकाले जा रहे विरोध मार्च से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आज पूरी तरह गैर-जिम्मेदार आचरण पर उतर आई है और देश के भीतर अराजकता का पर्याय बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस देश के भीतर अशांति और अव्यवस्था फैलाने की साजिशों से बाज आए। यदि उसने अराजकता और गैर-लोकतांत्रिक हथकंडे अपनाने की यह प्रवृत्ति तुरंत नहीं छोड़ी, तो देश की जागरूक जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक जनाधार भी पूरी तरह समाप्त कर देगी।
संवैधानिक संस्थाओं पर सुनियोजित हमला, 'जीते तो पुरुषार्थ और हारे तो EVM खराब'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर भारत की निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को तार-तार करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। जब कांग्रेस या उनके सहयोगी दल किसी राज्य में चुनाव जीतते हैं, तो वे अपनी पीठ थपथपाते हैं और उसे अपनी मेहनत व पुरुषार्थ का नतीजा बताते हैं। वहीं जब जनता उन्हें सिरे से खारिज कर देती है और वे चुनाव हार जाते हैं, तो अपनी नाकामियों का ठीकरा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और भारतीय चुनाव आयोग के सिर फोड़ना शुरू कर देते हैं। योगी ने कहा कि यही दोहरा रवैया न्यायपालिका को लेकर भी देखने को मिलता है। जब देश की सर्वोच्च अदालतें मेरिट और संविधान के आधार पर कोई फैसला सुनाती हैं, तो विपक्षी नेता अदालतों को कटघरे में खड़ा करते हैं और न्यायाधीशों को तरह-तरह की धमकियां तक देने की कोशिश करते हैं। संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराकर देश में अस्थिरता पैदा करना अब कांग्रेस की नियमित कार्यशैली बन चुका है।
'41 साल से यूपी से बेदखल है कांग्रेस', जनता के मोहभंग का दिया हवाला
कांग्रेस के गिरते राजनीतिक ग्राफ का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को सड़कों पर ड्रामा करने के बजाय इस बात पर गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर देश की जनता बार-बार उसे चुनावों में क्यों नकार रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कांग्रेस वर्ष 1985 के बाद से कभी सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। यानी प्रदेश की जनता ने पूरे 41 साल पहले ही कांग्रेस की विभाजनकारी और भ्रष्ट नीतियों को पहचानकर उसे सत्ता के गलियारों से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। योगी ने कहा कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी जनता का कांग्रेस से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है और वह एक-एक कर सभी प्रमुख राज्यों से बेदखल हो चुकी है। जमीनी हकीकत को स्वीकार करने के बजाय केवल अनर्गल आरोपों और धरने-प्रदर्शनों के दम पर अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिशें कभी सफल नहीं हो सकतीं।
'भ्रष्ट और अविश्वसनीय नेतृत्व को बदले कांग्रेस', राहुल गांधी के नेतृत्व पर बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना सीधा नाम लिए राहुल गांधी और गांधी परिवार के नेतृत्व पर भी तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कांग्रेस के भीतर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी को अब अपने शीर्ष नेतृत्व पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है। सीएम ने कहा कि जिस नेतृत्व ने अपने लगातार घोटालों, भ्रष्टाचार और नकारात्मक राजनीति के कारण जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया है, उसे तत्काल बदले बिना कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और अदालतों को बदनाम करने के बजाय कांग्रेसी नेताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करना सीखना चाहिए। एक विश्वसनीय, जवाबदेह और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय केवल परिवार विशेष के राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को दांव पर लगाना बेहद खतरनाक और निंदनीय है।
गुमराह करने की राजनीति नहीं चलेगी, देश के युवा और जनता हैं पूरी तरह जागरूक
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज का भारत बदल चुका है और देश की नई पीढ़ी तथा युवा वर्ग पूरी तरह जागरूक हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब जनता को झूठे नैरेटिव गढ़कर, संविधान खतरे में होने का फर्जी डर दिखाकर या लगातार अराजकता का माहौल पैदा करके लंबे समय तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अपना एक मर्यादित स्थान होता है, लेकिन विरोध की आड़ में सरकारी कामकाज को ठप करना, आम जनता को असुविधा में डालना और राजधानी में तनाव पैदा करना कतई स्वीकार्य नहीं है। देश की शांतिप्रिय जनता इस तरह की अराजकता को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वह सड़क पर हंगामे का रास्ता छोड़कर संसद और जनता के बीच ठोस मुद्दों पर मेरिट के आधार पर अपनी बात रखे, क्योंकि स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रखना ही देश और लोकतंत्र के वास्तविक हित में है।
दिल्ली में 'सुप्रीम कोर्ट मार्च' की टाइमिंग पर सवाल और सुरक्षा बलों की सतर्कता
ज्ञात हो कि राहुल गांधी और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और ईवीएम से जुड़े विभिन्न विवादों को लेकर दिल्ली में व्यापक विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च का आह्वान किया था। इस मार्च को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहले से ही कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं और धारा 144 के तहत संवेदनशील इलाकों में पहरा बढ़ा दिया गया है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गोरखनाथ मंदिर की पावन धरती से सीधे तौर पर मोर्चा खोलना राष्ट्रीय राजनीति में बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सीएम योगी के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि भाजपा विपक्षी दलों के इस चुनाव आयोग विरोधी अभियान को 'अराजकता बनाम सुशासन' के बड़े नैरेटिव में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।