दिल्ली में सचिन पायलट के साथ बनाई जीत की रणनीति, पंजाब चुनाव से पहले बड़ा मंथन
पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष के रूप में कमान संभालते ही पूर्व ओलंपियन और वरिष्ठ नेता परगट सिंह पूरी तरह चुनावी और संगठनात्मक मोड में आ गए हैं। चंडीगढ़ में भव्य ताजपोशी समारोह के तुरंत बाद परगट सिंह ने राजधानी दिल्ली का रुख किया, जहां उन्होंने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी व वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के साथ पंजाब भवन में अहम बैठक की। इस उच्चस्तरीय मुलाकात में आगामी विधानसभा चुनाव, राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालात और गुटबाजी को दरकिनार कर संगठन को निचले स्तर तक मजबूत करने का पूरा खाका तैयार किया गया।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) की बागडोर संभालने वाले परगट सिंह के सामने पार्टी को एकजुट रखने और सत्ता में वापसी कराने की दोहरी चुनौती है। ऐसे में पद संभालने के तुरंत बाद दिल्ली में सचिन पायलट के साथ हुआ यह संवाद पंजाब के सियासी हलकों में काफी अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे से अधिक समय तक राज्य की जमीनी हकीकत, कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
दिल्ली में पायलट-परगट मंथन: चार महीने का रोडमैप और सत्ता वापसी का प्लान
बैठक में दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले कुछ महीने केवल चुनाव लड़ने के नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य की दिशा तय करने वाले साबित होंगे। सचिन पायलट ने परगट सिंह को स्पष्ट संदेश दिया कि वे एक ऐसी मजबूत टीम का नेतृत्व कर रहे हैं जो राजनीति के मैदान में 'गोल' करने की पूरी क्षमता रखती है। बैठक के दौरान राज्य के 117 विधानसभा क्षेत्रों में माइक्रो-लेवल पर संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने और हर जिले व ब्लॉक में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
परगट सिंह ने प्रभारी सचिन पायलट को राज्य के वर्तमान राजनीतिक समीकरणों, हालिया प्रशासनिक विवादों और जनता के बीच उपजे असंतोष के बारे में विस्तृत फीडबैक दिया। बैठक में यह भी तय किया गया कि कांग्रेस राज्य में आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। किसानों के मुद्दे, कानून-व्यवस्था की स्थिति, नशा और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े पैमाने पर जनआंदोलन और रैलियां शुरू करेगी।
गुटबाजी पर नकेल और अनुभवी चेहरों को साधने की कवायद
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से आंतरिक खींचतान और गुटबाजी एक बड़ी चुनौती बनी रही है। राजा वड़िंग के कार्यकाल के बाद नए नेतृत्व के सामने सभी वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और सांसदों को एक मंच पर साथ लेकर चलना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दिल्ली की इस बैठक में सचिन पायलट और परगट सिंह ने पार्टी के भीतर अनुशासन और समन्वय पर खास ध्यान दिया।
चंडीगढ़ में आयोजित ताजपोशी के दौरान भी पायलट ने साफ संकेत दिए थे कि पिछले वर्षों में संगठन के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले किसी भी निष्ठावान नेता या कार्यकर्ता की अनदेखी नहीं होगी। दिल्ली की बैठक में इसी संतुलन को साधने पर चर्चा हुई, ताकि टिकट वितरण और प्रचार समितियों के गठन में अनुभवी नेताओं के मान-सम्मान के साथ-साथ युवाओं और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी मुख्यधारा में मौका मिल सके।
जमीनी पकड़ पर जोर: 'हर गांव, हर पिंड' तक पहुंचेगा कांग्रेस का अभियान
रणनीति के तहत परगट सिंह ने तय किया है कि वे केवल चंडीगढ़ या दफ्तर तक सीमित रहने के बजाय खुद पूरे पंजाब के जिलों का दौरा करेंगे। पार्टी का नया अभियान 'हर गांव, हर पिंड और हर शहर' के तहत युवाओं और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करने पर आधारित होगा। पंजाब कांग्रेस जल्द ही अपनी नई राज्य कार्यकारिणी और जिला कमेटियों की घोषणा करेगी, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
सचिन पायलट ने आलाकमान की ओर से परगट सिंह को खुली छूट देते हुए विश्वास जताया कि एक खिलाड़ी की खेल भावना और अनुशासन के साथ वे कांग्रेस को एकजुट कर चुनावी मुकाबले में सबसे आगे खड़ा करेंगे। दिल्ली में तैयार हुई इस रणनीति से यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब कांग्रेस में अब बदलाव के बाद फैसले लेने और उन्हें जमीन पर लागू करने की गति काफी तेज रहने वाली है।