समंदर में रोज 100 युद्धपोत उतार रहा चीन, अमेरिका से 35% बड़ा हुआ नौसैनिक बेड़ा; पेंटागन की उड़ी नींद

समंदर में रोज 100 युद्धपोत उतार रहा चीन, अमेरिका से 35% बड़ा हुआ नौसैनिक बेड़ा; पेंटागन की उड़ी नींद

दशकों तक दुनिया के महासागरों पर निर्विवाद दबदबा कायम रखने वाली अमेरिकी नौसेना (US Navy) के सामने अब तक की सबसे बड़ी सामरिक चुनौती खड़ी हो चुकी है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) ने वैश्विक जलक्षेत्र में अपनी उपस्थिति को इस कदर आक्रामक बना दिया है कि हर रोज करीब 100 युद्धपोत और नौसैनिक जहाज खुले समंदर में लगातार गश्त कर रहे हैं। रक्षा और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन अब केवल अपनी तटरेखा की रक्षा करने वाली क्षेत्रीय 'ग्रीन-वॉटर' नेवी नहीं रह गया है, बल्कि वह लंबी दूरी और गहरे समुद्र में महीनों तक तैनात रहने वाली संपूर्ण 'ब्लू-वॉटर' नौसेना बन चुका है। ताइवान जलडमरूमध्य, रणनीतिक रूप से संवेदनशील दक्षिण चीन सागर, पश्चिमी प्रशांत महासागर और अदन की खाड़ी तक चीनी युद्धपोतों की दैनिक मौजूदगी ने वाशिंगटन और पेंटागन के योजनाकारों की नींद उड़ा दी है।

अमेरिका से 35% बड़ा हुआ जहाजों का बेड़ा: 400 के पार पहुंची संख्या

संख्या बल के लिहाज से देखें तो चीनी नौसेना आज दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' और अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के हालिया आंकड़ों के मुताबिक:

  • संख्यात्मक बढ़त: चीनी नौसेना के पास सक्रिय युद्धपोतों और प्रमुख जहाजों की संख्या 400 के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो अमेरिकी नौसेना के कुल एक्टिव फ्लीट (लगभग 290-300 जहाज) से लगभग 35 प्रतिशत अधिक है।

  • जहाज निर्माण की रफ्तार: चीन की विशाल औद्योगिक शिपयार्ड क्षमता अमेरिका के मुकाबले कई गुना तेज है। शंघाई के पास चांगक्सिंग द्वीप जैसे विशाल शिपबिल्डिंग हब से आधुनिक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर (जैसे टाइप 055 और टाइप 052D), फ्रिगेट्स और एम्फीबियस असॉल्ट शिप्स रिकॉर्ड समय में बनकर सीधे पानी में उतारे जा रहे हैं।

  • आधुनिक हथियारों से लैस: यह विस्तार केवल संख्या तक सीमित नहीं है; इन नए जहाजों में लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइलें, अत्याधुनिक रडार सिस्टम और स्टील्थ क्षमताएं मौजूद हैं, जो विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) जैसे बड़े अमेरिकी युद्धपोतों को दूर से ही निशाना बना सकती हैं।

ताइवान, जापान और फिलीपींस पर चौतरफा घेराबंदी

चीनी युद्धपोतों की यह भारी और अनवरत तैनाती इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के लिए सीधा संकट बनती जा रही है। हाल ही में ताइवान के रक्षा अधिकारियों ने मैप जारी कर दिखाया कि एक ही समय में चीन के 50 से अधिक जहाजों का एक विशाल बेड़ा फिलीपींस और ताइवान के संवेदनशील तटीय इलाकों के करीब युद्धाभ्यास कर रहा था। वहीं, जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी प्रशांत महासागर के ओसुमी जलडमरूमध्य से गुजरते चीनी युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर बैटलग्रुप को ट्रैक किया है। बीजिंग इन सभी गतिविधियों को अपना 'नियमित और वार्षिक प्रशिक्षण' बताता है, लेकिन अमेरिकी रक्षा कमांडरों का मानना है कि इस तरह लगातार 100 जहाजों को समुद्र में सक्रिय रखने का असली मकसद विरोधी को मनोवैज्ञानिक रूप से थकाना और ताइवान पर किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए 'क्विक-रिस्पांस' पोजिशन बनाए रखना है।

अमेरिकी नौसेना के सामने क्या है सबसे बड़ा संकट?

अमेरिकी सैन्य योजनाकारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि अमेरिका की नौसेना पूरे विश्व के महासागरों में बंटी हुई है (जैसे अटलांटिक, भूमध्य सागर, मध्य पूर्व और प्रशांत)। इसके विपरीत, चीन की नौसेना का 90 प्रतिशत से अधिक ध्यान विशेष रूप से पश्चिमी प्रशांत और इंडो-पैसिफिक पर केंद्रित है, जिससे स्थानीय स्तर पर चीन को संख्यात्मक और भौगोलिक रूप से भारी बढ़त मिल जाती है। इसके अलावा, अमेरिकी शिपयार्ड्स में रखरखाव और नए जहाजों के निर्माण में होने वाली लंबी देरी ने दोनों देशों के बीच नौसैनिक अंतर को और गहरा कर दिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने समंदर पर राज करने का जो रोडमैप तैयार किया है, उसने 21वीं सदी की महाशक्तियों की जंग को अब पूरी तरह से नीले समंदर के अखाड़े में ला खड़ा किया है।