'वह रन मशीन था, उसका आत्मविश्वास टूट रहा', यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर भड़के रविचंद्रन अश्विन

'वह रन मशीन था, उसका आत्मविश्वास टूट रहा', यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर भड़के रविचंद्रन अश्विन

भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को हालिया मैचों की प्लेइंग इलेवन से लगातार बाहर रखे जाने पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। अश्विन ने टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं की रणनीति पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि जो बल्लेबाज हर फॉर्मेट और घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहा था, उसे बेंच पर बैठाकर उसके आत्मबल के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक लगातार शतक और दोहरे शतक जड़ने वाले इस युवा सितारे को मैच दर मैच नजरअंदाज किए जाने पर क्रिकेट जगत में भी अब तीखी बहस छिड़ गई है। अश्विन के इस बेबाक बयान ने ड्रेसिंग रूम की चयन नीतियों और खिलाड़ियों की सुरक्षा की भावना को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

'वह हर स्तर पर रन मशीन था': अश्विन ने याद दिलाए जायसवाल के आंकड़े

अपने यूट्यूब चैनल पर भारतीय क्रिकेट के मौजूदा हालात और टीम संयोजन पर चर्चा करते हुए रविचंद्रन अश्विन ने यशस्वी जायसवाल का पुरजोर समर्थन किया। अश्विन ने कहा कि यशस्वी कोई साधारण प्रतिभा नहीं हैं, बल्कि वे एक स्थापित 'रन मशीन' हैं जिन्होंने पिछले कुछ समय में टीम इंडिया के लिए सबसे मुश्किल परिस्थितियों में भी बड़ी पारियां खेली हैं। चाहे इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में दोहरे शतक लगाना हो या चुनौतीपूर्ण पिचों पर तेज शुरुआत देना, जायसवाल ने हमेशा अपनी उपयोगिता साबित की है। अश्विन ने सवाल उठाया कि जब कोई बल्लेबाज अपनी जिंदगी की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हो, तब उसे प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना न तो तर्कसंगत है और न ही खिलाड़ी के हित में।

टीम से अंदर-बाहर करने से खिलाड़ी के मनोबल पर पड़ता है गहरा असर

अनुभवी स्पिनर ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए टीम में अपनी जगह को लेकर असुरक्षा का भाव सबसे घातक होता है। अश्विन ने कहा कि जब एक युवा खिलाड़ी को बिना किसी ठोस कारण के एकादश से बाहर कर दिया जाता है, तो उसके दिमाग में आत्म-संदेह घर करने लगता है। उन्होंने कहा कि बाहर बैठकर मैच देखना किसी भी फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज के आत्मविश्वास को तोड़ देता है। ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा और निरंतरता का माहौल होना बेहद जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीक से ज्यादा खेल मानसिक दृढ़ता का होता है। यदि लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी जगह पक्की न हो, तो बल्लेबाज अगली बार मैदान पर उतरते समय खुलकर खेलने के बजाय अपनी जगह बचाने के दबाव में आ जाता है।

टीम संयोजन और रोटेशन पॉलिसी पर उठे गंभीर सवाल

भारतीय टीम मैनेजमेंट अक्सर परिस्थितियों और मैच-अप्स के आधार पर खिलाड़ियों को रोटेट करने की बात करता है, लेकिन अश्विन के अनुसार यह फॉर्मूला हर खिलाड़ी पर आंख मूंदकर लागू नहीं किया जा सकता। टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज की भूमिका सबसे कठिन मानी जाती है, जहां नई गेंद का सामना करने के लिए निरंतर लय की जरूरत होती है। विश्लेषकों का भी मानना है कि जायसवाल जैसे आक्रामक और तकनीकी रूप से सक्षम बाएं हाथ के बल्लेबाज को निरंतर मौके देकर ही भविष्य की एक मजबूत टेस्ट टीम खड़ी की जा सकती है। सीनियर खिलाड़ियों की वापसी या पिच के मिजाज के नाम पर इन-फॉर्म युवा खिलाड़ी की अनदेखी करना टीम के संतुलन को भी बिगाड़ता है।

पूर्व दिग्गजों और फैंस ने भी किया अश्विन के बयान का समर्थन

अश्विन के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और खेल हलकों में चयन नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी माना है कि यशस्वी जायसवाल भारतीय टेस्ट टीम के भविष्य के आधार स्तंभ हैं। उन्हें केवल कुछ मैचों के आधार पर या गैर-जरूरी बदलावों के चलते बाहर नहीं बैठाया जाना चाहिए। क्रिकेट फैंस भी टीम में स्थायित्व की मांग कर रहे हैं ताकि युवा प्रतिभाएं बिना किसी डर के खुलकर खेल सकें। अब देखना होगा कि आगामी सीरीज और महत्वपूर्ण मुकाबलों में टीम मैनेजमेंट अश्विन की इस चेतावनी और जायसवाल की फॉर्म को ध्यान में रखकर क्या रुख अपनाता है।