ईरान के परमाणु राज पर अमेरिका का महा-ऑफर, सीक्रेट जानकारी देने वालों को मिलेंगे ₹175 करोड़ से ज्यादा

ईरान के परमाणु राज पर अमेरिका का महा-ऑफर, सीक्रेट जानकारी देने वालों को मिलेंगे ₹175 करोड़ से ज्यादा

पश्चिम एशिया में महीनों से जारी सैन्य तनाव और तेहरान के साथ जारी गतिरोध के बीच अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जड़ें खोदने के लिए एक बहुत बड़ा दांव चल दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक 'रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' (Rewards for Justice) कार्यक्रम और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके गुप्त ठिकानों और इससे जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों या अधिकारियों की पुख्ता खुफिया जानकारी देने वाले व्यक्ति को 20 मिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब ₹175 करोड़ से ₹190 करोड़) तक का नकद इनाम दिया जाएगा।

इतना ही नहीं, खुफिया जानकारी साझा करने वाले सोर्स और उसके परिवार की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने उन्हें एक नई पहचान और सुरक्षित देश में स्थानांतरित (Relocation) करने का भी औपचारिक वादा किया है।

किनजानकारियों पर मिलेगा यह भारी-भरकम इनाम?

अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक, यह इनाम किसी सामान्य सूचना पर नहीं, बल्कि सटीक और कार्रवाई योग्य (Actionable Intelligence) डेटा पर दिया जाएगा। जांच एजेंसियों की नजर मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर टिकी है:

  • अघोषित और गुप्त परमाणु सुविधाएं: ईरान के उन संभावित परमाणु ठिकानों, भूमिगत सुरंगों या बंकरों का सटीक विवरण, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) या वैश्विक सैटेलाइट्स की नजरों से छिपाकर रखा गया है।

  • परमाणु वैज्ञानिक और तकनीकी नेटवर्क: ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment), सेंट्रीफ्यूज विकास और वॉरहेड डिजाइनिंग से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों, सैन्य अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की वास्तविक गतिविधियां।

  • प्रतिबंधित उपकरणों की तस्करी (Smuggling Networks): ईरान द्वारा दोहरे उपयोग (Dual-use) वाली तकनीकों, उच्च-सटीकता वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रासायनिक घटकों को अवैध रूप से खरीदने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय मुखौटा कंपनियों (Shell Companies) और वित्तीय नेटवर्क की जानकारी।

'पिकैक्स माउंटेन' पर ट्रंप की नजर: क्या समझौते के मूड में है तेहरान?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में एक संबोधन के दौरान दावा किया कि पिछले आठ महीनों के संघर्ष और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य व आर्थिक कमर तोड़ दी है। ट्रंप ने कहा, "अगर हमने कड़ा रुख न अपनाया होता, तो आज इजरायल का अस्तित्व न होता। ईरान पूरे मध्य पूर्व को अपनी आग में झोंक देता। अब वे बहुत बुरी तरह से एक समझौता (Deal) करना चाहते हैं।'

इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि ईरान के एक-दो अवशिष्ट (Residual) परमाणु ठिकानों पर अभी भी ध्यान देने की जरूरत है, जिसमें मध्य ईरान में स्थित 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) का नाम विशेष रूप से लिया गया। हालांकि, तेहरान इस पहाड़ी इलाके में किसी भी प्रकार के गुप्त परमाणु ठिकाने की मौजूदगी से साफ इनकार करता रहा है और अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण व असैन्य उद्देश्यों के लिए बताता आया है।

आंतरिक भेदियों (Whistleblowers) को साधने की रणनीतिक चाल

रक्षा और खुफिया मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम दरअसल ईरान के परमाणु तंत्र के भीतर बैठे वैज्ञानिकों, सैन्य इंजीनियरों और शीर्ष अधिकारियों में सेंध लगाने की एक मनोवैज्ञानिक और वित्तीय चाल है। ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और मुद्रा अवमूल्यन के कारण वहां की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। ऐसे में 20 मिलियन डॉलर (लगभग ₹175 करोड़) की अकल्पनीय धनराशि और पश्चिम में सुरक्षित जीवन की गारंटी किसी भी आंतरिक सूत्र (Insider) या व्हिसलब्लोअर को गोपनीय राज लीक करने के लिए लुभाने का काम कर सकती है।

इतिहास गवाह है कि अमेरिकी 'रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' कार्यक्रम ने पहले भी कई हाई-प्रोफाइल आतंकियों और प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई है। अब देखना यह होगा कि क्या वाशिंगटन का यह खुला आर्थिक प्रलोभन ईरान के सबसे सुरक्षित और अत्यधिक पहरे वाले परमाणु राज का पर्दाफाश कर पाता है या नहीं।