नीले ड्रम में पति की लाश पर डाली सीमेंट, फिर आशिक संग कसोल में मनाई छुट्टियां: मेरठ के रूह कंपा देने वाले सौरभ मर्डर केस...

नीले ड्रम में पति की लाश पर डाली सीमेंट, फिर आशिक संग कसोल में मनाई छुट्टियां: मेरठ के रूह कंपा देने वाले सौरभ मर्डर केस...

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए बहुचर्चित सौरभ राजपूत मर्डर केस में अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी (सजा-ए-मौत) की सजा सुनाई है। इस जघन्य हत्याकांड की बर्बरता ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जिस पति ने प्यार में अपनी दुनिया बसाई, उसी की गर्दन पर चाकू चलाकर लाश के टुकड़े किए गए, फिर बदबू दबाने के लिए प्लास्टिक के नीले ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया गया। कत्ल के इस खौफनाक खेल के बाद दोनों कातिल बेपरवाह होकर हिमाचल प्रदेश की वादियों में छुट्टियां मनाने निकल गए। लंदन की मर्चेंट नेवी से वतन वापसी, प्यार का नाटक, रची गई खूनी साजिश और फिर कोर्ट द्वारा फांसी के फंदे तक पहुंचने की यह पूरी टाइमलाइन किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है।

2016 से 2019: प्रेम विवाह, बेटी का जन्म और स्कूल के दोस्त की एंट्री

सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी की प्रेम कहानी साल 2016 में एक प्रेम विवाह के साथ शुरू हुई थी। सौरभ मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे और उनका अधिकांश समय विदेशों में पानी के जहाजों पर बीतता था। साल 2019 में मुस्कान ने अपनी पहली बेटी पीहू को जन्म दिया। इसी दौरान दोनों के वैवाहिक जीवन में पारिवारिक विवाद और अनबन शुरू हो गई। सौरभ जब अपनी नौकरी के सिलसिले में लंदन और अन्य देशों में तैनात रहते थे, उसी बीच मुस्कान की जिंदगी में उसके स्कूल के पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला की दोबारा एंट्री हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह दोस्ती एक अंधे इश्क में बदल गई। साहिल और मुस्कान ने सौरभ को अपने रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा मान लिया और उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की साजिश रचनी शुरू कर दी।

24 से 28 फरवरी 2025: लंदन से वतन वापसी और बेटी के जन्मदिन पर झूठा प्यार

सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान और अपनी लाडली बेटी पीहू का जन्मदिन मनाने के लिए 24 फरवरी 2025 को लंदन से छुट्टी लेकर मेरठ लौटे थे। उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि जिस घर में वे खुशियां तलाशने आए हैं, वहीं उनकी कब्र तैयार की जा रही है। 28 फरवरी 2025 को बेटी पीहू के जन्मदिन पर एक भव्य पार्टी का आयोजन किया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए उस दिन के वीडियो में सौरभ और मुस्कान एक साथ डांस करते नजर आ रहे थे। यह वीडियो देखकर किसी को भी यह गुमान नहीं हो सकता था कि इस चेहरे पर मुस्कान के पीछे कत्ल की खूनी पटकथा लिखी जा चुकी थी।

3 मार्च 2025: वो काली रात, नशा, चाकू के वार और सीमेंट का ड्रम

3 मार्च 2025 की रात मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित किराए के मकान में इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, मुस्कान ने पहले सौरभ के खाने या पेय पदार्थ में भारी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे अचेत कर दिया। सौरभ के बेसुध होते ही मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला को घर के अंदर बुला लिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर सौरभ को मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए बाजार से पहले ही एक बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम और सीमेंट की बोरियां खरीद कर रखी गई थीं। दोनों ने सौरभ के शव को मोड़कर ड्रम के अंदर डाला और ऊपर से सीमेंट, रेत और कंक्रीट का गाढ़ा घोल भर दिया ताकि शव की बदबू बाहर न फैले और किसी को भनक तक न लगे।

4 से 16 मार्च 2025: पति की लाश पर सीमेंट जमाकर कसोल, मनाली और शिमला में मौज

हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के ठीक अगले दिन, यानी 4 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल घर में ताला लगाकर सीधे हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। दोनों ने कसोल, मनाली, शिमला और नैनीताल के टूरिस्ट स्पॉट्स पर करीब दो हफ्ते का समय बिताया। जिस वक्त सौरभ के परिजन और रिश्तेदार उसके अचानक लापता होने से परेशान होकर दर-दर भटक रहे थे, उस वक्त मुस्कान और साहिल पहाड़ों की वादियों में ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे। सौरभ के फोन से रिश्तेदारों को गुमराह करने वाले मैसेज भेजे जाते रहे ताकि किसी को यह शक न हो कि सौरभ अब इस दुनिया में नहीं है।

17 से 19 मार्च 2025: जब खुला राज, नीले ड्रम से निकली लाश और वकीलों का गुस्सा

सौरभ के कई दिनों तक सामने न आने पर परिजनों का शक गहरा गया। जब परिजनों और पुलिस ने सख्ती से पड़ताल शुरू की, तो 17 मार्च 2025 को मुस्कान टूट गई और उसने अपने ही माता-पिता के सामने कत्ल की बात कुबूल कर ली। 18 मार्च 2025 को पुलिस जब ब्रह्मपुरी स्थित मकान पर पहुंची, तो वहां नीले ड्रम में जमाई गई सीमेंट को तोड़कर सौरभ का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। पुलिस ने उसी दिन मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। 19 मार्च को जब दोनों को अदालत में पेशी के लिए लाया गया, तो कचहरी परिसर में मौजूद वकीलों और आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा और आक्रोशित लोगों ने साहिल शुक्ला की पिटाई भी कर दी।

7 अप्रैल से 24 नवंबर 2025: जेल में प्रेग्नेंसी और पति के जन्मदिन पर दूसरी बेटी का जन्म

जेल भेजे जाने के कुछ ही हफ्तों बाद, 7 अप्रैल 2025 को मेडिकल जांच में यह बात सामने आई कि मुस्कान गर्भवती है। इस खुलासे ने मुकदमे में एक और अजीब मोड़ ला दिया। जेल प्रशासन की निगरानी में उसका इलाज चलता रहा। 24 नवंबर 2025 को मेरठ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मुस्कान ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसका नाम उसने 'राधा' रखा। नियति का क्रूर संयोग देखिए कि 24 नवंबर वही तारीख थी जिस दिन मृतक सौरभ राजपूत का जन्मदिन हुआ करता था। एक तरफ सौरभ का परिवार इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा था, वहीं दूसरी तरफ जेल के भीतर हत्यारोपी मुस्कान की गोद में नवजात बच्ची खेल रही थी।

जुलाई 2025 से सितंबर 2026: 126 तारीखें, 22 गवाह और 1000 पन्नों की चार्जशीट

मेरठ पुलिस ने बेहद बारीकी से जांच करते हुए अदालत में लगभग 1,000 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में डे-टू-डे ट्रायल शुरू हुआ। इस पूरे मुकदमे के दौरान कुल 126 तारीखें पड़ीं। फोरेंसिक एक्सपर्ट, डॉक्टर, सीमेंट बेचने वाले दुकानदार, मकान मालिक और चश्मदीदों समेत 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल टॉवर लोकेशन, कसोल के होटल बिलों और ड्रम से मिले फॉरेंसिक सबूतों की ऐसी मजबूत चेन तैयार की गई कि बचाव पक्ष की कोई भी दलील अदालत में टिक नहीं सकी।

'दंड भी धर्म है': जज ने महाभारत का श्लोक पढ़कर सुनाई फांसी की सजा

30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में दोषी करार दिया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को फांसी की सजा का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए टिप्पणी की कि जघन्य अपराध करने वाले को उसके कर्मों का कठोर दंड देना भी धर्म है। अदालत ने साफ किया कि जिस तरह से विश्वास की हत्या कर शव को सीमेंट में दबाया गया और फिर जश्न मनाया गया, वह समाज की सामूहिक चेतना को हिला देने वाला कृत्य है। कोर्ट का फैसला सुनते ही मुस्कान हाथ जोड़कर जमीन पर बैठकर रोने लगी और अपनी बच्चियों की दुहाई देने लगी। हालांकि, अदालत ने इस नृशंस कांड को 'रेयर ऑफ द रेयरेस्ट' मानते हुए दोनों गुनहगारों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का अंतिम हुक्म मुकर्रर कर दिया।