समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका, राकेश प्रताप सिंह समेत 3 बागी विधायक आज थामेंगे BJP का दामन

समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका, राकेश प्रताप सिंह समेत 3 बागी विधायक आज थामेंगे BJP का दामन

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी हलचल सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) के बागी विधायकों का भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विधिवत शामिल होने का सिलसिला तेज हो गया है। इसी कड़ी में अमेठी जिले के गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक राकेश प्रताप सिंह समेत तीन प्रमुख विधायक आज औपचारिक रूप से बीजेपी का दामन थामने जा रहे हैं। राजधानी लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इन नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई जाएगी। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के बाद से ही इन विधायकों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब अंतिम मुहर लगने जा रही है।

स्मृति ईरानी और प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में ग्रहण करेंगे सदस्यता

इस हाई-प्रोफाइल ज्वाइनिंग कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी। अमेठी संसदीय क्षेत्र से गहरा राजनीतिक संबंध रखने वाली स्मृति ईरानी की मौजूदगी को अमेठी और आसपास के जिलों के सियासी समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उनके साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उप मुख्यमंत्री और संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मंच पर मौजूद रहेंगे। राकेश प्रताप सिंह अमेठी की राजनीति में एक मजबूत जमीनी पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं, और उनके बीजेपी में आने से अमेठी-रायबरेली क्षेत्र में सपा के पारंपरिक वोट बैंक पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

कौन हैं शामिल होने वाले तीन विधायक और क्या है इनका सियासी रसूख

बीजेपी में शामिल होने वाले विधायकों में सबसे प्रमुख चेहरा गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह का है, जो लगातार तीन बार से विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मुखर शैली के लिए जाने जाते हैं। उनके साथ सपा से बगावत करने वाले दो अन्य विधायक भी आज भगवा खेमे का हिस्सा बनेंगे। इन विधायकों ने पूर्व में हुए राज्यसभा चुनाव में सपा के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ जाकर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। क्रॉस वोटिंग के बाद से ही ये सभी विधायक सपा नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे थे और अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार के साथ मंच साझा करते दिखाई दे रहे थे।

समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका, विपक्ष का समीकरण गड़बड़ाया

विधानसभा के भीतर संख्या बल और क्षेत्रीय प्रभाव दोनों ही नजरिए से यह घटनाक्रम अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेठी और सुल्तानपुर के बेल्ट में ठाकुर और सवर्ण मतदाताओं के बीच राकेश प्रताप सिंह की मजबूत पकड़ रही है। उनके पार्टी छोड़ने से संगठन को स्थानीय स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, समाजवादी पार्टी इन विधायकों को पहले ही 'गद्दार' और जनता के विश्वास को तोड़ने वाला करार दे चुकी है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि जो लोग जांच एजेंसियों और सत्ता के दबाव में झुक गए, उनके जाने से समाजवादी आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उपचुनाव या आगामी चुनावों में जनता इन्हें सबक सिखाएगी।

आगामी राजनीतिक समीकरणों पर क्या पड़ेगा इसका दूरगामी असर

बीजेपी द्वारा इन बागी विधायकों को पार्टी में शामिल कराने की रणनीति को भविष्य की चुनावी बिसात के तौर पर देखा जा रहा है। विशेष रूप से मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जातीय संतुलन साधने और विपक्षी दलों के मजबूत गढ़ों में सेंध लगाने के लिए बीजेपी लगातार ऐसे चेहरों को अपने पाले में ला रही है जिनका जमीनी जनाधार मजबूत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधायकों के औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद क्षेत्र में कई स्थानीय जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान स्तर के कार्यकर्ता भी सपा छोड़कर बीजेपी का रुख कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र में बीजेपी की संगठनात्मक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।