दुनिया को 3 हिस्सों में बांटना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, हिलेरी क्लिंटन का पुतिन-जिनपिंग की सांठगांठ पर सनसनीखेज आरोप
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व फर्स्ट लेडी हिलेरी क्लिंटन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक नीति और अंतरराष्ट्रीय सोच पर कड़ा प्रहार करते हुए एक गंभीर आरोप लगाया है। क्लिंटन ने दावा किया कि ट्रंप की वास्तविक कूटनीतिक सोच दुनिया को तीन अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों (स्फेयर्स ऑफ इन्फ्लुएंस) में बांटने की है। इस विभाजनकारी फॉर्मूले के तहत एक हिस्से पर ट्रंप स्वयं अपना और अमेरिका का नियंत्रण रखना चाहते हैं, जबकि यूरोप और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हवाले करने की मंशा रखते हैं। वहीं शेष बची दुनिया पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अप्रत्यक्ष प्रभुत्व स्वीकार करने की तैयारी है। क्लिंटन ने इसे वैश्विक व्यवस्था, अमेरिकी नेतृत्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बेहद खतरनाक ब्लूप्रिंट करार दिया है।
पुतिन को यूरोप और जिनपिंग को शेष दुनिया सौंपने का आरोप
हिलेरी क्लिंटन के अनुसार, ट्रंप की यह कथित रणनीति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चले आ रहे नियम-आधारित वैश्विक ढांचे (Rules-Based International Order) को पूरी तरह नष्ट करने जैसी है। क्लिंटन ने आगाह किया कि ट्रंप हमेशा से मजबूत तानाशाही सोच वाले नेताओं के प्रति आकर्षित रहे हैं और वे शक्ति संतुलन की आड़ में पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों को हाशिए पर धकेलने का काम कर रहे हैं। यूरोप पर पुतिन के नियंत्रण को मौन स्वीकृति देने का सीधा मतलब यूक्रेन और पूर्वी यूरोपीय देशों की संप्रभुता को खतरे में डालना होगा। इसी तरह, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को चीनी प्रभाव के दायरे में छोड़ना वैश्विक व्यापार और लोकतंत्र के भविष्य के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
नाटो और पश्चिमी सहयोगियों को कमजोर करने की रणनीति पर सवाल
हिलेरी क्लिंटन ने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि ट्रंप के इस दृष्टिकोण से नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) और पश्चिमी देशों का मजबूत गठबंधन बिखर जाएगा। ट्रंप लंबे समय से नाटो सदस्य देशों पर सैन्य खर्च न बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं और गठबंधन की उपयोगिता पर सवाल खड़े करते रहे हैं। क्लिंटन का तर्क है कि अमेरिका के सहयोगी देश ही उसकी असली वैश्विक ताकत हैं। यदि अमेरिका इन ऐतिहासिक संधियों से पीछे हटता है और केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रहने की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर अड़ा रहता है, तो मॉस्को और बीजिंग को मनमानी करने की खुली छूट मिल जाएगी, जिससे शीत युद्ध के बाद बना रणनीतिक संतुलन पूरी तरह चरमरा जाएगा।
अमेरिकी राजनीति में नई भू-राजनीतिक बहस: वैश्विक नेतृत्व बनाम अलगाववाद
क्लिंटन का यह विस्फोटक बयान अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ और विदेश नीति के विमर्श में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ट्रंप समर्थक जहां उनकी नीतियों को 'नो मोर फॉरेन वॉर्स' यानी विदेशी युद्धों में अमेरिकी धन और सैनिकों की बर्बादी रोकने तथा शांति स्थापित करने वाला व्यावहारिक दृष्टिकोण बताते हैं, वहीं डेमोक्रेट्स और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अलगाववादी सोच केवल रूस और चीन के विस्तारवादी एजेंडे को मजबूत करेगी। क्लिंटन ने चेतावनी दी कि वैश्विक ताकतों के बीच दुनिया के इस मनमाने बंटवारे से संघर्ष खत्म नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में नए और बड़े क्षेत्रीय युद्धों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।