अनुशासनहीनता और सुस्ती पर माफी के मूड में नहीं अखिलेश यादव, चूक पर 30 दिनों में सपा...

अनुशासनहीनता और सुस्ती पर माफी के मूड में नहीं अखिलेश यादव, चूक पर 30 दिनों में सपा...

उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) को जीत की दहलीज तक पहुंचाने में जुटे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की लापरवाही, गुटबाजी या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में 37 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में उभरी सपा के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। चुनाव नजदीक होने के बावजूद अखिलेश यादव ने यह साफ कर दिया है कि संगठन में पदों पर बैठे नेताओं को अब केवल पद नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम और अनुशासन दिखाना होगा। इसी सख्त नीति का नतीजा है कि पार्टी नेतृत्व ने महज एक महीने के भीतर 4 महत्वपूर्ण जिला कमेटियों (कन्नौज, गोरखपुर, एटा, कासगंज) और एक पूरी राज्य यूनिट (उत्तराखंड) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।

1. कन्नौज: पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों पर गिरी गाज

संगठनात्मक कार्रवाई की ताजा मिसाल खुद अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में देखने को मिली। शनिवार को कन्नौज के पार्टी कार्यालय में आयोजित पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल खुद मौजूद थे, लेकिन पंडाल में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। अखिलेश के अपने गढ़ में उम्मीद के मुताबिक भीड़ न जुटना और खाली कुर्सियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरा। इस लापरवाही पर रविवार शाम प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत पूरी जिला कार्यकारिणी, सभी प्रकोष्ठों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।

2. गोरखपुर: प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी को लेकर हाथापाई, महानगर-जिला कमेटी बर्खास्त

इससे पहले 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में सपा पदाधिकारियों के बीच हुई सार्वजनिक मारपीट पर बड़ी कार्रवाई हुई थी। शास्त्री चौक स्थित प्रेस क्लब में जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम द्वारा 'लोकतंत्र बचाओ सप्ताह' को लेकर बुलाई गई प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ नेताओं के बीच आगे की कुर्सी पर बैठने को लेकर विवाद हो गया। पूर्व चेयरमैन अंशुमान सिंह के समर्थकों और पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के बीच तीखी नोकझोंक के बाद मीडिया कैमरों के सामने ही हाथापाई और गाली-गलौज शुरू हो गई। पत्रकारों के सामने हुई इस फजीहत की रिपोर्ट मिलते ही अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी सहित सभी फ्रंटल संगठनों को फौरन भंग कर दिया।

3 व 4. एटा और कासगंज: लखनऊ में अखिलेश के सामने ही भिड़ गए दावेदार

19 सितंबर को लखनऊ स्थित सपा के प्रदेश मुख्यालय में टिकट दावेदारों की बैठक के दौरान अभूतपूर्व स्थिति बन गई थी। एटा और कासगंज विधानसभा क्षेत्रों से दावेदारी कर रहे लगभग 250 से 300 नेताओं को जमीनी फीडबैक के लिए बुलाया गया था। बैठक में जब अखिलेश यादव खुद मौजूद थे, तभी स्थानीय नेता मंजीत यादव और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। अपने सामने इस तरह की गुटबाजी देखकर अखिलेश यादव बेहद नाराज हुए और बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर चले गए। उसी शाम अनुशासनहीनता पर कड़ा एक्शन लेते हुए एटा और कासगंज दोनों जिलों की कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों को पूरी तरह भंग कर दिया गया।

5. उत्तराखंड: नई ऊर्जा भरने के लिए पूरी राज्य और जिला इकाइयां भंग

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी 3 अक्टूबर को सपा संगठन में भारी फेरबदल किया गया। सपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने अखिलेश यादव के निर्देश पर राज्य कार्यकारिणी सहित प्रदेश की सभी जिला, महानगर, नगर इकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड में वर्षों से जमे निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर अब नए सिरे से युवाओं और संघर्षशील चेहरों को जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि राज्य में पार्टी की चुनावी उपस्थिति दर्ज कराई जा सके।

कैडर को सीधा संदेश: 'काम करो या रास्ता नापो'

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 26 नवंबर को 'पीडीए प्रणपत्र' (मैनिफेस्टो) जारी करने से पहले अखिलेश यादव संगठन की पूरी ओवरहॉलिंग कर रहे हैं। एक महीने के भीतर 4 जिलों और 1 राज्य संगठन पर चली इस कैंची ने पार्टी के भीतर गुटबाजी में लगे नेताओं में खलबली मचा दी है। अखिलेश यादव का यह रवैया स्पष्ट करता है कि 2027 के महामुकाबले में वह किसी भी नेता की व्यक्तिगत हैसियत या रसूख के आगे पार्टी हित और अनुशासन से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।