पाकिस्तान में दो वक्त की रोटी को तरसे लोग, भुखमरी की कगार पर पहुंचा एक और पड़ोसी मुल्क

पाकिस्तान में दो वक्त की रोटी को तरसे लोग, भुखमरी की कगार पर पहुंचा एक और पड़ोसी मुल्क

दक्षिण एशिया के कई देशों में खाद्य सुरक्षा (Food Security) और पोषण की स्थिति लगातार चिंताजनक स्तर पर पहुंचती जा रही है। हाल ही में जारी हुए ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI 2026) की ताजा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारत के पश्चिमी और पश्चिमोत्तर पड़ोसी मुल्क गंभीर भुखमरी और कुपोषण के भंवर में फंसते जा रहे हैं। आर्थिक बदहाली, आसमान छूती खाद्य महंगाई, जलवायु आपदाओं और राजनीतिक अस्थिरता के दोहरे थपेड़ों ने पाकिस्तान की आम जनता की थाली से बुनियादी भोजन भी छीन लिया है। वहीं, तालिबान शासित अफगानिस्तान में भी हालात इतने नाजुक हो चुके हैं कि वहां की एक बड़ी आबादी अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता पर निर्भर रहने को विवश है। 122 देशों की इस वैश्विक रैंकिंग में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का प्रदर्शन दक्षिण एशिया में सबसे खराब दर्ज किया गया है, जिसने क्षेत्रीय खाद्य संकट पर वैश्विक एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में 106वें पायदान पर फिसला पाकिस्तान

कंसर्न वर्ल्डवाइड (Concern Worldwide) और वेल्थुंगरहिल्फे (Welthungerhilfe) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान 122 देशों की सूची में 106वें स्थान पर आया है। 25.5 के हंगर स्कोर के साथ पाकिस्तान को 'गंभीर' (Serious) भुखमरी की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2000 में पाकिस्तान का स्कोर 36.2 था, जिसमें शुरुआती वर्षों में सुधार जरूर दिखा था, लेकिन 2018 के बाद से स्थिति तेजी से बिगड़ी है। पाकिस्तान की लगभग 16.1 प्रतिशत आबादी कुपोषण का शिकार है, यानी उन्हें दैनिक जीवन के लिए आवश्यक न्यूनतम कैलोरी भी नहीं मिल पा रही है।

बच्चों के कुपोषण और विकास दर पर मंडरा रहा गहरा संकट

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक आंकड़े बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को लेकर सामने आए हैं। पाकिस्तान में 5 वर्ष से कम उम्र के 33.6 प्रतिशत बच्चे 'स्टंटिंग' (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) का शिकार हैं, जो दीर्घकालिक गंभीर कुपोषण को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, 9.8 प्रतिशत बच्चे 'वेस्टिंग' (लंबाई के अनुपात में अत्यधिक कम वजन) से ग्रस्त हैं, जो तात्कालिक भुखमरी का प्रमाण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में 5.6 प्रतिशत की मृत्यु दर यह साबित करती है कि पोषण और स्वच्छ वातावरण के अभाव में बच्चों का जीवन संकट में है। आर्थिक तंगी के कारण गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पौष्टिक आहार न मिल पाना आने वाली पीढ़ियों के शारीरिक और मानसिक विकास को स्थायी रूप से प्रभावित कर रहा है।

पाकिस्तान में क्यों बिगड़े ऐसे हालात? महंगाई और विदेशी कर्ज की मार

पाकिस्तान में भुखमरी की इस विकराल स्थिति के पीछे कई ठोस संरचनात्मक कारण मौजूद हैं:

  • खाद्य वस्तुओं की कमरतोड़ महंगाई: गेहूं का आटा, चावल, दालें, दूध और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम आम नागरिकों की क्रय शक्ति से बाहर हो चुके हैं। पिछले दो-तीन वर्षों में आटे की थैलियों के लिए मची भगदड़ और डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों पर हुई मौतों ने जमीनी हकीकत को उजागर किया है।

  • जलवायु परिवर्तन और बाढ़ का कहर: पाकिस्तान में पिछले वर्षों में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों (सिंध और पंजाब) में फसलों, पशुधन और सिंचाई नेटवर्क को तबाह कर दिया, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज हुई।

  • आईएमएफ की सख्त शर्तें और सब्सिडी में कटौती: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बेलआउट पैकेज की शर्तों के चलते पाकिस्तान सरकार को ईंधन, बिजली और खाद्य सब्सिडी में कटौती करनी पड़ी, जिससे उत्पादन लागत और परिवहन खर्च कई गुना बढ़ गए।

अफगानिस्तान भी भुखमरी की गिरफ्त में: 108वें स्थान पर स्थिति अत्यंत नाजुक

पाकिस्तान के साथ ही भारत का दूसरा पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान भी भुखमरी के भीषण संकट से जूझ रहा है। रिपोर्ट में अफगानिस्तान 28.6 के स्कोर के साथ 108वें स्थान पर दर्ज किया गया है। अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान के नियंत्रण के बाद से देश को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद और विकास परियोजनाओं पर रोक लग गई है। कड़ाके की ठंड, सूखे की मार और रोजगार के अभाव ने अफगान परिवारों को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया है। कई इलाकों में परिवारों द्वारा दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए घर के सामान बेचने और बच्चों को बाल मजदूरी में धकेलने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

दक्षिण एशिया के अन्य देशों की क्या है रैंकिंग?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण एशियाई देशों की रैंकिंग और स्थिति इस प्रकार है:

  • बांग्लादेश: 84वें स्थान पर रहते हुए बांग्लादेश अपने पड़ोसियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, हालांकि वहां भी खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव एक चुनौती बना हुआ है।

  • पाकिस्तान: 106वें स्थान पर (स्कोर 25.5 - गंभीर श्रेणी)।

  • अफगानिस्तान: 108वें स्थान पर (स्कोर 28.6 - गंभीर भुखमरी श्रेणी)।

रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दक्षिण एशियाई देशों में कृषि सुधारों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो संयुक्त राष्ट्र के 2030 तक 'जीरो हंगर' (Zero Hunger) के लक्ष्य को हासिल करना असंभव हो जाएगा।