शेखर सुमन बोले- मुझे नहीं लगता मोदी जी इतने कमजोर हैं कि एक छोटे से शो के लिए फोन करवाएंगे

शेखर सुमन बोले- मुझे नहीं लगता मोदी जी इतने कमजोर हैं कि एक छोटे से शो के लिए फोन करवाएंगे

अपने बेबाक अंदाज और हास्य-व्यंग्य के तीखे तीरों के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता व होस्ट शेखर सुमन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 90 के दशक में 'मूवर्स एंड शेकर्स' जैसे ऐतिहासिक शो से राजनीतिक व्यंग्य को नई ऊंचाई देने वाले शेखर सुमन ने हाल ही में अपने नए डिजिटल शो 'शेखर टुनाइट' (Shekhar Tonite) के जरिए वापसी की है। हालांकि, शो का आगाज होते ही यह विवादों और इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाओं के भंवर में फंस गया। सोशल मीडिया पर कयास लगाए जाने लगे कि शो में की गई राजनीतिक टिप्पणियों और सरकार की नीतियों पर कसे गए तंज के कारण इस पर दबाव बनाया जा रहा है और इसका दूसरा एपिसोड कभी सामने नहीं आ पाएगा। अब इन सभी अफवाहों, दावों और शो रुकवाने की अटकलों पर खुद शेखर सुमन ने खुलकर चुप्पी तोड़ी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर डर फैलाने वालों को दो टूक जवाब दिया है।

'द लल्लनटॉप' को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में जब शेखर सुमन से शो पर सरकारी दबाव, प्रतिबंध की आशंकाओं और शो के निर्माता पर जांच एजेंसियों के छापों से जुड़े सवाल पूछे गए, तो उन्होंने बेहद शांत लेकिन तीखे अंदाज में इन बातों को सिरे से खारिज कर दिया। शेखर सुमन ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक व्यंग्य हमेशा से मुख्यधारा का हिस्सा रहा है और देश का नेतृत्व इतना संकीर्ण या कमजोर नहीं है कि वह एक मनोरंजन कार्यक्रम को बंद करवाने के लिए सरकारी तंत्र को लगा दे।

'मोदी जी इतने कमजोर नहीं हैं कि एक छोटे से शो के लिए फोन करवाएं'

साक्षात्कार के दौरान जब यह मुद्दा उठा कि क्या सत्ता प्रतिष्ठान की ओर से उनके शो के कंटेंट को लेकर कोई आपत्ति या फोन कॉल आई है, तो शेखर सुमन ने कहा कि लोग बिना किसी आधार के डर का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने कमजोर हैं कि एक छोटे से शो के लिए उनकी सरकार के लोग मुझे फोन करेंगे। मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता। वह एक बहुत अदब वाले इंसान हैं। मेरे हिसाब से इस देश और पूरी दुनिया में और भी बहुत सारी गंभीर चीजें घट रही हैं, जिन पर सरकार का ध्यान जाता होगा। मेरे शो के अलावा भी दुनिया में बहुत कुछ है और देखने के लिए बहुत सारे लोग हैं। किसी सरकार के पास इतना खाली वक्त नहीं होता कि वह एक व्यंग्य शो के पीछे पड़ जाए।"

शेखर सुमन ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर जो लोग यह नैरेटिव गढ़ रहे हैं कि सरकार की आलोचना करने पर तुरंत कार्रवाई हो जाती है, वे वस्तुस्थिति को समझे बिना राय बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर छोटी बात को सीधे शीर्ष नेतृत्व के दबाव से जोड़ देना एक तरह का पूर्वाग्रह है।

'दूसरा एपिसोड नहीं आएगा? कौन रोकेगा?': धमकियों और अटकलों पर तीखा पलटवार

इंटरनेट पर चल रही टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शेखर सुमन ने बताया कि जैसे ही उनका पहला एपिसोड स्ट्रीम हुआ, कमेंट बॉक्स में दावों की बाढ़ आ गई थी। लोग लिख रहे थे कि अब शो बंद हो जाएगा और इसकी अगली कड़ी कभी प्रसारित नहीं हो सकेगी।

इस पर तंज कसते हुए शेखर ने कहा, "हमारा शो आया था और उस पर लगातार कमेंट्स में यही भरा हुआ था कि इसका दूसरा एपिसोड नहीं आ पाएगा। मैं पूछता हूं कि क्यों नहीं आ पाएगा? कौन रोकेगा? लोग कहते हैं कि ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ होगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि उन्हें सकारात्मक आलोचना पसंद है और वे इसे लोकतंत्र की ताकत मानते हैं। मैंने उनकी इसी बात को एक प्रेरणा के रूप में लिया और सोचा कि ठीक है, अगर उन्हें आलोचना पसंद है तो फिर हम भी आलोचना करते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि उनमें अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर है और वे इस तरह के राजनीतिक व्यंग्य को इतनी गंभीरता से नहीं लेंगे।"

संजय दत्त के विवादित बयान और स्क्रिप्टेड कंटेंट पर मचे हंगामे की सच्चाई

दरअसल, 'शेखर टुनाइट' को लेकर विवाद की मुख्य चिंगारी गांधी जयंती के मौके पर प्रसारित हुए विशेष एपिसोड से भड़की थी। इस खास एपिसोड में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। बातचीत के दौरान संजय दत्त ने देश के सामाजिक ताने-बाने और मौजूदा माहौल पर बात करते हुए कह दिया था कि भारत के लोग बेहद प्यारे और बड़े दिल वाले हैं और यहां हमेशा शांति रहनी चाहिए, लेकिन अब उन्हें हमारे देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती।

संजय दत्त के इस बयान की छोटी-छोटी क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसके बाद दक्षिणपंथी समूहों और आलोचकों ने अभिनेता पर निशाना साधना शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख बाद में यह स्पष्टीकरण भी आया कि यह पूरा सेगमेंट एक पूर्व-लिखित हास्य-व्यंग्य (स्क्रिप्टेड सटायर) का हिस्सा था और इसका मकसद किसी की धार्मिक या राजनीतिक भावनाओं को आहत करना नहीं था। हालांकि, इसी विवाद के बाद यह चर्चा फैल गई कि संजय दत्त के इस बयान के कारण शो पर गाज गिरने वाली है। शेखर सुमन ने अपने साक्षात्कार में संजय दत्त का बचाव करते हुए कहा कि एक कलाकार को उसके द्वारा मंच पर कही गई हर बात के लिए व्यक्तिगत रूप से कठघरे में खड़ा करना गलत है।

प्रोड्यूसर पर ईडी की कार्रवाई और राजनीतिक बदले के दावों पर क्या बोले अभिनेता?

जब साक्षात्कारकर्ता ने शेखर सुमन से यह सीधा सवाल पूछा कि क्या शो के निर्माण से जुड़े लोगों या प्रोड्यूसर पर केंद्रीय जांच एजेंसी (ईडी) की कार्रवाई की जो खबरें उड़ी थीं, उनका संबंध शो के कंटेंट या राजनीतिक आलोचना से था? तो इस पर शेखर ने बेहद संतुलित रुख अपनाया।

शेखर सुमन ने कहा, "अगर ऐसा कुछ हुआ भी है, तो मैं अब भी यही मानकर चल रहा हूं कि सरकार इतनी कमजोर नहीं है कि वह एक कार्यक्रम के बदले ऐसी कार्रवाई करेगी। और अगर वाकई ऐसा किसी शो के कारण हुआ है, तो यह बेहद अफसोस की बात होगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को इतना संवेदनशील या असहनशील नहीं होना चाहिए कि वह कला, व्यंग्य या आलोचना से असहज महसूस करने लगे।

व्यंग्य की परंपरा और लोकतंत्र में असहमति की जगह

शेखर सुमन ने बातचीत के अंत में जोर देकर कहा कि भारत में व्यंग्य और हास्य की एक बहुत समृद्ध परंपरा रही है, जहां आर. के. लक्ष्मण के कार्टूनों से लेकर मंचों पर होने वाले राजनीतिक नाटकों तक सत्ता से सीधे सवाल पूछे जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी या विचारधारा के खिलाफ निजी एजेंडा नहीं चला रहे हैं, बल्कि समसामयिक मुद्दों, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और आम जनता की समस्याओं को अपनी शैली में सामने ला रहे हैं। उन्होंने दर्शकों को आश्वस्त किया कि 'शेखर टुनाइट' का सफर रुकने वाला नहीं है और आगामी कड़ियों में भी राजनीतिक व सामाजिक विसंगतियों पर इसी धारदार अंदाज में बातचीत जारी रहेगी।