1 साल में 50% टूटा स्विगी का शेयर, अब ब्रोकरेज ने दी 'Buy' रेटिंग; जानिए क्या है टारगेट और मुनाफे का गणित
फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी स्विगी (Swiggy Ltd) के शेयरों में पिछले एक साल के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली है। 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹459.95 से लुढ़कते हुए यह शेयर लगभग 50% गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर ₹228.45 तक पहुंच गया। इस तेज गिरावट के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या इस गिरावट में खरीदारी करनी चाहिए या अभी दूरी बनाए रखना ही समझदारी है। इसी बीच घरेलू ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी (Anand Rathi Share and Stock Brokers) ने स्विगी के शेयर पर अपनी रेटिंग को 'Hold' से अपग्रेड करके 'Buy' कर दिया है और प्रति शेयर ₹310 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा स्तरों से शेयर में लगभग 35% तक का संभावित उछाल देखने को मिल सकता है।
50% की भारी गिरावट के बाद क्यों आकर्षक लग रहा है स्विगी का वैल्यूएशन?
पिछले एक साल में करीब 50% और पिछले तीन से छह महीनों में लगातार 14% से 16% की गिरावट झेलने के बाद स्विगी का वैल्यूएशन अब कई फंडामेंटल एनालिस्ट्स को वाजिब नजर आने लगा है। विश्लेषकों के अनुसार, लिस्टिंग के बाद हाइप और क्विक कॉमर्स की गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते शेयर पर भारी दबाव बना हुआ था। हालांकि, अब शेयर अपने 52-वीक लो स्तर ₹228-₹230 के आसपास बेस बनाने की कोशिश कर रहा है। आनंद राठी का विश्लेषण कहता है कि कंपनी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां रेवेन्यू ग्रोथ के साथ-साथ ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी में भी निरंतर सुधार दिखने के ठोस संकेत मिल रहे हैं।
कोर फूड डिलीवरी कारोबार: घाटे से उबरकर ब्रेक-ईवन की ओर बढ़े कदम
ब्रोकरेज की पॉजिटिव रिपोर्ट के पीछे का सबसे बड़ा आधार स्विगी का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के फूड डिलीवरी सेगमेंट का कंट्रीब्यूशन मार्जिन, जो वित्त वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही में लगभग 5.6% के नुकसान में था, सुधरकर ब्रेक-ईवन स्तर पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही सेगमेंटल एबिटा (EBITDA) मार्जिन में भी उल्लेखनीय स्थिरता दर्ज की गई है। जोमैटो (Zomato) के मुकाबले स्विगी का वैल्यूएशन डिस्काउंट पर चल रहा है, जिससे लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए रिस्क-टू-रिवॉर्ड रेशियो काफी अनुकूल बैठता है।
क्विक कॉमर्स 'इंस्टामार्ट' से कैसे बदलेगी कंपनी के मुनाफे की तस्वीर?
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'इंस्टामार्ट' (Instamart) वर्तमान में स्विगी के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है, हालांकि शुरुआती स्तर पर यह घाटे का मुख्य कारण भी रहा है। लेकिन अब कंपनी ने अपनी रणनीति में बड़ा संरचनात्मक बदलाव किया है। आनंद राठी के अनुसार, डायरेक्ट इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल की ओर बढ़ने से कंपनी को प्रति ऑर्डर ₹4 से ₹5 तक का अतिरिक्त योगदान मार्जिन मिलने की उम्मीद है, जिससे मार्जिन में 80 से 100 बेसिस प्वाइंट का सीधा सुधार संभव है। इसके अलावा इंस्टामार्ट अब केवल रोजमर्रा के कम मार्जिन वाले किराना सामान पर निर्भर न रहकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी और जनरल मर्चेंडाइज जैसे 30% से अधिक हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ा रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि फूड डिलीवरी से मिलने वाला मजबूत कैश फ्लो और ट्रेजरी इनकम मिलकर अगले कुछ सालों में क्विक कॉमर्स के ऑपरेशनल नुकसान की भरपाई करने में सक्षम होंगे।
तकनीकी चार्ट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट: खरीदें या करें थोड़ा इंतजार?
फंडामेंटल मोर्चे पर सुधार की संभावनाओं के बावजूद टेक्निकल चार्ट्स पर सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है। तकनीकी विश्लेषक जिगर एस. पटेल के अनुसार, शेयर फिलहाल अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेजेज के नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) ओवरसोल्ड जोन में जा चुका है, जिसका मतलब तकनीकी उछाल की संभावना तो है, लेकिन बिना कन्फर्मेशन के तुरंत आक्रामक खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है। चार्ट पर ₹225 से ₹240 का दायरा शेयर के लिए एक मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि स्टॉक ₹255 के स्तर को पार करके लगातार टिकता है, तो वहां से रिवर्सल और ₹310 के टारगेट की ओर तेज तेजी का रास्ता साफ होगा।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति और प्रमुख रिस्क फैक्टर्स?
दीर्घकालिक नजरिया रखने वाले रिटेल निवेशकों के लिए ब्रोकरेज की सलाह है कि एकमुश्त बड़ी पूंजी लगाने के बजाय मौजूदा गिरावट में धीरे-धीरे (SIP मोड में) खरीदारी की जा सकती है। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान में रखना होगा कि क्विक कॉमर्स में ब्लिंकिट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) जैसी कंपनियों से मिल रही आक्रामक प्रतिस्पर्धा और शहरी खपत (अर्बन कंजम्पशन) में मंदी की आशंका कंपनी के ग्रोथ मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसी भी स्तर पर निवेश करते समय स्टॉप-लॉस का सख्त पालन और अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना जरूरी है।