मिशन 2027 के लिए पंजाब कांग्रेस का बड़ा दांव, चरणजीत सिंह चन्नी की अगुआई में कैंपेन कमेटी की पहली बैठक
पंजाब की सियासत में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी की चुनाव अभियान समिति यानी कैंपेन कमेटी की पहली औपचारिक बैठक आयोजित की गई। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को पार्टी के पुनर्गठन और चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति के गठन के करीब चार महीने बाद आयोजित इस बैठक में संगठन की सक्रियता, राज्यव्यापी दौरे और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी व मुख्य विपक्षी दलों को घेरने के लिए विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है।
संगठन में संतुलन और एकजुटता का संदेश: प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी
इस उच्चस्तरीय बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सचिन पायलट और नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह समेत कई प्रमुख नेता शामिल रहे। पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और सांगठनिक पदों को लेकर विभिन्न गुटों के बीच खींचतान की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही थीं। ऐसे दौर में चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कैंपेन कमेटी की मेज पर सभी वरिष्ठ चेहरों का एक साथ बैठना पार्टी कार्यकर्ताओं में एकता का मजबूत संदेश देने का प्रयास है। सचिन पायलट ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए सभी नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर जमीनी स्तर पर उतरना होगा।
दलित वोट बैंक और जमीनी पकड़ को साधने की चन्नी के कंधों पर जिम्मेदारी
चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी की कमान सौंपे जाने के पीछे कांग्रेस की सोची-समझी सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति काम कर रही है। पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी है, जो दोआबा और मालवा के कई विधानसभा हलकों में चुनावी नतीजों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी की ग्रामीण और कमजोर तबकों में सीधी पकड़ मानी जाती है। पार्टी हाईकमान का मानना है कि चन्नी के चेहरे को आगे रखकर कांग्रेस अपने पारंपरिक कैडर और दलित मतदाताओं को दोबारा पार्टी से मजबूती से जोड़ सकती है। बैठक में इस बात पर भी मंथन हुआ कि कैसे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंपर्क यात्राएं और रैलियां शुरू की जाएं।
समिति की कार्ययोजना: को-ऑर्डिनेटर और वरिष्ठ नेताओं का संयुक्त रोडमैप
कैंपेन कमेटी में सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी को बतौर को-ऑर्डिनेटर शामिल किया गया है, जबकि सुखपाल सिंह खैहरा और राणा गुरजीत सिंह जैसे अनुभवी व आक्रामक नेताओं को भी रणनीतिक जिम्मेदारियां दी गई हैं। बैठक में इन नेताओं ने अपने सुझाव रखते हुए कहा कि केवल शहरों तक सीमित रहने के बजाय ब्लॉक और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। समिति ने तय किया है कि युवाओं, किसानों, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों के मुद्दों पर केंद्रित अलग-अलग चार्जशीट तैयार की जाएगी, ताकि राज्य सरकार की नाकामियों को जनता के बीच तथ्यों के साथ रखा जा सके।
सत्ता पक्ष पर तीखे हमले की तैयारी और आगामी चुनावी चुनौतियां
बैठक के एजेंडे में कानून-व्यवस्था, राज्य पर बढ़ता कर्ज, नशा उन्मूलन के अधूरे वादे और किसानों की लंबित मांगों को प्रमुखता से शामिल किया गया। कांग्रेस नेताओं ने रणनीति बनाई है कि आने वाले हफ्तों में राज्य भर में विरोध प्रदर्शनों और जनसभाओं की श्रृंखला शुरू की जाएगी। हालांकि, पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि टिकट वितरण और रैलियों के दौरान अंदरूनी गुटबाजी दोबारा हावी न हो। चन्नी की अध्यक्षता में शुरू हुई इस नई कवायद को पंजाब में कांग्रेस की वापसी की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।