सीएम योगी का बड़ा ऐलान: दिव्यांग पेंशन में फिर होगी बढ़ोतरी, यूपी के सभी 18 मंडलों में बनेंगे पुनर्वास केंद्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सशक्त और आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गोरखपुर क्लब में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही दिव्यांगजनों को मिलने वाली मासिक पेंशन राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी करने जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 'जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र' (DDRC) स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य और विकसित समाज की असली पहचान ऊंची-ऊंची इमारतों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है या नहीं। यही सुशासन का आधार है और प्रदेश की डबल इंजन सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 509 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, ब्रेल किट, स्मार्टफोन और स्मार्टकेन सहित कुल 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया।
300 से बढ़कर 1000 हुई थी पेंशन, अब फिर होगी बढ़ोतरी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल से तुलना करते हुए बताया कि पहले उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों को मात्र 300 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती थी, जो जीवन यापन के लिए बेहद अपर्याप्त थी। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद इस राशि को पहले बढ़ाकर 500 रुपये और बाद में 1000 रुपये प्रति माह किया गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि महंगाई और दैनिक आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार इस धनराशि में एक बार फिर इजाफा करने जा रही है। नई पेंशन राशि कितनी होगी, इसका आधिकारिक शासनादेश अतिशीघ्र जारी कर दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का बजट भी पूर्व सरकारों के 665 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्तमान में 2,200 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जा चुका है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंदों को सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से मदद मिल रही है।
सभी 18 मंडलों में स्थापित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
प्रदेश के सभी कमिश्नरी मुख्यालयों पर आधुनिक स्वास्थ्य व पुनर्वास सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से सीएम योगी ने सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का रोडमैप तैयार किया है। गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में इस प्रकार का केंद्र पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जिसकी तर्ज पर लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, मेरठ, बरेली और आगरा सहित सभी मंडलों में केंद्र खोले जाएंगे।
इन केंद्रों पर फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, कृत्रिम अंग निर्माण व मरम्मत, मानसिक दिव्यांगता परामर्श और विशेष शिक्षा विशेषज्ञों की सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, बचपन में ही दिव्यांगता की पहचान कर उपचार शुरू करने के लिए प्रदेश भर में 'बचपन डे केयर सेंटर्स' का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सीएम योगी ने बताया कि छोटे बच्चों में सुनने की अक्षमता को दूर करने के लिए सरकार कॉक्लियर इंप्लांट के लिए 6 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता और स्पीच थेरेपी का पूरा खर्च उठा रही है।
हर विधानसभा में लगेंगे विशेष शिविर, स्वरोजगार से जुड़ेंगे दिव्यांगजन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में व्यापक स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि पेंशन और सरकारी लाभों से वंचित रह गए वास्तविक पात्र दिव्यांगजनों को तुरंत योजनाओं से जोड़ा जा सके। राज्य में अब तक 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को डिजिटल पहचान प्रदान करते हुए यूडीआईडी (UDID) कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
केवल पेंशन तक सीमित न रहकर दिव्यांगजनों को उद्यमी और स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार उन्हें 'सीएम युवा', 'पीएम स्वनिधि', 'ओडीओपी' (एक जिला एक उत्पाद), 'पीएम विश्वकर्मा' और 'मुद्रा योजना' जैसी स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ रही है। सीएम ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र 'अयोग्यो पुरुषो नास्ति' है, यानी कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज का एक आत्मनिर्भर और सशक्त अंग बनाना है।
'प्रतिभा को दया नहीं अवसर चाहिए': पैरा-एथलीटों की सफलता का दिया उदाहरण
संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौतियां कभी भी मानवीय प्रतिभा और सफलता के आड़े नहीं आ सकतीं। प्रतिभा को किसी की दया की नहीं, बल्कि सही अवसर और प्लेटफॉर्म की आवश्यकता होती है। उन्होंने पौराणिक काल के महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास और प्रसिद्ध संगीतकार रवींद्र जैन का उदाहरण दिया।
इसके साथ ही उन्होंने एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा और पैरालंपिक खेलों में देश का तिरंगा लहराने वाले एथलीटों—दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र झाझड़िया, भाविना पटेल और प्रवीण कुमार का विशेष उल्लेख किया। सीएम ने कहा कि इन जांबाज खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि पदक केवल बाहुबल से नहीं, बल्कि अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प से जीते जाते हैं। राज्य सरकार हर कदम पर ऐसे सभी प्रतिभावान नागरिकों के साथ पूरी ताकत से खड़ी है।