न्यूजीलैंड में शुभमन गिल के शानदार वनडे करियर पर लगा पहला 'दाग', 72वें मैच में जाकर हुआ ऐसा अनचाहा हादसा

न्यूजीलैंड में शुभमन गिल के शानदार वनडे करियर पर लगा पहला 'दाग', 72वें मैच में जाकर हुआ ऐसा अनचाहा हादसा

विश्व क्रिकेट में अपनी असाधारण निरंतरता, तकनीकी श्रेष्ठता और रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी के लिए मशहूर भारतीय कप्तान शुभमन गिल के शानदार एकदिवसीय करियर में एक ऐसा अध्याय जुड़ गया है, जिसे वे कभी याद नहीं रखना चाहेंगे। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारतीय पारी की शुरुआत करने उतरे शुभमन गिल बिना खाता खोले यानी शून्य (Duck) पर पवेलियन लौट गए। अपने अंतरराष्ट्रीय वनडे करियर के 72वें मुकाबले में जाकर गिल पहली बार 'डक' का शिकार बने हैं। किसी भी शीर्ष क्रम के सलामी बल्लेबाज के लिए 71 पारियों तक लगातार बिना शून्य पर आउट हुए रन बनाते रहना अपने आप में एक अविश्वसनीय और ऐतिहासिक कीर्तिमान था, लेकिन न्यूजीलैंड की तेज और उछाल भरी परिस्थितियों में आखिरकार यह सुनहरा सिलसिला टूट गया और उनके बेदाग रिकॉर्ड पर यह पहला अनचाहा दाग लग गया। क्रिकेट के जानकारों के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में जहां नई सफेद गेंद से तेज गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में जबर्दस्त मूवमेंट मिलता है, वहां 70 से अधिक मैचों तक शून्य से बचे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। गिल ने 2019 में अपने वनडे डेब्यू के बाद से लेकर अब तक लगातार टीम को मजबूत शुरुआत दी है, लेकिन खेल की अनिश्चितताओं ने इस बार भारतीय कप्तान को भी अपने घेरे में ले लिया।

कीवी गेंदबाजों की सधी हुई योजना और गिल की तकनीकी चूक

न्यूजीलैंड के हालात हमेशा से सलामी बल्लेबाजों के लिए दुनिया के सबसे कठिन इम्तिहानों में से एक माने जाते हैं। मैच की शुरुआत में आसमान में छाए घने बादलों और पिच पर मौजूद हल्की नमी का पूरा फायदा उठाते हुए कीवी तेज गेंदबाजों ने बेहद सटीक लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की। गिल जब क्रीज पर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी पारंपरिक शैली में आगे बढ़कर गेंद को खेलने का प्रयास किया। कीवी तेज गेंदबाज ने गेंद को ऑफ स्टंप के ठीक बाहर गुड लेंथ पर टप्पा खिलाया, जहां से गेंद तेजी से अंदर आने के बजाय पिच से टकराकर हल्की सी बाहर की ओर निकली। शुभमन गिल गेंद की लाइन को पूरी तरह भांप नहीं सके और उनका बल्ला गेंद के बाहरी किनारे से छू गया। गेंद सीधे स्लिप में तैनात फील्डर के सुरक्षित हाथों में समा गई। अंपायर की उंगली उठते ही मैदान पर सन्नाटा छा गया और गिल निराश होकर सिर झुकाए पवेलियन की ओर चल पड़े। यह पहला मौका था जब अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में गिल को बिना कोई रन बनाए डगआउट लौटना पड़ा।

दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ चुके थे गिल

इस अनचाहे रिकॉर्ड के बावजूद, गिल ने जितनी लंबी यात्रा बिना 'डक' के तय की, वह दुनिया के महानतम बल्लेबाजों के करियर में भी दुर्लभ दिखाई देती है। क्रिकेट इतिहास में बहुत कम ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने करियर के शुरुआती 70 से अधिक मैचों में शून्य का मुंह न देखा हो। भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज भी अपने शुरुआती 15 से 20 मैचों के भीतर ही शून्य पर आउट हो चुके थे। गिल ने अपने 72 मैचों के इस सफर में 6 शतकों, एक ऐतिहासिक दोहरे शतक (208 रन) और कई मैच जिताऊ अर्धशतकों के सहारे 58 से अधिक के बेमिसाल औसत से रन बनाए हैं। उनका यह निरंतरता भरा प्रदर्शन ही था जिसके चलते चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय वनडे टीम की कमान सौंपी। यही वजह है कि 72वें मैच में जाकर शून्य पर आउट होना उनके कद को छोटा नहीं करता, बल्कि यह साबित करता है कि वे अब तक किस असाधारण अनुशासन के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्लेबाजी करते रहे हैं।

कप्तानी का दबाव या सिर्फ एक खराब दिन?

जैसे ही शुभमन गिल शून्य पर आउट हुए, क्रिकेट गलियारों में उनके वर्कलोड और कप्तानी के दबाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। सीमित ओवरों के साथ-साथ तीनों प्रारूपों में खेलने और टीम की अगुवाई करने की दोहरी जिम्मेदारी किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए मानसिक और शारीरिक परीक्षा होती है। हालांकि, खेल विश्लेषकों का मानना है कि इसे कप्तानी के दबाव से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। तेज गेंदबाजों की मददगार पिच पर किसी भी बेहतरीन बल्लेबाज के सामने ऐसी अनplayable गेंद आ सकती है जो पहली ही गेंद पर खेल खत्म कर दे। गिल की बल्लेबाजी तकनीक हमेशा से ठोस रही है और वे फ्रंटफुट व बैकफुट दोनों पर समान अधिकार से खेलते हैं। एक मैच की नाकामी उनके लंबे समय से चले आ रहे फॉर्म पर सवाल खड़े नहीं कर सकती। भारतीय ड्रेसिंग रूम और टीम मैनेजमेंट को गिल की वापसी करने की क्षमता पर पूरा भरोसा है, क्योंकि वे पहले भी कई मौकों पर शुरुआती असफलताओं के बाद शानदार वापसी करते हुए बड़े शतक जड़ चुके हैं।

आगे की राह: क्या गिल इस झटके से सीखकर करेंगे जोरदार पलटवार?

क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि महान खिलाड़ी अपनी असफलताओं से ही सबसे बड़ी सीख लेते हैं। शून्य पर आउट होना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक कड़वा घूंट होता है, लेकिन यही झटके उन्हें क्रीज पर और अधिक सतर्क व एकाग्र बनाते हैं। न्यूजीलैंड का यह दौरा भारतीय टीम के लिए काफी अहम है और कप्तान के रूप में गिल की भूमिका सिर्फ बल्ले से रन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें मैदान पर रणनीति बनाकर विरोधी टीम को बैकफुट पर धकेलना भी है। प्रशंसकों और विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि इस अनचाहे डक के बाद शुभमन गिल आगामी मैचों में और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ क्रीज पर उतरेंगे। उनके पास वह तकनीक, संयम और आक्रामकता मौजूद है जो किसी भी मजबूत गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस कर सकती है। 72 मैचों में लगा यह पहला 'दाग' उनके शानदार करियर की एक छोटी सी ठोकर मात्र है, और गिल का अगला लक्ष्य निश्चित रूप से एक बड़ी शतकीय पारी खेलकर आलोचकों को बल्ला थामे जवाब देना होगा।