पाकिस्तान में फिर भयंकर बवाल: इमरान खान की रिहाई को लेकर सड़कों पर उतरा जनसैलाब
पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और टकराव चरम सीमा पर पहुंच गया है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर हजारों की संख्या में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। शहबाज शरीफ सरकार और पीटीआई नेतृत्व के बीच बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने देश की राजधानी इस्लामाबाद की ओर बड़े पैमाने पर 'लॉन्ग मार्च' शुरू कर दिया है।
सड़कों पर उमड़े इस भारी हुजूम और संभावित हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी को पूरी तरह सील कर दिया है। कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें, पथराव और आंसू गैस के गोले दागे जाने की खबरें सामने आई हैं।
बातचीत टूटी, सड़कों पर शुरू हुआ शक्ति प्रदर्शन
प्रशासन और पीटीआई के शीर्ष नेताओं के बीच इस्लामाबाद में प्रस्तावित प्रदर्शन को टालने और किसी वैकल्पिक जगह पर रैली करने को लेकर बातचीत चल रही थी।
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मांगों पर अड़े समर्थक: पीटीआई कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि इमरान खान को झूठे और राजनीति से प्रेरित मामलों में कैद रखा गया है, इसलिए जब तक उनकी रिहाई और निष्पक्ष चुनावी जनादेश की वापसी नहीं होती, उनका यह मार्च नहीं रुकेगा।
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वार्ता विफल: सरकार की ओर से सख्त रुख अपनाने और खान की रिहाई पर कोई ठोस आश्वासन न मिलने के बाद बातचीत टूट गई, जिसके तुरंत बाद खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के विभिन्न हिस्सों से काफिले इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए।
कंटेनरों से सड़कें बंद, सेना और रेंजर्स तैनात
इस्लामाबाद प्रशासन ने राजधानी को किसी भी बड़े घेराव से बचाने के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं:
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रास्तों की नाकेबंदी: इस्लामाबाद को जोड़ने वाले प्रमुख मोटरवे और जीटी रोड पर भारी शिपिंग कंटेनर खड़े कर रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।
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डी-चौक और रेड जोन सील: संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री कार्यालय वाले अति-संवेदनशील इलाके 'रेड जोन' और डी-चौक की ओर जाने वाले रास्तों पर त्रि-स्तरीय कंटीले तारों और बैरिकेड्स की घेराबंदी की गई है।
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अर्धसैनिक बल और सेना: राजधानी की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान रेंजर्स और अतिरिक्त पुलिस बलों के साथ-साथ सेना की टुकड़ियों को भी अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू है और 4 से अधिक लोगों के एक जगह जुटने पर पूर्ण पाबंदी है।
जगह-जगह झड़पें, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बाधित
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी कंटेनरों और बैरिकेड्स को क्रेन व गाड़ियों से हटाने की कोशिश कर रहे हैं, पुलिस उन्हें रोकने के लिए लगातार वाटर कैनन और आंसू गैस के शेल छोड़ रही है।
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भीड़ को तितर-बितर करने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए रावलपिंडी और इस्लामाबाद के कई प्रमुख हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।
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दर्जनों स्थानीय पीटीआई कार्यकर्ताओं और नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया है।
सरकार बनाम इमरान खान: आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा गठबंधन सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान (एकेडमिक/एस्टैब्लिशमेंट) किसी भी सूरत में इमरान खान के समर्थकों को इस्लामाबाद के केंद्र में लंबा धरना देने की अनुमति नहीं देना चाहते। दूसरी ओर, पीटीआई का मानना है कि सड़क पर भारी दबाव बनाए बिना उनके नेता को कानूनी या कूटनीतिक राहत नहीं मिलने वाली।
यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर राजधानी के अंदर दाखिल होने में कामयाब होते हैं, तो पाकिस्तान एक बार फिर बड़े पैमाने पर राजनीतिक अराजकता और हिंसक टकराव की गिरफ्त में आ सकता है।