संविदाकर्मियों के समर्थन में उतरीं मायावती: योगी सरकार से टेंपरेरी को परमानेंट करने की मांग
उत्तर प्रदेश में संविदा, आउटसोर्सिंग और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस बार अस्थायी कर्मचारियों के समर्थन में मोर्चा खोलते हुए योगी सरकार के सामने बड़ी मांग रख दी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आगामी छह महीनों के भीतर एक लाख सरकारी नौकरियां देने के बड़े ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि नई भर्तियों के साथ-साथ यह और भी बेहतर होता कि विभिन्न सरकारी महकमों में वर्षों से अल्प मानदेय पर काम कर रहे अस्थायी व संविदा कर्मचारियों को स्थायी सेवा में शामिल किया जाता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सरकारी तंत्र के भीतर संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए काम कराने के मॉडल को कर्मचारियों के लिए 'शोषणकारी व्यवस्था' करार दिया है।
1 लाख सरकारी नौकरियों के ऐलान पर सवाल, वर्षों से कार्यरत कर्मियों की अनदेखी का आरोप
हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं के लिए मिशन मोड में छह महीने के अंदर 1 लाख पारदर्शी और निष्पक्ष सरकारी नौकरियां देने का खाका खींचा है। इस घोषणा को आगामी चुनावी समीकरणों और युवाओं को साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मायावती ने सरकार की इस योजना पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब तक उन कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जाता, जो पिछले कई सालों से विभागों की रीढ़ बने हुए हैं, तब तक रोजगार नीति को पूरी तरह न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उनका तर्क है कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया में इन अनुभवी अस्थायी कार्मिकों को प्राथमिकता देकर या समायोजन नीति बनाकर सीधे स्थायी कैडर में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनके वर्षों के अनुभव और सेवा का सम्मान हो सके।
लखनऊ ईको गार्डन में धरना दे रहे NRHM संविदाकर्मियों की मांगों का उठाया मुद्दा
मायावती ने अपने बयान में विशेष तौर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के तहत काम करने वाले हजारों स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन का मजबूती से जिक्र किया। राजधानी लखनऊ के मान्यवर श्री कांशीराम जी ईको गार्डेन में पिछले कई दिनों से एनआरएचएम संविदा कर्मचारी अपने नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांगों को लेकर अनवरत धरने पर बैठे हुए हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि कोरोना महामारी जैसी भीषण आपदा से लेकर प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुचारू रखने में इन स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में होने वाली स्थायी नियुक्तियों के क्रम में इन सभी अनुभवी संविदा कर्मियों को विभाग में विधिवत नियमित किया जाना चाहिए।
आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के खिलाफ मुखर हुई बसपा, शोषणकारी व्यवस्था बताया
सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के बढ़ते चलन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही इस व्यवस्था के सख्त खिलाफ रही है। ठेका प्रथा में काम करने वाले कर्मचारियों को न तो सेवा की सुरक्षा मिलती है, न ही समय पर उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्राप्त होते हैं। बिचौलियों और निजी एजेंसियों के माध्यम से युवाओं का श्रम शोषण किया जा रहा है। मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की स्पष्ट सोच है कि सरकारी विभागों में स्वीकृत रिक्त पदों पर केवल नियमित और सम्मानजनक वेतनमान वाली नियुक्तियां ही होनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय न बने।
चुनावी बिसात पर कर्मचारियों की गोलबंदी, क्या रुख अपनाएगी योगी सरकार?
उत्तर प्रदेश के आगामी सियासी संग्राम से पहले संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का मुद्दा एक बड़ा वोट बैंक माना जा रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, ऊर्जा और नगर निगमों जैसे तमाम विभागों में लाखों कर्मचारी संविदा के आधार पर कार्यरत हैं। विपक्ष लगातार इन कर्मचारियों के नियमितीकरण और पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी कर रहा है। मायावती द्वारा इस मांग को आक्रामक तरीके से उठाए जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार आगामी भर्ती प्रक्रिया में इन संविदा कर्मियों के लिए कोई विशेष वरीयता या नियमितीकरण की नीति लाती है या फिर इस पर सियासी टकराव और तेज होगा।