मिडटर्म हार की बौखलाहट में ईरान पर न्यूक्लियर अटैक करेंगे ट्रंप? इस पहाड़ पर लॉक होगा टारगेट

मिडटर्म हार की बौखलाहट में ईरान पर न्यूक्लियर अटैक करेंगे ट्रंप? इस पहाड़ पर लॉक होगा टारगेट

अमेरिकी राजनीति के गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों तक इस समय एक बहुत ही सनसनीखेज और गंभीर बहस छिड़ी हुई है। वाशिंगटन और पेंटागन के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के राजनीतिक क्षितिज पर मंडराते मिडटर्म चुनावों के संभावित नकारात्मक परिणाम और संभावित हार की बौखलाहट के बीच बड़ा फैसला लिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प अपने गिरते सियासी ग्राफ और घरेलू मोर्चे पर जारी तीखी आलोचनाओं से ध्यान भटकाने के लिए विदेश नीति पर कोई बेहद आक्रामक और अभूतपूर्व कदम उठा सकते हैं। इस रणनीति के केंद्र में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी देश ईरान बताया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस बात की चर्चा तेजी से फैल रही है कि ट्रम्प प्रशासन ईरान के खिलाफ केवल सामान्य हवाई हमले या आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसी आपातकालीन स्थिति में सीमित सामरिक परमाणु हथियार या विशेष बंकर-बस्टर मिसाइलों के इस्तेमाल जैसा अति-आक्रामक कदम उठाने की रणनीति पर भी गुप्त रूप से विचार कर रहा है।

ईरान की दुर्जेय परमाणु प्रयोगशालाएं और वह अभेद्य पहाड़ जहां लॉक होगा मुख्य टारगेट

अगर अमेरिकी रक्षा रणनीतिकार ईरान पर किसी बड़े हमले या सर्जिकल स्ट्राइक का खाका खींचते हैं, तो उनकी मिसाइलों का मुख्य टारगेट कोई आम सैन्य अड्डा या रिहाइशी इलाका नहीं, बल्कि ईरान के सुदूर और विशाल पहाड़ों के नीचे बनी वह अभेद्य परमाणु संरचना होगी जिसे दुनिया 'फोर्डो' (Fordo) और 'नतांज' (Natanz) के नाम से जानती है। ईरान ने अपनी परमाणु क्षमताओं को किसी भी संभावित विदेशी हमले से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें कई सौ फीट गहराई में पत्थरों और कंक्रीट की अत्यंत मजबूत चट्टानों के पीछे पहाड़ के भीतर तराशकर बनाया है। इन पहाड़ों में स्थित भूमिगत सेंट्रीफ्यूज हॉल और संवर्धित यूरेनियम के भंडारों को नष्ट करना सामान्य बमवर्षक विमानों के बस की बात नहीं है। इसी वजह से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी वायु सेना अपने विशेष बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और पहाड़ के कई मीटर गहरे पेट में जाकर तबाही मचाने वाले 'मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर' (MOP) यानी भारी बंकर-बस्टर बमों के साथ-साथ अत्यंत छोटे सामरिक परमाणु प्रहार को विकल्प के तौर पर अपने टारगेट मैप पर लॉक कर सकती है।

मध्य पूर्व में परमाणु हमले की आहट से विश्व भर में मचेगा महाविनाशकारी आर्थिक और सैन्य संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए किसी भी इस तरह के दुस्साहसिक कदम का असर केवल मध्य पूर्व की सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दुष्परिणाम पूरे विश्व को भुगतना पड़ेगा। ईरान ने भी बार-बार यह चेतावनी दी है कि उसकी संप्रभुता या परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह का प्रहार होने की सूरत में वह खाड़ी क्षेत्र में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों, इजरायल के प्रमुख शहरों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से तबाह कर देगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया भर के कच्चे तेल की एक-चौथाई सप्लाई गुजरती है। यदि अमेरिका पहाड़ों में छिपे ईरानी ठिकानों को अपना निशाना बनाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी। इससे पूरी दुनिया में महंगाई, ऊर्जा संकट और तीसरे विश्व युद्ध की भयानक आशंका पैदा हो जाएगी, जिसकी आंच से कोई भी महाद्वीप बच नहीं पाएगा।

व्हाइट हाउस और पेंटागन का क्या है रुख, क्या वाकई ट्रंप उठाएंगे यह आत्मघाती कदम

हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन और ह्वाइट हाउस के अधिकारियों का आधिकारिक तौर पर यही कहना है कि अमेरिका हमेशा से अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए सभी विकल्प खुले रखता है। लेकिन, सुरक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे केवल एक मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) और दबाव बनाने की रणनीति भी मान रहा है। जानकारों का कहना है कि मिडटर्म चुनावों के कड़े मुकाबले के बीच ट्रम्प अपनी छवि को एक मजबूत, सख्त और निडर वैश्विक नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं ताकि राष्ट्रवादी मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट किया जा सके। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के उन संदिग्ध पहाड़ों और पेंटागन की गतिविधियों पर बेहद सतर्कता से पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि जरा सी भी रणनीतिक चूक पूरे ग्रह को एक विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर सकती है।

निष्कर्ष: वैश्विक स्थिरता और अमेरिकी राजनीति के मोड़ पर टिका है भविष्य का फैसला

संक्षेप में कहें तो मिडटर्म चुनावों के राजनीतिक तनाव के बीच ईरान पर परमाणु हमले की चर्चाओं ने वैश्विक स्तर पर भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ईरान की पहाड़ों के भीतर स्थित परमाणु प्रयोगशालाओं पर टारगेट लॉक होने की ये खबरें केवल एक राजनीतिक पैंतरा हैं या किसी बड़े वैश्विक संकट का संकेत, इसका फैसला आने वाला समय ही करेगा।