आजम खान की पत्नी से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य: 45 मिनट चली बैठक, योगी सरकार पर बरसे

आजम खान की पत्नी से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य: 45 मिनट चली बैठक, योगी सरकार पर बरसे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार देर रात रामपुर पहुंचे और उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के आवास पर जाकर उनकी पत्नी व पूर्व सांसद डॉ. तंजीन फातिमा से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात करने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य के अचानक आजम खान के घर पहुंचने से प्रदेश के सियासी गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब हुए मौर्य ने योगी और मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा और बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया।

'योगी और मोदी के पाप का घड़ा भर चुका है, अब विदाई का वक्त'

मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। मौर्य ने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत विद्वेष और बदले की भावना से विरोधियों को निशाना बनाना लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आजम खान और उनके परिवार के साथ जिस तरह का अमानवीय सलूक किया जा रहा है, वह भाजपा के तानाशाही रवैये को उजागर करता है। छोटे-छोटे मुकदमों में वरिष्ठ नेता को लंबे समय तक जेल में रखना सरासर अन्याय है। मौर्य ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकारों के पाप का घड़ा अब पूरी तरह भर चुका है और जनता के आक्रोश को देखते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता से विदाई तय है।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, बताया 'भाजपा का एजेंट'

स्वामी प्रसाद मौर्य ने चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक उच्च संवैधानिक पद की गरिमा के विपरीत काम कर रहे हैं। मौर्य ने कहा कि जिस तरह से सत्तारूढ़ दल के नेता चुनाव आयोग का खुलकर बचाव करते हैं, उससे यह साफ झलकता है कि संस्था निष्पक्ष न रहकर भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के डिप्टी सीएम के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि दूसरों को नसीहत देने से पहले नेताओं को खुद धरातल पर काम करके उदाहरण पेश करना चाहिए।

मुलाकात को बताया शिष्टाचार भेंट, तंजीन फातिमा ने टिकट की खबरों को नकारा

राजनीतिक अटकलों पर जवाब देते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि उनकी रामपुर यात्रा पूरी तरह पारिवारिक और शिष्टाचार पर आधारित थी। वह केवल आजम खान की बेगम तंजीन फातिमा, बेटे अदीब और परिवार का कुशलक्षेम जानने पहुंचे थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही जेल में बंद आजम खान से भी मुलाकात करने जा सकते हैं।

दूसरी ओर, डॉ. तंजीन फातिमा ने भी साफ किया कि मौर्य उनके परिवार का हाल जानने आए थे। अखिलेश यादव से अपनी हालिया मुलाकात और 15 सीटों के टिकट मांगने की खबरों को खारिज करते हुए तंजीन फातिमा ने कहा कि वे केवल निजी मसलों को लेकर मिली थीं। उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव या टिकट को लेकर अभी कोई विचार नहीं है, उनका पहला और एकमात्र मकसद आजम खान और बेटे अब्दुल्ला को जेल से बाहर निकालना है।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रामपुर पहुंचने के सियासी मायने

स्वामी प्रसाद मौर्य की इस मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं मान रहे हैं। कुछ ही दिन पहले मौर्य ने दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात कर 'इंडिया' गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया था। वहीं, दूसरी तरफ आजम खान खेमे और समाजवादी पार्टी नेतृत्व के बीच अंदरूनी खींचतान की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रूहेलखंड के कद्दावर मुस्लिम चेहरे आजम खान के परिवार से मौर्य की यह 45 मिनट की मुलाकात सपा के मुस्लिम-ओबीसी वोट बैंक और कांग्रेस के नए चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखी जा रही है।