तीसरे विश्व युद्ध की आहट? ट्रंप के परमाणु हमला झेलने वाले 'डूम्सडे प्लेन' ने भरी रहस्यमयी उड़ान, कांपी दुनिया
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे सुरक्षित और परमाणु विस्फोट झेलने वाले विशेष सैन्य विमान 'डूम्सडे प्लेन' (Doomsday Plane) के आसमान में दिखने से दुनिया भर में तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आशंकाएं गहरा गई हैं। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना के इस अत्यधिक गुप्त और अभेद्य बोइंग ई-4बी 'नाइटवॉच' (Boeing E-4B Nightwatch) विमान ने नेब्रास्का स्थित ऑफट एयर फोर्स बेस (Offutt Air Force Base) से अचानक उड़ान भरी और पूर्व दिशा की ओर बढ़ते हुए वाशिंगटन डीसी के करीब उड़ान भरता देखा गया। सामान्य तौर पर यह विमान केवल तभी आसमान में सक्रिय किया जाता है जब अमेरिका पर किसी बड़े राष्ट्रीय संकट, सामरिक खतरे या परमाणु युद्ध की स्थिति बनती है। हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवरों और बदले हुए वैश्विक समीकरणों के बीच इस विमान का बिना किसी पूर्व आधिकारिक घोषणा के सक्रिय होना रक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर रहा है।
क्या है 'डूम्सडे प्लेन' और इसे क्यों कहा जाता है 'उड़ता हुआ पेंटागन'?
बोइंग 747-200 का अत्यधिक संशोधित रूप 'बोइंग ई-4बी नाइटवॉच' अमेरिकी सेना का एक उड़ता हुआ कमांड और कंट्रोल सेंटर है। इसे 'डूम्सडे' यानी 'प्रलय का विमान' नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह परमाणु युद्ध या प्रलयंकारी हमले के दौरान जमीन पर मौजूद सभी कमांड सेंटर नष्ट हो जाने के बाद भी हवा में पूरी तरह सुरक्षित रहता है और वहां से अमेरिकी परमाणु हथियारों को लॉन्च करने का अंतिम आदेश दे सकता है। यह साधारण विमानों की तरह डिजिटल स्क्रीन पर अत्यधिक निर्भर नहीं होता, बल्कि इसमें पुराने पारंपरिक एनालॉग उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है, ताकि परमाणु विस्फोट से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) इसके सिस्टम को नुकसान न पहुंचा सके। इस विमान में हवा में ही ईंधन भरने (Mid-Air Refueling) की आधुनिक क्षमता है, जिससे यह लगातार कई दिनों तक जमीन पर उतरे बिना आसमान में चक्कर लगा सकता है। इसमें लगभग 112 लोगों की एक पूरी सामरिक टीम, सैन्य जनरल्स, संचार विशेषज्ञ और राष्ट्रपति के लिए एक सुरक्षित कॉन्फ्रेंस रूम और स्लीपिंग क्वार्टर मौजूद होता है।
अचानक उड़ान भरने के पीछे क्या है असली वजह?
विमान के रडार पर दिखने के बाद से ही अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कयासों का दौर शुरू हो गया है:
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ईरान और मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी को लेकर दिए गए बयानों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह विमान किसी भी अप्रत्याशित सैन्य टकराव की स्थिति से निपटने के लिए हाई-अलर्ट पर रखा गया हो सकता है।
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रूटीन सैन्य ड्रिल और पायलट ट्रेनिंग: दूसरी तरफ, पेंटागन और अमेरिकी वायुसेना से जुड़े कुछ सूत्रों का मानना है कि ई-4बी फ्लीट नियमित अंतराल पर अपनी तैयारियों को परखने के लिए इस प्रकार की आपातकालीन ड्रिल करती रहती है। उड़ान का उद्देश्य सिस्टम की जांच और क्रू की तत्परता को मापना भी हो सकता है।
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अघोषित वीआईपी मूवमेंट: ट्रैकिंग डेटा में विमान के गंतव्य और इसमें सवार यात्रियों की पहचान का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री या ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के वरिष्ठ अधिकारी किसी सामरिक समीक्षा के लिए इस विमान में मौजूद हो सकते हैं।
परमाणु युद्ध की स्थिति में कैसे काम करता है यह सिस्टम?
यदि किसी परिदृश्य में व्हाइट हाउस या पेंटागन पर कोई बड़ा मिसाइल या परमाणु हमला होता है, तो 'नेशनल एयरबोर्न ऑपरेशंस सेंटर' (NAOC) के तहत इस विमान को देश की कमान संभालने का जिम्मा मिल जाता है। यह विमान दुनिया भर में तैनात अमेरिकी परमाणु पनडुब्बियों (Submarines), जमीन पर मौजूद इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) साइलो और हवा में मौजूद स्टील्थ बॉम्बर्स के साथ सीधे और सुरक्षित उपग्रह लिंक के जरिए संपर्क साध सकता है। इसकी टेल (पूंछ) से निकलने वाला 5 मील लंबा वायर एंटीना समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों तक वीएलएफ (Very Low Frequency) संदेश भेजने में सक्षम होता है।
दुनिया भर की टिकी हैं नजरें
अमेरिका के पास वर्तमान में ऐसे केवल चार ई-4बी विमान मौजूद हैं, जिन्हें अमेरिकी वायुसेना का पहला एयरबोर्न कमांड और कंट्रोल स्क्वाड्रन संचालित करता है। इस विमान का आसमान में दिखना हमेशा वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बनता है। हालांकि व्हाइट हाउस या अमेरिकी रक्षा विभाग ने अभी तक इस विशेष उड़ान के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जिस तरह से दुनिया के कई कोनों में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, उसने सामरिक जानकारों को सचेत कर दिया है कि आधुनिक दुनिया में संकट कभी भी सामान्य से विनाशकारी स्तर पर पहुंच सकता है।