मुंबई के इन्फ्लुएंसर फैजान ने कोर्ट से मांगी मुस्कान की बेटी राधा की कस्टडी, बोले- 'परवरिश और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार'

मुंबई के इन्फ्लुएंसर फैजान ने कोर्ट से मांगी मुस्कान की बेटी राधा की कस्टडी, बोले- 'परवरिश और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार'

चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मुस्कान की मासूम बेटी 'राधा' की कानूनी कस्टडी (अभिभावकत्व) की मांग की है। फैजान ने अदालत में औपचारिक याचिका दायर कर यह अपील की है कि बच्ची को उनके सुपुर्द किया जाए, ताकि वह उसे एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर भविष्य दे सकें। फैजान ने अदालत को दिए अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वे बच्ची के भरण-पोषण, विश्वस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं और इसके लिए किसी भी कानूनी शर्त का पालन करने के लिए तैयार हैं।

'मासूम का कोई दोष नहीं, बेहतर परवरिश का हकदार है बच्चा': फैजान का तर्क

याचिका दायर करने के बाद मीडिया से बातचीत में फैजान अंसारी ने कहा कि किसी भी पारिवारिक या सामाजिक विवाद में सबसे बड़ा खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा, "राधा एक बेहद मासूम बच्ची है जिसका किसी भी विवाद या परिस्थितियों से कोई लेना-देना नहीं है। मैं चाहता हूं कि उसे एक सुरक्षित माहौल मिले, जहां वह बिना किसी सामाजिक लांछन या तनाव के सामान्य बच्चों की तरह बड़ी हो सके। मैं उसकी परवरिश एक पिता और अभिभावक की तरह करने के लिए तैयार हूं। वह जिस स्कूल में पढ़ना चाहेगी, उसकी पूरी फीस और जीवनयापन का सारा खर्च उठाने के लिए मैं कानूनी रूप से प्रतिबद्ध हूं।"

कानूनी प्रक्रिया और कस्टडी की पेचीदगियां: क्या कहता है कानून?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा किसी बच्चे की कस्टडी मांगना बेहद जटिल और सख्त कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आता है। 'गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट' (Guardians and Wards Act) और 'जुवेनाइल जस्टिस एक्ट' (JJ Act) के तहत अदालत हमेशा 'बच्चे के सर्वोत्तम हित' (Welfare of the Child) को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। अदालत सबसे पहले यह देखती है कि क्या बच्चे के माता-पिता या प्रथम रक्त संबंधी (दादा-दादी, नाना-नानी या अन्य नजदीकी रिश्तेदार) उसकी देखभाल करने में सक्षम हैं या नहीं। जब तक कानूनी अभिभावक पूरी तरह अयोग्य, अनिच्छुक या अनुपस्थित न पाए जाएं, तब तक किसी गैर-संबंधी को कस्टडी मिलना बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही संभव होता है। इसके अलावा, एडॉप्शन रेगुलेशंस (CARA) की गाइडलाइंस का पालन भी अनिवार्य होता है।

सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक तेज हुई चर्चा

फैजान अंसारी की इस अर्जी के बाद सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में बहस छिड़ गई है। जहां एक वर्ग इसे इंसानियत और बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिहाज से उठाया गया एक साहसिक कदम बता रहा है, वहीं कई लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट या कानूनी दांवपेच के रूप में भी देख रहे हैं। अदालत अब इस मामले में बाल कल्याण समिति (CWC) और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुन सकती है, जिसके बाद ही मासूम राधा के भविष्य और कस्टडी पर कोई औपचारिक फैसला लिया जाएगा।