IDBI बैंक में सरकार बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी: फेयरफैक्स के साथ ₹52,878 करोड़ की ऐतिहासिक मेगा डील को कैबिनेट की मंजूरी

IDBI बैंक में सरकार बेचेगी 60.72% हिस्सेदारी: फेयरफैक्स के साथ ₹52,878 करोड़ की ऐतिहासिक मेगा डील को कैबिनेट की मंजूरी

भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े निजीकरण और रणनीतिक विनिवेश सौदे पर केंद्र सरकार ने अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की अहम बैठक में आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह ऐतिहासिक सौदा जाने-माने भारतीय मूल के अरबपति निवेशक प्रेम वत्स के नेतृत्व वाले कनाडाई निवेश समूह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) के साथ 52,878 करोड़ रुपये में तय हुआ है। सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के सफल निजीकरण के बाद केंद्र सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश माना जा रहा है, जिसने देश के सार्वजनिक और वित्तीय क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सुधारों के एक नए युग का सूत्रपात कर दिया है।

₹81 प्रति शेयर की सफल बोली और स्वतंत्र मूल्यांकन प्रक्रिया

इस मेगा डील के तहत सफल बोलीदाता फेयरफैक्स ने 81 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई, जिसे सरकार की अधिकार प्राप्त समिति ने स्वीकार कर लिया। सरकार द्वारा कराई गई दोहरी स्वतंत्र परिसंपत्ति मूल्यांकन प्रक्रिया में बैंक के शेयरों का बेंचमार्क रिजर्व मूल्य औसतन 75.99 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। फेयरफैक्स द्वारा दी गई 81 रुपये की बोली इस बेंचमार्क मूल्य से काफी अधिक रही, जिसके चलते सचिवों के कोर समूह (CGD) और केंद्रीय मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (वैकल्पिक तंत्र) ने इसे तुरंत हरी झंडी दिखा दी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दो स्वतंत्र मूल्यांकन पद्धतियों—मार्केट मल्टीपल मेथड और एसेट वैल्यूएशन मेथड—का सहारा लिया गया था ताकि सरकारी खजाने और शेयरधारकों के हितों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए बैंक की परिसंपत्तियों, ऋण पोर्टफोलियो और ब्रांच नेटवर्क का गहन ऑडिट किया गया था।

सरकार और एलआईसी के बीच हिस्सेदारी की बिक्री और पोस्ट-डील स्ट्रक्चर

वर्तमान में आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार की लगभग 45.48 प्रतिशत और जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की करीब 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है, यानी दोनों के पास कुल मिलाकर 94.72 प्रतिशत मालिकाना हक था। इस रणनीतिक बिक्री के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जिससे कुल मिलाकर 60.72 प्रतिशत इक्विटी फेयरफैक्स के पास स्थानांतरित हो जाएगी। इस बिक्री के बाद भी सरकार बैंक में अपनी 15 प्रतिशत और एलआईसी 19 प्रतिशत की अवशिष्ट हिस्सेदारी बनाए रखेगी। इसका मतलब यह है कि सार्वजनिक संस्थाओं के पास कुल 34 प्रतिशत की मजबूत संयुक्त हिस्सेदारी बनी रहेगी, जिसे बाद में उपयुक्त बाजार अवसरों पर ओपन मार्केट के जरिए चरणबद्ध तरीके से विनिवेशित करने के अधिकार सरकार ने अपने पास सुरक्षित रखे हैं।

भारतीय वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)

यह डील केवल एक बैंक के स्वामित्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के वित्तीय और बैंकिंग इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) साबित होने जा रहा है। 52,878 करोड़ रुपये की यह भारी-भरकम पूंजी विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा सीधे भारतीय बैंकिंग तंत्र में लाई जा रही है। इससे पहले साल 2022 में सरकार ने इस रणनीतिक विनिवेश के लिए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी किया था, जिसमें पांच प्रमुख वित्तीय संस्थाओं ने रुचि दिखाई थी। गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सख्त 'फिट एंड प्रॉपर' मानदंडों की जांच के बाद दो अंतिम वित्तीय बोलियां सरकार के सामने आई थीं, जिनमें फेयरफैक्स ने वित्तीय और तकनीकी दोनों स्तरों पर बाजी मारी।

शेयर बाजार में जोरदार जश्न: आईडीबीआई बैंक के शेयरों में भारी उछाल

कैबिनेट के इस बहुप्रतीक्षित फैसले की खबर सामने आते ही दलाल स्ट्रीट पर आईडीबीआई बैंक के शेयरों में जबर्दस्त लिवाली शुरू हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बैंक का शेयर इंट्रा-डे कारोबार में लगभग 13 प्रतिशत तक उछल गया और 90 रुपये के स्तर को पार कर गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फेयरफैक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समूह के हाथों में प्रबंधन नियंत्रण जाने से आईडीबीआई बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बैलेंस शीट को जबर्दस्त मजबूती मिलेगी। फेयरफैक्स का भारत के वित्तीय सेक्टर में पहले से ही सीएसबी बैंक (CSB Bank) समेत कई अन्य उपक्रमों में सफल निवेश का लंबा रिकॉर्ड रहा है, जिससे आईडीबीआई के भविष्य को लेकर निवेशकों का भरोसा कई गुना बढ़ गया है।

बैंक कर्मचारियों, जमाकर्ताओं और ग्राहकों के हितों की पूरी सुरक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के इस सौदे में बैंक के मौजूदा कर्मचारियों के सेवा नियमों, वेतन संरचना और पेंशन लाभों की पूरी सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बैंक के करोड़ों बचत खाताधारकों, सावधि जमाकर्ताओं (FD होल्डर्स) और संस्थागत ग्राहकों की जमा पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। नए प्रमोटर को भारतीय रिजर्व बैंक के बैंकिंग विनियमन नियमों, प्राथमिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण (PSL) और देशव्यापी शाखा नेटवर्क के सुचारू संचालन से जुड़े सभी दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन करना होगा। यह कदम आईडीबीआई बैंक को नए सिरे से देश के शीर्ष निजी बैंकों की कतार में खड़ा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।