सपा के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों पर ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर सीधा वार

सपा के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों पर ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर सीधा वार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्थानीय सांसद अखिलेश यादव के गृह क्षेत्र कन्नौज में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान खाली पड़ी कुर्सियों का मामला अब उत्तर प्रदेश की सियासत में तूल पकड़ता जा रहा है। कार्यक्रम में भीड़ न जुटने के चलते अखिलेश यादव द्वारा जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत पूरी जिला कमेटी को भंग किए जाने के बाद सत्ताधारी एनडीए गठबंधन सपा पर पूरी तरह हमलावर हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को सीधे आड़े हाथों लेते हुए तीखा प्रहार किया है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि जिस कन्नौज को अखिलेश अपना अजेय किला मानते थे, उसी कन्नौज की जनता और कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन में न पहुंचकर सपा और उनके तथाकथित 'पीडीए' की असली सियासी हैसियत दिखा दी है।

'जब घर में ही कोई सुनने वाला नहीं, तो प्रदेश में क्या दावा करेंगे': राजभर

पत्रकारों से बातचीत करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने अपने जाने-पहचाने चुटीले और आक्रामक अंदाज में कहा कि अखिलेश यादव पूरे प्रदेश में घूम-घूम कर पीडीए का ढोल पीट रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र में जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल भाषण देने पहुंचते हैं, तो उनके सामने सिर्फ खाली कुर्सियां बिछी मिलती हैं। राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा, "जब आपके अपने घर कन्नौज में सौ-पचास लोग आपकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं, तो 2027 में सरकार बनाने के मुंगेरीलाल के हसीन सपने कैसे देख रहे हैं? जनता और पीडीए समाज अब जान चुका है कि सपा के पास केवल वोट लेने का ड्रामा है, हक और हिस्सेदारी देने की नीयत नहीं।"

'पदाधिकारियों की बलि चढ़ाकर अपनी नाकामी छुपा रहे अखिलेश'

कन्नौज जिला कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों को भंग करने के अखिलेश यादव के फैसले पर भी राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुर्सियां खाली रहने पर अपनी राजनीतिक विफलता का ठीकरा बेचारे जिलाध्यक्ष और स्थानीय कार्यकर्ताओं पर फोड़ दिया गया। राजभर ने कहा, "गलती नीति और नीयत की है, और सजा कार्यकर्ताओं को दी जा रही है। कार्यकर्ताओं को बलि का बकरा बनाकर अखिलेश यादव अपनी गिरती लोकप्रियता को नहीं छुपा सकते। जब नेता जनता से कट जाता है, तो कुर्सियां ऐसे ही खाली रहती हैं।" उन्होंने दावा किया कि पिछड़ा और दलित समाज अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कल्याणकारी नीतियों के साथ मजबूती से खड़ा है।

एनडीए के तमाम नेताओं के निशाने पर आया कन्नौज का सम्मेलन

कन्नौज में खाली कुर्सियों का यह दृश्य सामने आने के बाद से ही भाजपा और एनडीए के नेता लगातार सपा को घेर रहे हैं। योगी सरकार के मंत्री असीम अरुण और पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के हमलों के बाद अब ओम प्रकाश राजभर के इस तीखे बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। राजभर ने दोहराया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने संविधान और आरक्षण के नाम पर जनता में जो भ्रम फैलाया था, उसकी हवा अब निकल चुकी है। राजभर के मुताबिक, कन्नौज की यह घटना कोई सामान्य संगठनात्मक चूक नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर सपा का जनाधार तेजी से खिसक रहा है।

2027 से पहले ओबीसी-दलित वोटों पर खींचतान तेज

ओम प्रकाश राजभर का यह हमला उत्तर प्रदेश में गैर-यादव ओबीसी और अति-दलित मतों पर चल रही वर्चस्व की लड़ाई का भी हिस्सा है। जहां एक तरफ अखिलेश यादव सैनी, कश्यप, बिंद और मल्लाह जैसी जातियों के क्षत्रपों को जोड़कर 2027 की बिसात बिछा रहे हैं, वहीं राजभर लगातार यह संदेश देने में जुटे हैं कि सपा का पीडीए केवल एक छलावा है। कन्नौज में लगे इस राजनीतिक झटके के बाद सपा जहां संगठन की ओवरहॉलिंग में जुट गई है, वहीं एनडीए इसे आगामी चुनावों में सपा के खिलाफ एक मजबूत मनोवैज्ञानिक हथियार बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।