परमाणु युद्ध और आर्थिक मंदी के खौफ से रूस की ओर झुके डोनाल्ड ट्रंप? पुतिन के दूत ने मॉस्को-वाशिंगटन वार्ता को बताया ऐतिहासिक मोड़

परमाणु युद्ध और आर्थिक मंदी के खौफ से रूस की ओर झुके डोनाल्ड ट्रंप? पुतिन के दूत ने मॉस्को-वाशिंगटन वार्ता को बताया ऐतिहासिक मोड़

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल के दिनों में रूस के प्रति अपनाए गए अपेक्षाकृत लचीले रुख और ऊर्जा प्रतिबंधों में दी गई छूट के बाद मॉस्को के सत्ता गलियारों से अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष राजनयिक दूत ने दोनों महाशक्तियों के बीच बन रहे नए संवाद को रेखांकित करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति का 'ऐतिहासिक क्षण' करार दिया है। रूसी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख किसी अचानक उपजी सहानुभूति का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे टकराव से उपजे तीसरे विश्व युद्ध के जोखिम और वैश्विक ऊर्जा संकट से अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने की रणनीतिक विवशता का नतीजा है।

पुतिन के दूत का दावा: 'परमाणु टकराव और आर्थिक तबाही का डर बना निर्णायक वजह'

रूसी पक्ष की ओर से दिए गए बयानों के मुताबिक, वाशिंगटन को इस बात का स्पष्ट अहसास हो चुका है कि रूस को सैन्य या आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह अलग-थलग करने की नीति उलटी पड़ चुकी है। पुतिन के दूत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्लेषकों से बातचीत करते हुए संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन के रणनीतिकारों को दो सबसे बड़े खतरों ने अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया है:

  • परमाणु एस्केलेशन (Nuclear Escalation) की आशंका: मॉस्को द्वारा अपनी परमाणु नीति को अपडेट करने और रणनीतिक हथियारों की तैनाती के संकेतों ने वाशिंगटन में प्रत्यक्ष टकराव के जोखिम को लेकर खतरे की घंटी बजा दी थी। किसी भी प्रत्यक्ष नाटो-रूस टकराव का अंत वैश्विक तबाही के रूप में तय था, जिसे टालना अमेरिकी नेतृत्व की शीर्ष प्राथमिकता बन गया।

  • ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक मंदी: रूस पर कड़े प्रतिबंध थोपने के बावजूद वैश्विक तेल और गैस बाजार में मॉस्को की पकड़ को पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सका। अमेरिका में ईंधन की आसमान छूती कीमतों और यूरोप में औद्योगिक मंदी के चलते ट्रंप प्रशासन को समझ आ गया कि रूसी ऊर्जा आपूर्ति को अचानक रोकने से अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योग जगत को भारी आर्थिक झटका लगेगा।

'ग्राहम एक्ट' पर छूट और बातचीत की मेज पर वापसी के संकेत

हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा 'ग्राहम एक्ट' के तहत रूसी ऊर्जा खरीद पर लागू होने वाले दंडात्मक द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) को स्थगित करने का फैसला इसी नई रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मॉस्को इसे एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देख रहा है। रूसी राजनयिकों का तर्क है कि प्रतिबंधों की दीवार खड़ी करके शांति स्थापित नहीं की जा सकती; इसके लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे के सुरक्षा सरोकारों (Security Concerns) को सुनना होगा। ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति के तहत अंतहीन युद्धों में अमेरिकी डॉलर झोंकने के बजाय घरेलू अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देने की रणनीति ने भी रूस के साथ बैकचैनल कूटनीति का रास्ता खोला है।

यूरोप और यूक्रेन में बढ़ी असहजता: कूटनीतिक संतुलन की नई चुनौती

ट्रंप के इस रणनीतिक झुकाव और मॉस्को की ओर से इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताए जाने के बाद कीव और यूरोपीय राजधानियों में बेचैनी बढ़ गई है। यूक्रेन के नेतृत्व को डर है कि यदि अमेरिका और रूस के बीच सीधे द्विपक्षीय समझौते की राह बनती है, तो यूक्रेन को अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के कुछ हिस्सों पर समझौता करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। वहीं, यूरोपीय नाटो देशों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि वाशिंगटन अपने कदम पीछे खींचता है, तो वे यूक्रेन को सैन्य और वित्तीय सहायता अकेले दम पर कब तक जारी रख पाएंगे।

आगे की राह: क्या स्थायी शांति की ओर बढ़ेंगी दोनों महाशक्तियां?

रूसी दूत के अनुसार, आने वाले महीने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था की नई रूपरेखा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि मॉस्को और वाशिंगटन के बीच प्रत्यक्ष बातचीत का यह चैनल सक्रिय रहता है, तो युद्धविराम और यूक्रेन में सीमा निर्धारण को लेकर एक नया कूटनीतिक फॉर्मूला सामने आ सकता है। हालांकि, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में मौजूद दोनों दलों के युद्ध-समर्थक गुटों और नाटो के सख्त रुख को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रंप इस कूटनीतिक बदलाव को किस हद तक आगे ले जा पाते हैं।