'पंजाब में बहानेबाजी नहीं बचाएगी', दिल्ली से अमित शाह की AAP पर दो टूक, नशा व नाकामी पर घेरा

'पंजाब में बहानेबाजी नहीं बचाएगी', दिल्ली से अमित शाह की AAP पर दो टूक, नशा व नाकामी पर घेरा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक सार्वजनिक एवं विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि सत्ता में बैठकर हर नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने और बहाने बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की राजनीति अब पंजाब में नहीं चलने वाली है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकार की पहली जिम्मेदारी जनता के प्रति जवाबदेह होना है, न कि हर विफलता के पीछे केंद्र या पिछली सरकारों का हवाला देकर बचना।

पंजाब में नशा संकट और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अमित शाह ने पंजाब की मौजूदा आंतरिक स्थिति, विशेष रूप से नशे के बढ़ते जाल और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर आम आदमी पार्टी सरकार को सीधे घेरा। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने बदलाव और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में सत्ता सौंपी थी, लेकिन आज राज्य का युवा वर्ग दिशाहीनता और नशा तस्करों के साए में जूझ रहा है। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा तंत्र को मजबूत और सजग रखना अनिवार्य है, जबकि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी में समय बर्बाद कर रही है। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार नशा तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और पंजाब की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

आंदोलन के नाम पर सत्ता और फिर जवाबदेही से किनारा

विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए अमित शाह ने कहा कि जो दल शुचिता, पारदर्शिता और जनता से किए गए बड़े-बड़े वादों की बुनियाद पर खड़े हुए थे, वे सत्ता संभालते ही पुराने राजनीतिक ढर्रे पर लौट चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से लेकर पंजाब तक जनहित की योजनाओं को लागू करने के बजाय टकराव, अदालती उलझनों और रोज नए सियासी विवाद खड़े करने को ही राजनीति मान लिया गया है। शाह के अनुसार, जब चुनाव आते हैं तो गारंटी दी जाती हैं, लेकिन जब उन गारंटियों को निभाने की बारी आती है, तो प्रशासनिक बाधाओं और बजट की कमी का रोना रोया जाता है।

वित्तीय संकट, अटके वादे और आम जनता की नाराजगी

पंजाब के आर्थिक हालात का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और कर्मचारियों के वेतन, भत्तों से लेकर विकास परियोजनाओं तक पर इसका नकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि विज्ञापनों और सोशल मीडिया अभियानों से जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती। पंजाब का किसान, युवा, व्यापारी और आम नागरिक बुनियादी सुविधाओं तथा रोजगार के अवसरों की कमी से परेशान है, जबकि सरकार अपनी प्राथमिकताओं से भटकी हुई नजर आ रही है।

जनता की अदालत में होगा फैसला: विपक्ष को कड़ा संदेश

अपने संबोधन के समापन में अमित शाह ने कहा कि देश की जनता अब परिपक्व है और वह काम तथा बहानेबाजी के बीच का फर्क साफ समझती है। उन्होंने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि जनता को बार-बार गुमराह नहीं किया जा सकता और आगामी चुनावों में जनता अपने मत के जरिए जवाबदेही तय करेगी। शाह का यह आक्रामक रुख पंजाब के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे चुका है, जहां आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।