सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों के बीच मक्का डिफेंस कमेटी की इमरजेंसी मीटिंग, पाकिस्तान ने रियाद में बुलाई बैठक
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के ऊर्जा और नागरिक ठिकानों पर बढ़ते ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Makkah Joint Defence Agreement) के तहत रणनीतिक राजनीतिक-रक्षा समिति की एक आपात बैठक बुलाई है। यह उच्चस्तरीय बैठक अगले सप्ताह सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आयोजित की जाएगी, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष रणनीतिकार और रक्षा प्रतिनिधि शामिल होंगे।
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए इस आपातकालीन सत्र की पुष्टि की। उन्होंने साफ किया कि सऊदी अरब की संप्रभुता और पवित्र धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गठबंधन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सऊदी अरब के पश्चिमी व दक्षिणी इलाकों में हूतियों द्वारा किए गए ताजा हमलों के बाद तीनों सहयोगी देश अपनी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।
क्या है 'मक्का रक्षा समझौता' और क्यों इसे कहा जा रहा है 'इस्लामिक नाटो'?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल ही में अस्तित्व में आया 'मक्का रक्षा समझौता' एक त्रिपक्षीय सैन्य और रणनीतिक सुरक्षा संधि है। इस समझौते के मुख्य प्रावधानों के तहत किसी एक सदस्य देश पर हुए बाहरी हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषक इस त्रिपक्षीय गठबंधन को मध्य पूर्व में उभरता हुआ 'इस्लामिक नाटो' करार दे रहे हैं।
सऊदी अरब के मदीना प्रांत और बाबल-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के नजदीकी तटीय क्षेत्रों में हूती हमलों की हालिया घटनाओं ने इस रक्षा समझौते के अस्तित्व और उसकी प्रतिक्रिया क्षमता को सीधे तौर पर परख दिया है। हालांकि विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया कि समझौते को पूरी तरह से सक्रिय (Fully Operational) होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है, लेकिन रियाद में होने वाली इस आपात बैठक में त्वरित समन्वय और सऊदी अरब की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करने पर तत्काल फैसला लिया जाएगा।
सैन्य एक्शन बनाम कूटनीतिक संवाद: ईरान के सुझाव पर भी होगा मंथन
रियाद बैठक के एजेंडे को लेकर पाकिस्तान ने एक अहम कूटनीतिक पहलू भी उजागर किया है। विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि हाल ही में पाकिस्तान और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत के दौरान तेहरान की ओर से हूतियों के साथ एक राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान खोजने का अनौपचारिक सुझाव सामने आया था।
डार के अनुसार, ईरान की ओर से कोई ठोस लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया है, लेकिन यह दोनों विदेश मंत्रियों के बीच एक सकारात्मक 'ब्रेनस्टॉर्मिंग' का हिस्सा था। रियाद में जुटने वाली मक्का समिति इस बात पर विचार करेगी कि क्या हूतियों को सीधे सैन्य कार्रवाई (Kinetic Action) के जरिए जवाब दिया जाए या फिर ईरान की मध्यस्थता से राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशा जाए। पाकिस्तान की प्राथमिकता तनाव को क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से रोकना और साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा को अचूक बनाना है।
सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैन्य तैनाती और खाड़ी सुरक्षा पर असर
यमन के हूती विद्रोहियों के खतरे को देखते हुए पाकिस्तान पहले से ही सऊदी अरब में अपने सुरक्षा बलों और तकनीकी कर्मियों की उपस्थिति बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के अनुरोध पर पाकिस्तानी वायु रक्षा विशेषज्ञों, मिसाइल इंटरसेप्टर यूनिट्स और अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को संवेदनशील ठिकानों पर तैनात किए जाने की योजना पर भी विचार चल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हुए पाकिस्तान और तुर्की ने साफ किया है कि लाल सागर और फारस की खाड़ी के व्यापारिक समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की नाकेबंदी स्वीकार नहीं की जाएगी। रियाद की इस बैठक के नतीजों से तय होगा कि क्या 'मक्का संधि' के तहत मुस्लिम बहुल देशों की यह त्रिपक्षीय शक्ति हूती संकट में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करेगी या फिर मध्य पूर्व में कूटनीति का कोई नया फॉर्मूला आकार लेगा।