DA के ऐलान में देरी से गड़बड़ाया अक्टूबर सैलरी का गणित, केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़े वेतन के लिए अब नवंबर तक का इंतजार?

DA के ऐलान में देरी से गड़बड़ाया अक्टूबर सैलरी का गणित, केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़े वेतन के लिए अब नवंबर तक का इंतजार?

त्योहारी सीजन के बीच केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) की बहुप्रतीक्षित घोषणा पर सस्पेंस बना हुआ है। सामान्य तौर पर दशहरा या दिवाली से पहले सरकार जुलाई छमाही के लिए महंगाई भत्ते में संशोधन का ऐलान कर देती है, लेकिन अक्टूबर महीने के 15 दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद केंद्रीय कैबिनेट से इस पर आधिकारिक मुहर नहीं लग पाई है। इस प्रशासनिक देरी ने अब सरकारी कर्मचारियों की अक्टूबर महीने की सैलरी का गणित पूरी तरह गड़बड़ा दिया है। बैंकिंग और सरकारी पे-रोल नियमों के अनुसार, महीने के मध्य तक अधिसूचना जारी न होने की स्थिति में बढ़े हुए भत्ते को चालू महीने की पे-स्लिप में जोड़ पाना मुश्किल हो जाता है, जिसके चलते कर्मचारियों को अब बढ़े हुए वेतन और एरियर के लिए नवंबर तक इंतजार करना पड़ सकता है।

15 तारीख के पे-रोल कट-ऑफ से क्यों बिगड़ा अक्टूबर सैलरी का हिसाब?

केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों, रक्षा विभागों और केंद्रीय उपक्रमों में कर्मचारियों के मासिक वेतन (Salary Cycle) की गणना हर महीने की 15 तारीख से 20 तारीख के बीच फ्रीज कर दी जाती है। इस तय समय सीमा तक वेतन का डेटा सिस्टम में लॉक होने के बाद ही माह के अंत में समय पर बैंक खातों में सैलरी क्रेडिट होती है। चूंकि 14 अक्टूबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केवल रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस और अन्य कल्याणकारी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और डीए संशोधन का एजेंडा शामिल नहीं हुआ, इसलिए अधिकांश विभागों में अक्टूबर की नियमित सैलरी पुरानी दर पर ही प्रोसेस होने लगी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर सरकार आने वाले दिनों में डीए बढ़ोतरी को मंजूरी दे भी देती है, तो तकनीकी कारणों से यह राशि अक्टूबर के वेतन में जुड़ने के बजाय नवंबर के पे-बिल में ही शामिल हो सकेगी।

पहली छमाही के ऐलान में भी हुई थी देरी, अब 3% से 4% बढ़ोतरी की उम्मीद

यह पहला मौका नहीं है जब कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के फैसले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा हो। इससे पहले जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाली पहली छमाही की डीए किस्त की घोषणा भी सामान्य रूप से होली (मार्च) के बजाय 18 अप्रैल को की गई थी, जिसमें 2% की बढ़ोतरी कर डीए दर को 58% से बढ़ाकर 60% किया गया था। अब जुलाई 2026 से देय दूसरी किस्त को लेकर ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आंकड़ों के आधार पर माना जा रहा है कि सरकार इसमें 3% से 4% की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि 3 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो महंगाई भत्ता 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा, जबकि 4 प्रतिशत की वृद्धि की स्थिति में यह 64% के स्तर तक पहुंच जाएगा।

नवंबर में एकमुश्त मिलेगा 3 महीने का एरियर, खाते में आएगी बंपर रकम

डीए बढ़ोतरी के फैसले में भले ही देरी हो रही हो, लेकिन कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान नहीं होगा क्योंकि यह संशोधन 1 जुलाई 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा। ऐसे में जब नवंबर में नई दरों के साथ वेतन का भुगतान होगा, तब कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई, अगस्त और सितंबर के तीन महीनों का पूरा एरियर (बकाया राशि) एकमुश्त जोड़कर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है और डीए में 3% का इजाफा होता है, तो उन्हें हर महीने ₹540 का सीधा फायदा होगा। तीन महीने के एरियर (₹1,620) और चालू महीने के बढ़े हुए डीए को मिलाकर नवंबर के वेतन में एकमुश्त अच्छी-खासी अतिरिक्त नकदी कर्मचारियों के खातों में पहुंचेगी।

कर्मचारी संगठनों ने बढ़ाई सक्रियता, कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र

त्योहारों से ठीक पहले बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव तेज कर दिया है। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स' और अन्य प्रमुख यूनियनों ने कैबिनेट सचिव को औपचारिक पत्र लिखकर तुरंत डीए और डीआर की अधिसूचना जारी करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि बोनस के साथ-साथ महंगाई भत्ते का समय पर भुगतान होने से कर्मचारियों को त्योहारी खर्चों में सीधी राहत मिलती है। अब सबकी निगाहें कैबिनेट की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां इस वित्तीय संशोधन को हरी झंडी मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।