दृश्यम 3 : प्रकाश राज और जयदीप अहलावत को लेकर एक्टर कमलेश सावंत ने खोले कई अनसुने राज
बॉलीवुड की सबसे चर्चित और सफल सस्पेंस थ्रिलर फ्रेंचाइजी 'दृश्यम' को लेकर दर्शकों के बीच हमेशा से एक अलग स्तर का रोमांच देखने को मिलता रहा है। अजय देवगन स्टारर इस फिल्म के दोनों भागों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की और कहानी के हर एक मोड़ ने सिनेप्रेमियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था। अब जब इस फ्रेंचाइजी के तीसरे भाग यानी 'दृश्यम 3' को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, फिल्म में इंस्पेक्टर गायतोंडे का बेहद दमदार किरदार निभाने वाले जाने-माने अभिनेता कमलेश सावंत ने फिल्म की कास्टिंग प्रक्रिया को लेकर बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। कमलेश सावंत ने एक बातचीत के दौरान बताया कि किस तरह फिल्म की कास्टिंग के शुरुआती दौर में कई बड़े बदलावों पर विचार किया जा रहा था और जो चेहरे आज स्क्रीन पर दिखाई दे रहे हैं, पहले उनकी जगह पूरी तरह से अलग योजनाएं बनाई गई थीं।
प्रकाश राज और जयदीप अहलावत के किरदारों से जुड़ा सच
कमलेश सावंत के अनुसार, दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज शुरुआत में फिल्म की इस योजना का हिस्सा नहीं थे। फिल्म की स्क्रिप्टिंग और किरदारों के शुरुआती खाके के दौरान मेकर्स अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, ओटीटी और बड़े पर्दे पर अपनी गंभीर और रियलिस्टिक अदाकारी का लोहा मनवा चुके अभिनेता जयदीप अहलावत को भी पहले किसी दूसरे रोल के लिए अप्रोच किया गया था। कमलेश सावंत ने बताया कि फिल्मों में अक्सर ऐसा होता है जब किसी अभिनेता के दिमाग में एक भूमिका होती है, लेकिन डायरेक्टर और कास्टिंग टीम को उसकी शख्सियत किसी अन्य किरदार के लिए अधिक मुफीद लगती है। जयदीप अहलावत जैसे मझे हुए कलाकार के साथ भी कुछ ऐसा ही दौर चला था, जहां उनके स्क्रीन प्रजेंस को ध्यान में रखते हुए कई संभावनाओं को टटोला गया था।
कमलेश सावंत ने याद किए शूटिंग और ऑडिशन के पुराने किस्से
कमलेश सावंत ने अपनी बातचीत में पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि एक सफल फिल्म बनने के पीछे सिर्फ कैमरा और लाइट का खेल नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही एक्टर का चुनाव पूरी कहानी की दिशा बदल देता है। उन्होंने बताया कि किस तरह से फिल्म के हर एक दृश्य को जीवंत बनाने के लिए पर्दे के पीछे लंबा मंथन चलता है। जब फिल्म की शुरुआत हुई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि विजय साल्गांवकर और पुलिस प्रशासन के बीच की यह चूहे-बिल्ली की दौड़ भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक कल्ट थ्रिलर का रूप ले लेगी। सावंत ने जोर देकर कहा कि कास्टिंग में आए ये शुरुआती मोड़ ही बाद में पर्दे पर जादुई तालमेल बनकर उभरे, जिसने दर्शकों को हर पल अपनी सीट से बांधे रखा।
'दृश्यम 3' की कहानी और किरदारों की नई परतें
थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए 'दृश्यम 3' केवल एक सीक्वल नहीं, बल्कि विजय साल्गांवकर के परिवार और कानून के बीच चल रहे बौद्धिक द्वंद्व का अगला चरण है। कमलेश सावंत के इन हालिया बयानों के बाद फिल्म की पटकथा को लेकर दर्शकों में और अधिक उत्सुकता बढ़ गई है। सावंत ने संकेत दिया कि फिल्म निर्माण के दौरान निर्देशकों का विजन लगातार विकसित होता रहता है। कई बार बड़े किरदारों को स्क्रिप्ट के अनुसार तराशा जाता है और उसी अनुरूप कलाकारों को शामिल किया जाता है। प्रकाश राज जैसे कद्दावर अभिनेता का जुड़ना और जयदीप अहलावत से जुड़े शुरुआती विचार इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि निर्माता इस फ्रेंचाइजी के स्तर को कितना ऊंचा ले जाना चाहते थे।
भारतीय दर्शकों के बीच बढ़ता थ्रिलर का क्रेज
भारतीय सिनेमा में सस्पेंस ड्रामा की बात करें तो 'दृश्यम' सीरीज ने स्थानीय दर्शकों से लेकर वैश्विक स्तर तक अपनी एक अलग पहचान बनाई है। गोवा के बैकड्रॉप में रची गई इस साधारण सी लगने वाली पारिवारिक कहानी ने जिस तरह से पुलिसिया जांच, कानून की बारीकियों और पारिवारिक निष्ठा को दिखाया, उसने हर वर्ग के दर्शकों को आकर्षित किया। सावंत ने अपने किरदार गायतोंडे के बारे में भी बात करते हुए कहा कि लोग आज भी उन्हें उसी नाम और डायलॉग्स के साथ याद करते हैं। एक कलाकार के लिए इससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं हो सकती कि दर्शक उसके निभाए गए किरदार को वास्तविक समझकर सिनेमा हॉल में तालियां और सीटियां बजाएं।
भविष्य के प्रोजेक्ट्स और आगे का रास्ता
कमलेश सावंत ने अपने करियर और आगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अच्छे कलाकारों का चयन हमेशा कहानी की मांग के आधार पर होता है। चाहे प्रकाश राज की दमदार संवाद अदायगी हो या जयदीप अहलावत की शांत लेकिन प्रभावशाली मौजूदगी, निर्देशक हमेशा कहानी के प्रभाव को अधिकतम करने की कोशिश करते हैं। सावंत के इस खुलासे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक बेहतरीन थ्रिलर के पीछे कई महीनों का विचार-मंथन और कई अनकहे फैसले छिपे होते हैं, जो आखिरकार फिल्म को क्लासिक का दर्जा दिलाते हैं।