विराट कोहली ने चुनी ODI करियर की नंबर-1 पारी, जिसे मानते हैं दिल के सबसे करीब
विश्व क्रिकेट के इतिहास में जब भी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) फॉर्मेट के सबसे महान और प्रभावशाली बल्लेबाजों की बात होगी, तो भारत के रन मशीन विराट कोहली का नाम हमेशा शीर्ष पर दर्ज रहेगा। वनडे क्रिकेट में 50 से अधिक शतकों का अविश्वसनीय रिकॉर्ड बनाने वाले और अनगिनत बार भारतीय टीम को अपनी दमदा बल्लेबाजी से जीत दिलाने वाले विराट कोहली ने हाल ही में एक दिल छू लेने वाला खुलासा किया है। अपने करियर के स्वर्णिम पन्नों को पलटते हुए जब किंग कोहली से पूछा गया कि उनके पूरे वनडे करियर की सबसे सर्वश्रेष्ठ और नंबर-1 पारी कौन सी है जिसे वे अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं, तो उन्होंने किसी सामान्य शतक का नाम न लेकर एक ऐसी पारी का चयन किया जिसने पूरे क्रिकेट जगत को एक बार फिर उनकी महानता का अहसास करा दिया। विराट कोहली के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर खेल के मैदानों तक नई बहस और प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है।
'वह केवल एक मैच नहीं बल्कि मेरे आत्मसम्मान और देश के गौरव की जंग थी': जानिए किस पारी को चुना कोहली ने नंबर-1
विराट कोहली ने अपने एक विशेष इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनके लिए पाकिस्तान के खिलाफ मीरपुर (ढाका) में खेली गई 183 रनों की ऐतिहासिक पारी या विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल के शतक हमेशा खास रहेंगे, लेकिन जिस पारी ने उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में पूरी तरह से तराशा और जिसे वे अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं, वह साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई 133 रनों की नाबाद तूफानी पारी (Hobart Blitz) है। सीबी सीरीज (CB Series) के उस मरो या मारो वाले मुकाबले में भारत को बोनस अंक के साथ जीतने के लिए 40 ओवरों में 321 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करना था। विराट कोहली ने महज 86 गेंदों पर 16 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 133 रनों की नाबाद आतिशी पारी खेलकर लसिथ मलिंगा जैसे घातक गेंदबाज के ओवरों की धज्जियां उड़ा दी थीं और भारत को केवल 36.4 ओवरों में ही ऐतिहासक जीत दिला दी थी। कोहली का मानना है कि इस पारी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भरोसा दिया कि वे दुनिया के किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।
लसिथ मलिंगा के यॉर्कर और ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों को धता बताकर रचा था नया इतिहास
होबार्ट का वह मैदान और श्रीलंका के खतरनाक यॉर्कर किंग लसिथ मलिंगा का वह दौर हर क्रिकेट प्रेमी की यादों में आज भी तरोताजा है। लसिथ मलिंगा की गेंदों को खेलना उस समय दुनिया के सबसे बड़े बल्लेबाजों के लिए भी एक दुःस्वप्न जैसा होता था। लेकिन होबार्ट के मैदान पर 23 साल के युवा विराट कोहली ने मलिंगा के एक ही ओवर में 24 रन ठोक कर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। विराट ने अपनी इस पारी को याद करते हुए कहा कि उस दिन मैदान पर उतरते समय उनके दिमाग में केवल एक ही लक्ष्य था कि टीम को किसी भी कीमत पर फाइनल की रेस में बनाए रखना है। उन्होंने बिना किसी दबाव के अपने शॉट्स खेले और विरोधी टीम के सबसे मजबूत गेंदबाज की लाइन और लेंथ को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यही वजह है कि करियर के सैकड़ों बड़े मैचों के बावजूद होबार्ट की वह 133 रनों की पारी उनके दिल में हमेशा पहले स्थान पर कायम है।
होबार्ट से लेकर 50वें वनडे शतक तक का सफर: किंग कोहली के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी थी यह पारी
क्रिकेट के दिग्गजों और खेल विश्लेषकों का मानना है कि होबार्ट में खेली गई यह नाबाद 133 रनों की पारी विराट कोहली के अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित हुई थी। इस पारी के बाद ही दुनिया ने उन्हें 'चेज मास्टर' (Chase Master) का आधिकारिक खिताब देना शुरू किया था। इसके बाद विराट ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलता के एक के बाद एक नए रिकॉर्ड कायम करते चले गए। सचिन तेंदुलकर के 49 वनडे शतकों के सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़कर 50वां वनडे शतक जड़ने तक, विराट की हर महान पारी के पीछे होबार्ट वाले उसी निडर और जुझारू जज्बे की झलक दिखाई देती है। खुद विराट का भी मानना है कि अगर वह पारी उस तरह न निकली होती, तो शायद उनका एक मैच विनर के रूप में आत्मविश्वास उस स्तर तक नहीं पहुंच पाता।
निष्कर्ष: क्रिकेट के इतिहास में 'चेज मास्टर' की होबार्ट पारी हमेशा अमर और अद्वितीय रहेगी
संक्षेप में कहें तो विराट कोहली द्वारा अपनी होबार्ट वाली 133 रनों की पारी को अपने वनडे करियर की नंबर-1 और सबसे प्रिय पारी चुनना यह साबित करता है कि एक सच्चे खिलाड़ी के लिए आंकड़े नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में टीम के काम आना सबसे ज्यादा मायने रखता है। कोहली की यह पसंद उनके प्रशंसकों और युवा क्रिकेटरों को यह प्रेरणा देती है कि विपरीत परिस्थितियों में ही इंसान का असली निखार सामने आता है।