क्या नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो की तरह पाकिस्तान छोड़ेंगे इमरान खान? विपक्षी नेता का सनसनीखेज दावा
पाकिस्तान की सियासत में जेल की सलाखों के पीछे बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी नेता और पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (PkMAP) के प्रमुख महमूद खान अचकजई ने सनसनीखेज दावा किया है कि मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार और 'शक्तिशाली हलके' (पाकिस्तानी सेना) इमरान खान पर देश छोड़कर विदेश जाने का समझौता करने के लिए भारी दबाव बना रहे हैं। अचकजई का कहना है कि वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन—पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP)—इमरान खान के साथ ठीक वही पुराना राजनीतिक फॉर्मूला दोहराने की फिराक में है, जो अतीत में नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ आजमाया गया था।
पेशावर हाई कोर्ट में अचकजई का बड़ा खुलासा: 'इतिहास दोहराने की हो रही साजिश'
पेशावर हाई कोर्ट परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए महमूद खान अचकजई ने आरोप लगाया कि इमरान खान की आवाज को हमेशा के लिए दबाने और उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से बेदखल करने के लिए सौदेबाजी का खेल खेला जा रहा है। उनके साथ 'तहरीक-ए-तहफुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान' (TTAP) गठबंधन के प्रमुख नेता सरदार अख्तर मेंगल और सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे।
अचकजई ने कहा कि पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि जब भी किसी जननेता को जेल में रखकर तोड़ना असंभव हो जाता है, तो सत्ताधारी तंत्र 'एग्जाइल डील' (निर्वासन समझौते) का सहारा लेता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इमरान खान चट्टान की तरह अपनी बात पर अड़े हुए हैं और उन्होंने अभी तक इस तरह के किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया है।
नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ क्या हुआ था? जानिए ऐतिहासिक मिसालें
विपक्षी नेताओं ने अपनी बात को साबित करने के लिए पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास के दो सबसे चर्चित निर्वासन मामलों का हवाला दिया:
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नवाज शरीफ का 2000 का सऊदी निर्वासन: 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद नवाज शरीफ को जेल भेज दिया गया था। बाद में सऊदी अरब और लेबनान के तत्कालीन नेतृत्व की मध्यस्थता में एक गोपनीय 10-वर्षीय समझौता हुआ, जिसके तहत नवाज शरीफ को जेल से रिहा कर पूरे परिवार सहित सऊदी अरब में निर्वासित जीवन बिताने के लिए भेज दिया गया था।
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बेनजीर भुट्टो का लंबा निर्वासन: वर्ष 1997 में चुनावी हार और राष्ट्रपति फारूक लेघारी के साथ टकराव के बाद बेनजीर भुट्टो ब्रिटेन और दुबई में लंबे समय तक स्वनिर्वासन में रहीं। इस दौरान उनके पति आसिफ अली जरदारी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में वर्षों तक पाकिस्तानी जेलों में कैद रहे, जिसके बाद 2007 में एनआरओ (NRO) समझौते के तहत बेनजीर की वतन वापसी संभव हो सकी थी।
अचकजई का कहना है कि रावलपिंडी का सैन्य नेतृत्व और इस्लामाबाद की सरकार मानती है कि यदि इमरान खान देश से बाहर चले जाते हैं, तो पाकिस्तान में राजनीतिक उबाल और जनता का गुस्सा अपने आप शांत हो जाएगा।
इमरान खान का पुराना रुख: 'जिऊंगा और मरूंगा पाकिस्तान में'
73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर तोशाखाना, सिफर लीक, अल-कादिर ट्रस्ट और 9 मई की हिंसा समेत करीब 200 से अधिक आपराधिक और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले भी कई बार ऐसी खबरें आई थीं कि उन्हें कुछ वर्षों के लिए ब्रिटेन या किसी खाड़ी देश में रहने का प्रस्ताव दिया गया था।
उस समय इमरान खान ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया था कि जब वह अटक जेल में थे, तब भी उन्हें तीन साल के निर्वासन का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया था। इमरान खान का निरंतर कहना रहा है कि वे नवाज शरीफ की तरह बीमारी का बहाना बनाकर या परवेज मुशर्रफ से समझौता करके लंदन भागने वाले राजनेता नहीं हैं, बल्कि वे अपनी आखिरी सांस तक पाकिस्तान में रहकर कानून और संविधान की लड़ाई लड़ेंगे।
जेल में मिलने पर पाबंदियों को बताया तानाशाही, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्षी नेताओं ने अदियाला जेल में इमरान खान और अन्य राजनीतिक बंदियों से वकीलों और परिजनों की मुलाकात पर लगाई गई सख्त पाबंदियों की कड़ी निंदा की। अचकजई ने कहा कि दुनिया के किसी भी सभ्य मुल्क या जेल मैन्युअल में विचाराधीन कैदी को उसकी कानूनी टीम और सगे संबंधियों से मिलने से नहीं रोका जाता। उन्होंने इसे मौलिक मानवाधिकारों का खुला हनन और तानाशाही करार दिया।
विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि संसद को उसकी वास्तविक संप्रभुता वापस नहीं लौटाई गई, चुनाव आयोग की निष्पक्षता बहाल नहीं हुई और इमरान खान पर अत्याचार बंद नहीं हुए, तो समूचा विपक्ष जल्द ही एक 'सर्वदलीय सम्मेलन' (All-Party Conference) बुलाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि शांतिपूर्ण राजनीतिक रास्ते बंद किए गए, तो विपक्षी सांसद और विधायक राष्ट्रीय व प्रांतीय असेंबलियों से सामूहिक इस्तीफे देकर व्यवस्था को ठप करने का कड़ा कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के खिलाफ अदालत में मोर्चा
इस बीच तहरीक-ए-तहफुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेताओं ने पेशावर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर खैबर पख्तूनख्वा (KP) में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए गवर्नर शासन और आपातकाल को चुनौती दी है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234 के तहत जारी अधिसूचना को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने की मांग की गई है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र की शरीफ सरकार आतंकवाद का झूठा बहाना बनाकर पीटीआई की निर्वाचित प्रांतीय सरकार और विधानसभा के अधिकारों को जबरन छीनने की साजिश कर रही है। पाकिस्तान की अदालतें और राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर नजरें गड़ाए हैं कि क्या इमरान खान इस नए दबाव के सामने झुकेंगे या फिर यह टकराव पाकिस्तान को एक और बड़े राजनीतिक संकट की ओर धकेल देगा।