एयर फ्रांस ने उठाया बड़ा कदम, पाकिस्तानी और मुस्लिम केबिन क्रू को इजरायल जाने वाली फ्लाइटों से हटाया

एयर फ्रांस ने उठाया बड़ा कदम, पाकिस्तानी और मुस्लिम केबिन क्रू को इजरायल जाने वाली फ्लाइटों से हटाया

अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं और हालिया संवेदनशील घटनाओं के मद्देनजर फ्रांस की प्रमुख विमानन कंपनी 'एयर फ्रांस' (Air France) ने एक बड़ा और अभूतपूर्व नीतिगत फैसला लिया है। फ्लाईदुबई के विमान में हाल ही में सामने आई गंभीर सुरक्षा चूक और कॉकपिट से जुड़े घटनाक्रमों के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सुरक्षा मानकों की नए सिरे से समीक्षा शुरू हो गई है। इसी कड़ी में एयर फ्रांस ने इजरायल (तेल अवीव) के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए संचालित होने वाली अपनी सभी उड़ानों के चालक दल (केबिन क्रू) की तैनाती में व्यापक बदलाव कर दिया है। एयरलाइन प्रबंधन ने परिचालन सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता का हवाला देते हुए पाकिस्तानी मूल के केबिन क्रू सदस्यों और मुस्लिम क्रू मेंबर्स को इजरायल जाने वाली उड़ानों के रोस्टर से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। पेरिस से तेल अवीव तक इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय विमानन और मानवाधिकार हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।

तेल अवीव रूट पर सख्त प्रोटोकॉल: संवेदनशील पृष्ठभूमि वाले क्रू की तैनाती रोकी गई

एयरलाइन सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम तेल अवीव रूट पर उड़ान भरने वाले विमानों की आंतरिक सुरक्षा को अचूक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव और इजरायल-हमास संघर्ष के बाद से ही तेल अवीव जाने वाले अंतरराष्ट्रीय विमानों पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर रही है। फ्लाईदुबई की उड़ान में चालक दल के भीतर सामने आई अप्रत्याशित परिस्थितियों और तकनीकी-सुरक्षा जांच के बाद एयर फ्रांस की आंतरिक सुरक्षा इकाई ने एक जोखिम विश्लेषण रिपोर्ट तैयार की। इस आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि पाकिस्तानी पासपोर्ट या पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ विशेष मुस्लिम बहुल देशों से संबंध रखने वाले क्रू मेंबर्स को इजरायली सुरक्षा एजेंसियों (शिन बेट और एयरपोर्ट सिक्योरिटी) द्वारा तेल अवीव में अत्यधिक पूछताछ, हिरासत और सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ता है। उड़ान के संचालन में देरी से बचने और चालक दल के भीतर किसी भी संभावित आंतरिक सुरक्षा जोखिम को पूरी तरह टालने के लिए एयरलाइन ने इस रूट पर केवल यूरोपीय और गैर-संवेदनशील पृष्ठभूमि वाले स्टाफ को ही तैनात करने का निर्णय लिया है।

इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के कड़े नियम और इमिग्रेशन चुनौतियां भी बनीं वजह

इस फैसले के पीछे केवल एयरलाइन का आंतरिक निर्णय ही नहीं, बल्कि इजरायल के बेहद सख्त आव्रजन और राष्ट्रीय सुरक्षा नियम भी एक बड़ा कारक बने हैं। इजरायल उन देशों के नागरिकों या दोहरी नागरिकता वाले व्यक्तियों के प्रवेश पर बेहद कड़े प्रतिबंध लागू करता है, जिनके साथ उसके औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो इजरायल को मान्यता नहीं देते और पाकिस्तानी पासपोर्ट पर स्पष्ट लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है। पूर्व में भी जब विदेशी एयरलाइनों के पाकिस्तानी मूल के क्रू मेंबर तेल अवीव पहुंचते थे, तो उन्हें हवाई अड्डे के ट्रांजिट लाउंज या सुरक्षा जांच केंद्रों पर घंटों तक कड़े सवालों का सामना करना पड़ता था। कभी-कभी उन्हें विमान से नीचे उतरने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी। फ्लाईदुबई की घटना के बाद इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने सभी विदेशी एयरलाइनों को निर्देश जारी किए थे कि वे अपनी उड़ानों में सुरक्षा क्लीयरेंस वाले स्टाफ को ही भेजें, जिसके बाद एयर फ्रांस ने किसी भी कानूनी या परिचालन विवाद से बचने के लिए यह कदम उठाया।

एविएशन यूनियनों और मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश: भेदभाव के लगे आरोप

एयर फ्रांस के इस कदम के सामने आते ही एयरलाइन यूनियनों और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। फ्रांस के विभिन्न केबिन क्रू संगठनों (एसएनपीएनसी और यूनैक) ने प्रबंधन के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा है कि किसी भी कर्मचारी को उसकी राष्ट्रीयता, धर्म या जातीय पृष्ठभूमि के आधार पर ड्यूटी रोस्टर से अलग करना श्रम कानूनों और फ्रांसीसी गणराज्य के समानता के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। यूनियनों का तर्क है कि कर्मचारियों को सुरक्षा जांच और कड़े प्रोटोकॉल के दायरे में रखा जाना समझ में आता है, लेकिन धर्म या मूल देश के आधार पर पूरी श्रेणी को किसी विशेष गंतव्य से प्रतिबंधित करना अस्वीकार्य भेदभाव है। वहीं दूसरी ओर, एयरलाइन प्रबंधन ने सफाई दी है कि यह कोई स्थायी या भेदभावपूर्ण नीति नहीं है, बल्कि उड़ान संचालन की निरंतरता, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल और चालक दल की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया एक तात्कालिक प्रशासनिक फैसला है।

वैश्विक एविएशन पर फ्लाईदुबई घटना का व्यापक असर: अन्य एयरलाइंस भी सतर्क

फ्लाईदुबई के विमान में पायलट और सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने पूरी दुनिया की एयरलाइंस को अपने इंटरनल रिस्क असेसमेंट सिस्टम को दोबारा जांचने पर मजबूर कर दिया है। यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों की कई विमानन कंपनियां अब अपने पायलटों और केबिन क्रू के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, मानसिक स्वास्थ्य आकलन और संवेदनशील रूट्स पर ड्यूटी असाइनमेंट की नए सिरे से ऑडिटिंग कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के सुरक्षा मानकों के तहत अब क्रू मेंबर्स के सुरक्षा क्लीयरेंस को और अधिक पारदर्शी और सख्त बनाया जा रहा है। एयर फ्रांस द्वारा उठाया गया यह कदम यह साफ दर्शाता है कि आज के दौर में भू-राजनीतिक संकट और सुरक्षा घटनाएं न केवल यात्रियों के आवागमन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि विमान के कॉकपिट और केबिन के भीतर काम करने वाले पेशेवरों के रोस्टर और करियर पर भी सीधा असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और फ्रांसीसी श्रम अदालतें इस तरह के प्रतिबंधात्मक फैसलों पर क्या कानूनी रुख अपनाती हैं।