'कब तक बनेंगे सहबाला': दिल्ली में प्रदर्शन की तस्वीर पर ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज

'कब तक बनेंगे सहबाला': दिल्ली में प्रदर्शन की तस्वीर पर ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज

उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग का स्तर हर गुजरते दिन के साथ और ज्यादा तीखा तथा आक्रामक होता जा रहा है। विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के तहत नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित किए गए संयुक्त विरोध प्रदर्शन की एक तस्वीर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया बवंडर खड़ा हो गया है। योगी सरकार में पंचायती राज एवं अल्पसंख्यक कल्याण कैबिनेट मंत्री तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने इस तस्वीर को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे करारा राजनीतिक हमला बोला है। राजभर ने सपा सुप्रीमो की राजनीतिक हैसियत और गठबंधन में उनके कद पर सवाल उठाते हुए दो टूक कहा कि अखिलेश यादव दूसरों की सियासी बारात में सिर्फ सहबाला बनकर घूम रहे हैं और उनकी अपनी कोई स्वतंत्र धुरी अब नहीं बची है। राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के सियासी गलियारों तक राजभर के इस तीखे बयान ने भारी हलचल पैदा कर दी है।

दूल्हा के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा: राजभर ने कसा अनोखा देसी तंज

सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर दिल्ली प्रदर्शन की तस्वीर साझा करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने ठेठ देसी और व्यंग्यात्मक अंदाज में अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में 'ठगबंधन' के मतलबी दोस्तों ने अखिलेश यादव की असली राजनीतिक हैसियत सबके सामने लाकर रख दी है। राजभर ने अखिलेश के चेहरे के हाव-भाव और भीड़ में उनकी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है मानो उन्हें किसी बारात वाले ट्रैक्टर पर जबरदस्ती ठूंस दिया गया हो। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि अखिलेश यादव विपक्षी नेताओं के हुजूम में ऐसे नजर आ रहे हैं जैसे दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा हों। राजभर ने कहा कि जो समाजवादी कार्यकर्ता और समर्थक कल तक अखिलेश को 'अवतारी भैया जी' बताते नहीं थकते थे, आज वही समर्थक अपने नेता को दिल्ली की सियासी भीड़ में गुम और दरकिनार होते देखकर हैरान हैं।

कुर्सी की चाहत और दरी बिछाने की मजबूरी: राहुल गांधी की छत्रछाया पर घेरा

सुभासपा प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में खुद को सबसे बड़ा विपक्षी क्षत्रप बताने वाले अखिलेश यादव दिल्ली के दरबार में सिर्फ पिछलग्गू बनकर रह गए हैं। राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अखिलेश जी मन में तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी की प्रबल ख्वाहिश पाले बैठे हैं, लेकिन दिल्ली में उन्हें केवल दरी बिछाने का काम मिल रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन की पूरी नैया की पतवार अब 'बड़के भैया राहुल जी' के हाथ में जा चुकी है और अखिलेश यादव केवल उनके पीछे-पीछे चलने को मजबूर हैं। राजभर ने सवाल उठाया कि जब फैसले और नेतृत्व का अधिकार दिल्ली के नेताओं के पास है, तो फिर सपा कार्यकर्ताओं को दिखाए जा रहे बड़े सपनों का क्या औचित्य रह जाता है।

यूपी में चुनाव और दिल्ली की दौड़: राजभर ने चेताया- मतलबी दोस्तों से मिलेगा सिर्फ तिरस्कार

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के रणनीतिक फैसलों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में विधान परिषद और विधानसभा उपचुनावों की रणभेरी बजी हुई है, लेकिन सपा प्रमुख दिल्ली की सड़कों पर भागदौड़ कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, "और जाइए भाग-भाग के दिल्ली, करा लिए न घनघोर बेइज्जती? आप भी गजब करते हैं, चुनाव यूपी में है और आप दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं! दूसरों की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?" राजभर ने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि दिल्ली के यह मतलबी सहयोगी केवल अपने चुनावी स्वार्थ के लिए समाजवादी पार्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं और अंत में उन्हें तिरस्कार के सिवाय कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने आगाह किया कि जिस तरह अखिलेश यादव दिल्ली की भीड़ में अपनी पहचान खोते दिख रहे हैं, उसी तरह उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में भी विपक्षी खेमे के भीतर उनका वजूद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

'सत्ताइस में सपा साफ': 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर की बड़ी भविष्यवाणी

अपने इस तीखे और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हमले के अंत में ओम प्रकाश राजभर ने वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव को लेकर बड़ा दावा कर दिया। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक चाल-चलन और दिशाहीनता को देखकर यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि 'सत्ताइस में सपा साफ' होने जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता और खासकर पिछड़ा, दलित और वंचित वर्ग अब सपा के बहकावे में आने वाला नहीं है। राजभर ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एनडीए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कानून-व्यवस्था के दम पर भाजपा गठबंधन 2027 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगा, जबकि समाजवादी पार्टी अपने बिखरते कुनबे और गलत सियासी तालमेल की वजह से हाशिए पर सिमट कर रह जाएगी।

कभी हमसफर रहे राजभर और अखिलेश: क्यों इतनी कड़वी हो गई सियासी दुश्मनी?

उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव का रिश्ता हमेशा से ऐसा नहीं था। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं ने एक साथ मंच साझा किया था और पूर्वांचल में भाजपा के खिलाफ आक्रामक गठबंधन बनाया था। उस चुनाव में गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर और बलिया जैसे जिलों में सपा-सुभासपा गठबंधन ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, चुनाव नतीजों के कुछ ही महीनों बाद दोनों नेताओं के बीच तल्खी इतनी बढ़ी कि गठबंधन बिखर गया और राजभर ने अखिलेश पर एसी कमरों की राजनीति करने का आरोप लगाकर अपना रास्ता अलग कर लिया। इसके बाद राजभर दोबारा भाजपा नीत एनडीए का हिस्सा बने और योगी मंत्रिमंडल में शामिल हुए। तब से लेकर आज तक राजभर लगातार अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल उठाते रहे हैं और अति-पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाकर सपा की कमजोर नब्ज पर वार करते रहते हैं।

पूर्वांचल के अति-पिछड़ा वोट बैंक पर कब्जे की जंग: 2027 की बिसात पर दोनों आमने-सामने

राजभर के इस ताजा बयान के पीछे सिर्फ एक तस्वीर पर तंज कसना नहीं है, बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूर्वांचल का अति-पिछड़ा सामाजिक गणित साधने की सोची-समझी रणनीति है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के दर्जनों विधानसभा क्षेत्रों में राजभर, चौहान, बिंद, मल्लाह, निषाद और पाल जैसी गैर-यादव जातियां चुनावी नतीजों को पलटने की ताकत रखती हैं। समाजवादी पार्टी जहां संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर इन वर्गों को अपने पाले में खींचने की कोशिश कर रही है, वहीं ओम प्रकाश राजभर लगातार यह संदेश देने में जुटे हैं कि सपा का मतलब केवल एक विशेष परिवार और जाति का उत्थान है। राजभर के इस हमले ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को बैकफुट पर ला दिया है, जबकि भाजपा गठबंधन इसे विपक्ष के अंदरूनी अंतर्विरोध और नेतृत्वहीनता के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहा है।