RMLNLU के दीक्षांत समारोह में गरजे सीएम योगी; युवा वकीलों को दिया न्याय का मंत्र
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली को लेकर कड़ा संदेश दिया। कानून की डिग्री हासिल करने वाले युवा स्नातकों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वह दौर अब इतिहास बन चुका है जब सत्ता के संरक्षण में माफिया और अपराधी समानांतर व्यवस्था चलाते थे। उन्होंने दो टूक कहा कि आज उत्तर प्रदेश में "रूल ऑफ माफिया" नहीं, बल्कि पूरी दृढ़ता के साथ "रूल ऑफ लॉ" (कानून का शासन) लागू है। मुख्यमंत्री ने नए वकीलों और विधिक विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे अपनी पेशेवर विधा का इस्तेमाल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सुलभ, पारदर्शी और त्वरित न्याय दिलाने के लिए करें।
'माफिया राज से कानून के राज तक का सफर': सीएम योगी ने गिनाए बदलाव
दीक्षांत समारोह के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में कानून-व्यवस्था के ऐतिहासिक कायापलट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज, विकासशील अर्थव्यवस्था और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा के लिए 'रूल ऑफ लॉ' पहली और अनिवार्य शर्त है:
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माफिया तंत्र पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में संगठित अपराध और बाहुबलियों का बोलबाला था, जिससे निवेश, उद्योग और आम नागरिक का जीवन असुरक्षित था। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने माफिया संस्कृति की कमर तोड़ दी है और अपराधी या तो जेलों में हैं या कानून की जद में।
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निवेश और सुरक्षा का माहौल: उन्होंने बताया कि कानून का राज स्थापित होने के कारण ही आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। सुरक्षा की गारंटी ही आर्थिक प्रगति का आधार बनी है।
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न्यायपालिका पर जनता का भरोसा: सीएम ने जोर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत होती है और जांच एजेंसियां निष्पक्ष काम करती हैं, तो न्यायपालिका के प्रति आम नागरिक का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है।
युवा अधिवक्ताओं को सलाह: 'मुवक्किल की मजबूरी को कमाई का जरिया न बनाएं'
दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले युवा वकीलों को विधिक आचार संहिता का पाठ पढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वकालत केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक उच्च सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि न्याय में अनावश्यक देरी अपने आप में अन्याय का रूप ले लेती है।
सीएम योगी ने युवा विधिक पेशेवरों से आग्रह किया कि वे अदालतों में लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण में सहयोग करें। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जब कोई गरीब, शोषित या वंचित व्यक्ति न्याय की आस लेकर अदालत की चौखट पर पहुंचता है, तो अधिवक्ता को उसकी लाचारी का फायदा उठाने के बजाय उसे न्याय दिलाने का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच की पैरवी करना और निर्दोष को राहत दिलाना ही एक सफल अधिवक्ता की वास्तविक पहचान है।
कानूनी शिक्षा में तकनीकी नवाचार और लोक अदालतों पर बल
मुख्यमंत्री ने विधिक शिक्षा में आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल डेटाबेस के बढ़ते उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल कोर्ट और ई-फाइलिंग से न्यायिक प्रक्रियाओं में गति और पारदर्शिता आई है। साथ ही, उन्होंने छोटे और आपसी विवादों को सुलझाने के लिए 'मध्यस्थता' (Mediation) और 'लोक अदालतों' को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई, जिससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम हो सके और विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो पाए।
दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों (बीए एलएलबी, एलएलएम और पीएचडी) के उत्तीर्ण छात्रों को उपाधियां और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण व रजत पदक प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।